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Karnal News: वॉलीबॉल का गढ़ माना जाता है अभिमन्युपुर, भीम और अर्जुन अवार्डी तक दिए
Tue, 02 Jun 2026 01:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Tue, 02 Jun 2026 01:49 AM IST
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कुरुक्षेत्र। बॉस्केटबाल खेल के लिए प्रैक्टिस करते खिलाड़ी। संवाद
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गौरव सागवाल
कुरुक्षेत्र। महाभारत काल में वीर अभिमन्यु के बलिदान के लिए जाने वाले गांव अभिमन्युपुर खेल जगत में एक नई पहचान बना चुका है। यह गांव अब हरियाणा में वॉलीबॉल का गढ़ कहलाता है। करीब 50 वर्ष पहले शुरू हुई वॉलीबॉल की परंपरा आज इस मुकाम पर पहुंच चुकी है कि गांव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर के भीम अवार्डी से लेकर अर्जुन अवार्डी खिलाड़ी तक देश को दिए, जबकि 100 से अधिक खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुके हैं। बड़ी बात यह है कि खेल के दम पर सैकड़ों युवाओं का भविष्य भी संवर चुका है।
रोड़ समाज के वर्तमान प्रधान व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी रहे बलकार सिंह को प्रदेश के सर्वोच्च खेल सम्मान भीम अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है जबकि डॉ. दलेल सिंह को अर्जुन अवार्ड प्राप्त हुआ। इसके अलावा गांव के 15 से अधिक खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वर्तमान में सीआरपीएफ जयपुर की वॉलीबॉल टीम की कप्तान निशा चौहान भी इसी गांव की बेटी हैं, जो युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनी हुई हैं। अमित पराशर चार बार बास्केटबॉल में देश का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व कर चुका है।
अभिमन्युपुर के स्टेडियम में रोजाना 150 से अधिक खिलाड़ी अभ्यास करते हैं। इनमें करीब 50 लड़कियां भी शामिल हैं। गांव ही नहीं, आसपास के क्षेत्रों के खिलाड़ी भी यहां प्रशिक्षण लेने पहुंचते हैं। अब तक 35 से अधिक महिला खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर खेल चुकी हैं, जबकि करीब 40 लड़कियों को वॉलीबॉल के दम पर सरकारी नौकरी मिल चुकी है।
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इसके अलावा गांव में हॉकी के राष्ट्रीय खिलाड़ी भी निकले हैं। साथ ही इस गांव की लड़कियों का साइक्लिंग की तरफ रुझान बना हुआ है। लगातार तीसरे साल भी गांव को साइक्लिंग की नर्सरी मिली है। वहीं गांव में सरकार की तरफ से लड़कों और लड़कियों की खेल नर्सरियां भी चल रही हैं।
अभिमन्युपुर के खेल इतिहास में स्वर्गीय सुनील कुमार का नाम भी सम्मान के साथ लिया जाता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहे सुनील कुमार का सड़क दुर्घटना में निधन हो गया था। उनकी स्मृति में हर वर्ष सुनील कुमार मेमोरियल वॉलीबॉल प्रतियोगिता आयोजित की जाती है, जिसमें देश की प्रमुख टीमें भाग लेती हैं। वॉलीबॉल के दम पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाला अभिमन्युपुर आज केवल कुरुक्षेत्र ही नहीं, बल्कि पूरे हरियाणा के लिए खेल प्रतिभाओं की नर्सरी बन चुका है।
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गांव में चल रही हैं पांच खेल नर्सरियां
अभिमन्युपुर गांव में जहां बच्चे वॉलीबॉल में अपना भविष्य संवार रहे हैं, वहीं दूसरे खेलों की तरफ भी खिलाड़ियों का रुझान बढ़ता जा रहा है। मौजूदा समय में गांव में दो वॉलीबॉल, एक साइक्लिंग, एक बास्केटबॉल तथा एक कुश्ती की नर्सरी चल रही है। साइक्लिंग में करीब 50 से 60 लड़कियां अभ्यास कर रही हैं। वहीं बास्केटबॉल में 40 लड़के वर्तमान समय में खेल रहे हैं। इसके अलावा कुश्ती में भी 30 लड़के प्रशिक्षण ले रहे हैं।
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गांव ने कर दिखाया : रजनी
वॉलीबॉल महिला कोच रजनी का कहना है कि खेल ही एकमात्र माध्यम है, जिसमें सामान्य परिवार का बच्चा भी नौकरी हासिल कर सकता है। अभिमन्युपुर गांव ने यह कर दिखाया है। आज गांव के 100 से भी अधिक बच्चे इसी खेल के दम पर नौकरियां कर रहे हैं, जिसमें पूरे गांव का सहयोग है। रजनी का कहना है कि खेल कोटे से यदि और अधिक भर्तियां हों तो विदेशों की ओर हो रहा पलायन भी रुक सकता है।
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गांव में अब हर खेल का केंद्र बनता जा रहा है : राजेंद्र
बास्केटबॉल कोच राजेंद्र का कहना है कि गांव में अब वॉलीबॉल के साथ-साथ दूसरे खेलों को लेकर भी रुचि बढ़ती जा रही है। मौजूदा समय में गांव के 300 से अधिक खिलाड़ी प्रशिक्षण ले रहे हैं, जो गांव के लिए बड़ी उपलब्धि है। बास्केटबॉल में भी अब अभिभावक रुचि दिखा रहे हैं, जो अच्छी बात है।
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उपलब्धियों का खजाना बढ़ता ही जा रहा है : शिव
गांव में वॉलीबॉल कोच शिव का कहना है कि खेलों में हासिल होने वाली उपलब्धियों का खजाना बढ़ता ही जा रहा है। भीम अवार्ड से लेकर अर्जुन अवार्ड तक गांव के पूर्व खिलाड़ियों ने हासिल किए हैं। उनकी मेहनत का ही परिणाम है कि आज अन्य खिलाड़ी भी राष्ट्रीय स्तर तक पदक जीतकर गांव और जिले का नाम रोशन कर रहे हैं।
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गांव में साइक्लिंग को लेकर भी बढ़ रहा रुझान : नीरज
गांव को तीसरी बार मिली साइक्लिंग खेल नर्सरी की कोच नीरज देवी ने कहा कि पहले लड़कियों को जोड़ने में थोड़ी दिक्कत हुई लेकिन आज 50 से ज्यादा लड़कियां साइक्लिंग में भविष्य तरास रही हैं। दूसरे खेलों के साथ साथ साइक्लिंग का रुझान बढ़ना अच्छे संकेत हैं।
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बच्चों को बढ़ता देख होती हैं खुशी : बलकार
भीम अवार्डी रहे बलकार सिंह का कहना है कि हमने 1977 से शुरु किया था खेलना, आज भी वहीं माहौल है। खुशी होती है ऐसे गांव के बच्चों को आगे बढ़ता देखकर, वॉलीबॉल में भविष्य बनाना देखकर।
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हर खिलाड़ी अपने में खास : अर्जुन अवार्डी डॉ. दलेल
केयू के खेल विभाग के निदेशक रहे अर्जुन अवार्डी डॉ दलेल सिंह का कहना है कि हर खिलाड़ी अपने में खास होता हैं। आज के समय में जैसी सुविधाएं है बच्चों को उनका फायदा लेकर हमसे भी ऊंचा मुकाम हासिल करना चाहिए।
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इंडोर स्टेडियम हो तो कई हीरे निकल सकते हैं : ग्रामीण
ग्रामीणों का कहना है कि अभिमन्युपुर गांव ने खेल जगत को अनेक हीरे दिए हैं। लेकिन समय के साथ मांग और तकनीक बढ़ती जा रही है। आज समय की मांग है कि गांव में एक इंडोर खेल स्टेडियम हो, जिसमें विभिन्न खेलों के लिए सुविधाएं उपलब्ध हों। इससे बच्चे धूप, गर्मी और बारिश की परवाह किए बिना अभ्यास कर सकेंगे और भविष्य में यहां से कई और प्रतिभाशाली खिलाड़ी निकल सकते हैं।
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कुरुक्षेत्र। महाभारत काल में वीर अभिमन्यु के बलिदान के लिए जाने वाले गांव अभिमन्युपुर खेल जगत में एक नई पहचान बना चुका है। यह गांव अब हरियाणा में वॉलीबॉल का गढ़ कहलाता है। करीब 50 वर्ष पहले शुरू हुई वॉलीबॉल की परंपरा आज इस मुकाम पर पहुंच चुकी है कि गांव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर के भीम अवार्डी से लेकर अर्जुन अवार्डी खिलाड़ी तक देश को दिए, जबकि 100 से अधिक खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुके हैं। बड़ी बात यह है कि खेल के दम पर सैकड़ों युवाओं का भविष्य भी संवर चुका है।
रोड़ समाज के वर्तमान प्रधान व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी रहे बलकार सिंह को प्रदेश के सर्वोच्च खेल सम्मान भीम अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है जबकि डॉ. दलेल सिंह को अर्जुन अवार्ड प्राप्त हुआ। इसके अलावा गांव के 15 से अधिक खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वर्तमान में सीआरपीएफ जयपुर की वॉलीबॉल टीम की कप्तान निशा चौहान भी इसी गांव की बेटी हैं, जो युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनी हुई हैं। अमित पराशर चार बार बास्केटबॉल में देश का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व कर चुका है।
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अभिमन्युपुर के स्टेडियम में रोजाना 150 से अधिक खिलाड़ी अभ्यास करते हैं। इनमें करीब 50 लड़कियां भी शामिल हैं। गांव ही नहीं, आसपास के क्षेत्रों के खिलाड़ी भी यहां प्रशिक्षण लेने पहुंचते हैं। अब तक 35 से अधिक महिला खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर खेल चुकी हैं, जबकि करीब 40 लड़कियों को वॉलीबॉल के दम पर सरकारी नौकरी मिल चुकी है।
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इसके अलावा गांव में हॉकी के राष्ट्रीय खिलाड़ी भी निकले हैं। साथ ही इस गांव की लड़कियों का साइक्लिंग की तरफ रुझान बना हुआ है। लगातार तीसरे साल भी गांव को साइक्लिंग की नर्सरी मिली है। वहीं गांव में सरकार की तरफ से लड़कों और लड़कियों की खेल नर्सरियां भी चल रही हैं।
अभिमन्युपुर के खेल इतिहास में स्वर्गीय सुनील कुमार का नाम भी सम्मान के साथ लिया जाता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहे सुनील कुमार का सड़क दुर्घटना में निधन हो गया था। उनकी स्मृति में हर वर्ष सुनील कुमार मेमोरियल वॉलीबॉल प्रतियोगिता आयोजित की जाती है, जिसमें देश की प्रमुख टीमें भाग लेती हैं। वॉलीबॉल के दम पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाला अभिमन्युपुर आज केवल कुरुक्षेत्र ही नहीं, बल्कि पूरे हरियाणा के लिए खेल प्रतिभाओं की नर्सरी बन चुका है।
गांव में चल रही हैं पांच खेल नर्सरियां
अभिमन्युपुर गांव में जहां बच्चे वॉलीबॉल में अपना भविष्य संवार रहे हैं, वहीं दूसरे खेलों की तरफ भी खिलाड़ियों का रुझान बढ़ता जा रहा है। मौजूदा समय में गांव में दो वॉलीबॉल, एक साइक्लिंग, एक बास्केटबॉल तथा एक कुश्ती की नर्सरी चल रही है। साइक्लिंग में करीब 50 से 60 लड़कियां अभ्यास कर रही हैं। वहीं बास्केटबॉल में 40 लड़के वर्तमान समय में खेल रहे हैं। इसके अलावा कुश्ती में भी 30 लड़के प्रशिक्षण ले रहे हैं।
गांव ने कर दिखाया : रजनी
वॉलीबॉल महिला कोच रजनी का कहना है कि खेल ही एकमात्र माध्यम है, जिसमें सामान्य परिवार का बच्चा भी नौकरी हासिल कर सकता है। अभिमन्युपुर गांव ने यह कर दिखाया है। आज गांव के 100 से भी अधिक बच्चे इसी खेल के दम पर नौकरियां कर रहे हैं, जिसमें पूरे गांव का सहयोग है। रजनी का कहना है कि खेल कोटे से यदि और अधिक भर्तियां हों तो विदेशों की ओर हो रहा पलायन भी रुक सकता है।
गांव में अब हर खेल का केंद्र बनता जा रहा है : राजेंद्र
बास्केटबॉल कोच राजेंद्र का कहना है कि गांव में अब वॉलीबॉल के साथ-साथ दूसरे खेलों को लेकर भी रुचि बढ़ती जा रही है। मौजूदा समय में गांव के 300 से अधिक खिलाड़ी प्रशिक्षण ले रहे हैं, जो गांव के लिए बड़ी उपलब्धि है। बास्केटबॉल में भी अब अभिभावक रुचि दिखा रहे हैं, जो अच्छी बात है।
उपलब्धियों का खजाना बढ़ता ही जा रहा है : शिव
गांव में वॉलीबॉल कोच शिव का कहना है कि खेलों में हासिल होने वाली उपलब्धियों का खजाना बढ़ता ही जा रहा है। भीम अवार्ड से लेकर अर्जुन अवार्ड तक गांव के पूर्व खिलाड़ियों ने हासिल किए हैं। उनकी मेहनत का ही परिणाम है कि आज अन्य खिलाड़ी भी राष्ट्रीय स्तर तक पदक जीतकर गांव और जिले का नाम रोशन कर रहे हैं।
गांव में साइक्लिंग को लेकर भी बढ़ रहा रुझान : नीरज
गांव को तीसरी बार मिली साइक्लिंग खेल नर्सरी की कोच नीरज देवी ने कहा कि पहले लड़कियों को जोड़ने में थोड़ी दिक्कत हुई लेकिन आज 50 से ज्यादा लड़कियां साइक्लिंग में भविष्य तरास रही हैं। दूसरे खेलों के साथ साथ साइक्लिंग का रुझान बढ़ना अच्छे संकेत हैं।
बच्चों को बढ़ता देख होती हैं खुशी : बलकार
भीम अवार्डी रहे बलकार सिंह का कहना है कि हमने 1977 से शुरु किया था खेलना, आज भी वहीं माहौल है। खुशी होती है ऐसे गांव के बच्चों को आगे बढ़ता देखकर, वॉलीबॉल में भविष्य बनाना देखकर।
हर खिलाड़ी अपने में खास : अर्जुन अवार्डी डॉ. दलेल
केयू के खेल विभाग के निदेशक रहे अर्जुन अवार्डी डॉ दलेल सिंह का कहना है कि हर खिलाड़ी अपने में खास होता हैं। आज के समय में जैसी सुविधाएं है बच्चों को उनका फायदा लेकर हमसे भी ऊंचा मुकाम हासिल करना चाहिए।
इंडोर स्टेडियम हो तो कई हीरे निकल सकते हैं : ग्रामीण
ग्रामीणों का कहना है कि अभिमन्युपुर गांव ने खेल जगत को अनेक हीरे दिए हैं। लेकिन समय के साथ मांग और तकनीक बढ़ती जा रही है। आज समय की मांग है कि गांव में एक इंडोर खेल स्टेडियम हो, जिसमें विभिन्न खेलों के लिए सुविधाएं उपलब्ध हों। इससे बच्चे धूप, गर्मी और बारिश की परवाह किए बिना अभ्यास कर सकेंगे और भविष्य में यहां से कई और प्रतिभाशाली खिलाड़ी निकल सकते हैं।

कुरुक्षेत्र। बॉस्केटबाल खेल के लिए प्रैक्टिस करते खिलाड़ी। संवाद

कुरुक्षेत्र। बॉस्केटबाल खेल के लिए प्रैक्टिस करते खिलाड़ी। संवाद

कुरुक्षेत्र। बॉस्केटबाल खेल के लिए प्रैक्टिस करते खिलाड़ी। संवाद

कुरुक्षेत्र। बॉस्केटबाल खेल के लिए प्रैक्टिस करते खिलाड़ी। संवाद

कुरुक्षेत्र। बॉस्केटबाल खेल के लिए प्रैक्टिस करते खिलाड़ी। संवाद

कुरुक्षेत्र। बॉस्केटबाल खेल के लिए प्रैक्टिस करते खिलाड़ी। संवाद

कुरुक्षेत्र। बॉस्केटबाल खेल के लिए प्रैक्टिस करते खिलाड़ी। संवाद