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Karnal News: टेढ़े पिलर और ब्लॉकों के अंतर पर डाल रहे प्लास्टर का पर्दा
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Tue, 02 Jun 2026 01:52 AM IST
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एसड़ीओ की मौजूदगी में चलता निर्माण कार्य संवाद
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करनाल।
करीब 34 करोड़ रुपये की लागत से जिला परिषद के नए निर्माणाधीन बहुमंजिला भवन के निर्माण कार्य की खामियों को अब अधिकारी और ठेकेदार प्लास्टर के पर्दे से ढकने में लगे हैं। टेढ़े पिलर और भवन निर्माण में इस्तेमाल ब्लॉकों के बीच में गैप को भी अब दिन-रात काम करके ढका जा रहा है ताकि उन पर गाज न गिरे।
जबकि करीब डेढ़ माह पहले हुई गुणवत्ता आश्वासन समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट में टेढ़े पिलर, ब्लॉक में अंतर और हल्के स्तर के सीमेंट के इस्तेमाल का जिक्र किया है। जिस पर संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री नायब सैनी ने 27 मई को पंचायती राज करनाल के एक्सईएन नारायण दत्त, करनाल के पूर्व एक्सईएन एवं वर्तमान में कैथल के एक्सईएन परमिंदर सिंह और जेई रमेश को निलंबित किया। काम में लापरवाही में और कौन संलिप्त हैं, इसकी जांच समिति व विभागीय स्तर पर चल रही है।
हालात यह हैं कि भवन निर्माण कार्य करीब एक साल की देरी से चल रहा है। इस कार्य को जून 2025 में पूरा होना था लेकिन लापरवाही के कारण यह अटका रहा। अब यहां पर विभाग के चीफ इंजीनियर की ओर से एसडीओ कमलेश को तैनात किया गया। उनकी देखरेख में निर्माण एजेंसी के कर्मचारी शीघ्रता से काम निपटाने में जुटे हैं। इसी बीच में खामियों को ढकने का प्रयास किया जा रहा है।
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पंचायती राज एक्सईएन का कार्यभार संभाल रहे जिला परिषद के एक्सईएन प्रदीप धीमान का कहना है कि विभागीय जांच की जा रही है, गुणवत्ता में क्या कमी रही, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है।
एक साल तक अटका रहा 12 करोड़ रुपये फंड
पुराना जिला परिषद कार्यालय की जगह पर ही 34 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले भवन का निर्माण कार्य 27 जून 2023 को शुरू हुआ था, जिसे 24 माह में यानी जून 2025 में पूरा किया जाना था। काम जींद की एजेंसी संजय कुमार कान्ट्रेक्टर को दिया गया था। पूर्व एक्सईएन परमिंद्र का दावा है कि करीब एक साल तक 12 करोड़ रुपये का फंड जारी नहीं हुआ, इसलिए काम में देरी हुई है।
अधिकारी बदलते गए... किसी ने जिम्मेदारी ही नहीं समझी
पंचायती राज विभाग में अधिकारियों के तबादलों के कारण यहां नए अधिकारी आते रहे और किसी ने भी जिले के इस बड़े प्रोजेक्ट की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया। अगस्त 2025 में एक्सईएन परमिंदर सिंह का यहां से कैथल तबादला हो गया। उनके बाद नारायण दत्त को एक्सईएन की जिम्मेदारी दी गई। वे भी बीच में लंबे समय तक छुट्टी पर रहे तो उनकी जगह जिला परिषद के एक्सईएन को कार्यभार मिला। इसके अलावा परियोजना पर काम एसडीओ रामविलास की देखरेख में चल रहा था, वे सितंबर 2025 में रिटायर हो गए। इनकी जगह जिला परिषद के एसडीओ दीपक को ड्यूटी दी गई। अब एसडीओ और एक्सईएन दोनों ही जवाब देने व जिम्मेदारी से बच रहे हैं।
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सस्पेंड होने के बाद भी कार्यालय पहुंच फाइलें देख रहे एक्सईएन
करनाल। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के आदेश पर जिला परिषद के निर्माणाधीन भवन की गुणवत्ता में खामियां मिलने पर पंचायती राज विभाग की ओर से करनाल के एक्सईएन नारायण दत्त को 27 मई को निलंबित कर दिया गया था। उनकी जगह जिला परिषद के एक्सईएन प्रदीप धीमान को चार्ज किया गया है। नारायण दत्त अभी भी करनाल कार्यालय में आ रहे हैं। सोमवार को वह कार्यालय में पहुंचे थे और दोपहर करीब एक बजे अपने केबिन में बैठकर फाइलें चेक करते रहे। उनकी नेम प्लेट भी कार्यालय के बाहर लगी हुई है। पूछने पर बताया कि विभागीय बैठक है, इसलिए रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं।
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करीब 34 करोड़ रुपये की लागत से जिला परिषद के नए निर्माणाधीन बहुमंजिला भवन के निर्माण कार्य की खामियों को अब अधिकारी और ठेकेदार प्लास्टर के पर्दे से ढकने में लगे हैं। टेढ़े पिलर और भवन निर्माण में इस्तेमाल ब्लॉकों के बीच में गैप को भी अब दिन-रात काम करके ढका जा रहा है ताकि उन पर गाज न गिरे।
जबकि करीब डेढ़ माह पहले हुई गुणवत्ता आश्वासन समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट में टेढ़े पिलर, ब्लॉक में अंतर और हल्के स्तर के सीमेंट के इस्तेमाल का जिक्र किया है। जिस पर संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री नायब सैनी ने 27 मई को पंचायती राज करनाल के एक्सईएन नारायण दत्त, करनाल के पूर्व एक्सईएन एवं वर्तमान में कैथल के एक्सईएन परमिंदर सिंह और जेई रमेश को निलंबित किया। काम में लापरवाही में और कौन संलिप्त हैं, इसकी जांच समिति व विभागीय स्तर पर चल रही है।
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हालात यह हैं कि भवन निर्माण कार्य करीब एक साल की देरी से चल रहा है। इस कार्य को जून 2025 में पूरा होना था लेकिन लापरवाही के कारण यह अटका रहा। अब यहां पर विभाग के चीफ इंजीनियर की ओर से एसडीओ कमलेश को तैनात किया गया। उनकी देखरेख में निर्माण एजेंसी के कर्मचारी शीघ्रता से काम निपटाने में जुटे हैं। इसी बीच में खामियों को ढकने का प्रयास किया जा रहा है।
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एक साल तक अटका रहा 12 करोड़ रुपये फंड
पुराना जिला परिषद कार्यालय की जगह पर ही 34 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले भवन का निर्माण कार्य 27 जून 2023 को शुरू हुआ था, जिसे 24 माह में यानी जून 2025 में पूरा किया जाना था। काम जींद की एजेंसी संजय कुमार कान्ट्रेक्टर को दिया गया था। पूर्व एक्सईएन परमिंद्र का दावा है कि करीब एक साल तक 12 करोड़ रुपये का फंड जारी नहीं हुआ, इसलिए काम में देरी हुई है।
अधिकारी बदलते गए... किसी ने जिम्मेदारी ही नहीं समझी
पंचायती राज विभाग में अधिकारियों के तबादलों के कारण यहां नए अधिकारी आते रहे और किसी ने भी जिले के इस बड़े प्रोजेक्ट की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया। अगस्त 2025 में एक्सईएन परमिंदर सिंह का यहां से कैथल तबादला हो गया। उनके बाद नारायण दत्त को एक्सईएन की जिम्मेदारी दी गई। वे भी बीच में लंबे समय तक छुट्टी पर रहे तो उनकी जगह जिला परिषद के एक्सईएन को कार्यभार मिला। इसके अलावा परियोजना पर काम एसडीओ रामविलास की देखरेख में चल रहा था, वे सितंबर 2025 में रिटायर हो गए। इनकी जगह जिला परिषद के एसडीओ दीपक को ड्यूटी दी गई। अब एसडीओ और एक्सईएन दोनों ही जवाब देने व जिम्मेदारी से बच रहे हैं।
सस्पेंड होने के बाद भी कार्यालय पहुंच फाइलें देख रहे एक्सईएन
करनाल। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के आदेश पर जिला परिषद के निर्माणाधीन भवन की गुणवत्ता में खामियां मिलने पर पंचायती राज विभाग की ओर से करनाल के एक्सईएन नारायण दत्त को 27 मई को निलंबित कर दिया गया था। उनकी जगह जिला परिषद के एक्सईएन प्रदीप धीमान को चार्ज किया गया है। नारायण दत्त अभी भी करनाल कार्यालय में आ रहे हैं। सोमवार को वह कार्यालय में पहुंचे थे और दोपहर करीब एक बजे अपने केबिन में बैठकर फाइलें चेक करते रहे। उनकी नेम प्लेट भी कार्यालय के बाहर लगी हुई है। पूछने पर बताया कि विभागीय बैठक है, इसलिए रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं।

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