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Karnal News: करनाल, घरौंडा, जुंडला और निसिंग मंडी से बतान राइस मिल को निकले धान से भरे 87 ट्रक, 39 हुए गायब

Sun, 17 May 2026 01:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल Updated Sun, 17 May 2026 01:47 AM IST
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87 trucks loaded with paddy left for Bataan Rice Mill from Karnal, Gharaunda, Jundla and Nising Mandi, 39 went missing.
जितेंद्र नरवाल
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करनाल। जिले की अनाज मंडियों से राइस मिलों तक धान पहुंचाने के नाम पर हुए 3.54 करोड़ रुपये के घोटाले की विभागीय जांच में खुलासा हुआ कि करनाल, घरौंडा, निसिंग और जुंडला मंडी से राइस मिल तक धान पहुंचा ही नहीं।

मंडियों से बतान राइस मिल के लिए रवाना किए गए धान से भरे 87 ट्रकों में से 39 बीच रास्ते ही गायब हो गए। वहीं जो धान मिल में पहुंचा वो भी भौतिक सत्यापन में कम मिला। भौतिक सत्यापन में 2906 बैग यानी लगभग 1032 क्विंटल धान कम मिला। इस मामले में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के निरीक्षक समीर वशिष्ठ, लोकेश, यशबीर और संदीप बर्खास्त हुए हैं।
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दूसरी ओर तरावड़ी के बीआरसी राइस मिल के दस्तावेजों को पूरा किए बिना उसे धान अलॉट करवाने, कमियों को दूर करवाए बिना काम शुरू करवाने और मिल का 855 टन धान कम पाने के आरोप में उप निरीक्षक रामफल की बर्खास्तगी हुई। यानी इन पांचों अधिकारियों ने दोनों मिल का फर्जी गेट पास बनाकर करीब 12500 क्विंटल धान का गबन किया। इससे सरकार को 3 करोड़ 54 लाख 46 हजार रुपये का नुकसान हुआ।
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ऐसे किया घोटाला

धान घोटाले में बर्खास्त पांचों अधिकारियों ने मिलीभगत कर फर्जी गेट पास काटे, रिकॉर्ड तैयार किए और कई स्तरों पर नियमों को दरकिनार किया। जांच रिपोर्ट के अनुसार करनाल, घरौंडा, जुंडला और निसिंग इन मंडियों से बतान राइस मिल के लिए जो धान जारी किया गया, उसमें परिवहन रिकॉर्ड में कई जगह मंडी से मिल तक की दूरी शून्य किलोमीटर दिखाई गई। इससे साफ हुआ कि परिवहन प्रक्रिया केवल कागजों तक सीमित थी। वहीं किराए पर ली गई धान रखने की जगह पर भी दिखाया गया धान नहीं मिला। दूसरी ओर भौतिक सत्यापन में जब धान नहीं मिला तो अधिकारियों ने उसे जुंडला में किराए पर ली गई भाटिया ओपन प्लिंथ पर रखने की बात की। जब यहां चेकिंग की तो यहां भी वह धान नहीं मिला। पूरी जांच के बाद घोटाले का पर्दाफाश हुआ।

इन अधिकारियों ने ऐसे गायब किए इतने ट्रक -

- निरीक्षक समीर वशिष्ठ : करनाल मंडी से सलारू गांव में निरीक्षक और पीवी इंचार्ज समीर वशिष्ठ ने 12 ट्रक धान भेजा। इनमें से 10 की दूरी शून्य किलोमीटर दिखाई। पीवी के बाद भाटिया ओपन प्लिंथ जुंडला में स्टॉक रखने की बात कही गई। जांच में यहां भी स्टॉक नहीं मिला।

- निरीक्षक संदीप : जुंडला मंडी से बतान फूड्स राइस मिल तक 66 ट्रक भेजे। 24 की शून्य किलोमीटर की दूरी दिखा गायब कर दिया। पीवी के बाद भाटिया ओपन प्लिंथ जुंडला में स्टॉक रखने की बात कही लेकिन जांच में यहां स्टॉक नहीं मिला।

- निरीक्षक यशबीर : घरौंडा मंडी से बतान फूड्स राइस मिल तक 6 ट्रक भिजवाए, 03 की शून्य किलोमीटर दूरी दिखाई। पीवी के बाद इनका स्टॉक भी भाटिया ओपन प्लिंथ जुंडला में रखने की बात कही, जांच यहां भी स्टॉक नहीं मिला।

- निरीक्षक लोकेश : निसिंग मंडी से बतान फूड्स राइस मिल तक 03 ट्रक भिजवाए। 02 की शून्य किलोमीटर की दूरी दिखाई। पीवी के बाद इनका स्टॉक भी भाटिया ओपन प्लिंथ जुंडला में रखने की बात कही, जांच यहां भी स्टॉक नहीं मिला।

- उप निरीक्षक रामफल : तरावड़ी स्थित बीआरसी राइस मिल की कमियों को दूर नहीं किया। यहां से सग्गा मंडी के यार्ड में 855 टन धान रखने की बात की लेकिन इसकी अनुमति तक नहीं मिली, ये धान जांच में शॉर्ट मिला।



एसडीएम की पीवी और भिवानी डीएफएससी की जांच से खुला मामला

मामला दादूपुर रोडान निवासी देवेंद्र की शिकायत के बाद सामने आया। एसडीएम स्तर की प्रारंभिक जांच में रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में अंतर मिला। इसके बाद भिवानी के डीएफएससी अपार तिवारी को विभागीय जांच सौंपी गई। उनकी रिपोर्ट में पांचों अधिकारी दोषी पाए जाने पर बर्खास्त किया गया। मामले में अक्तूबर 2025 में एफआईआर दर्ज है और अब अन्य अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।




हर साल होता था खेल, इस बार फंसे

सूत्रों के अनुसार धान खरीद और उठान में इस प्रकार की गड़बड़ी लंबे समय से थी। फर्जी गेट पास, कागजी परिवहन और रिकॉर्ड में हेराफेरी के जरिए सरकारी धान गायब करने का यह तरीका पहले भी अपनाया जाता रहा लेकिन इस बार विस्तृत जांच और भौतिक सत्यापन के चलते पूरा मामला उजागर हो गया। अब विभाग में चर्चा है कि अगर अन्य राइस मिलों और मंडियों के रिकॉर्ड की गहन जांच कराई जाए तो और बड़े खुलासे हो सकते हैं
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