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Karnal News: निजी स्कूलों की लापरवाही से अटके दस हजार बच्चों के दाखिले
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Mon, 23 Mar 2026 02:33 AM IST
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काजल पांचाल
करनाल। स्कूली शिक्षा के नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत में अब महज आठ दिन शेष हैं लेकिन अभी तक जिले में 58 स्कूलों ने शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के लिए निर्धारित सीटों तक की घोषणा नहीं की है। इससे जिलेभर से करीब दस हजार बच्चों के दाखिले अटक गए हैं। अब शिक्षा विभाग ने एमआईएस पोर्टल को बंद कर दिया है। स्कूलों पर पांच हजार रुपये से एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया है। जब तक ये स्कूल जुर्माना नहीं भरेंगे तब तक पोर्टल नहीं खोला जाएगा।
जिले में आरटीई दाखिलों के लिए सीबीएसई के 160 स्कूलों में से 58 स्कूलों ने एंट्री लेवल कक्षाओं की सीटों का डाटा अब तक सीट डिक्लेरेशन पोर्टल पर अपलोड ही नहीं किया है। 20 मार्च की रात तक सीट डिक्लेरेशन पोर्टल पर अपनी सीटों का डाटा अपलोड करने के निर्देश दिए थे। विभाग ने पहले भी कई बार इस संबंध में पत्र जारी किए और समय भी बढ़ाया लेकिन इसके बावजूद कई स्कूलों ने प्रक्रिया पूरी नहीं की। ऐसे में लगभग 10 हजार आरटीई सीटों की स्थिति स्पष्ट ही नहीं हो पाई। इसका असर जरूरतमंद बच्चों के दाखिलों पर पड़ने लगा है। संवाद
160 स्कूलों में 1.60 लाख छात्र-
जिले में करीब 160 निजी सीबीएसई स्कूलों में लगभग एक लाख 60 हजार छात्र पढ़ते हैं। औसतन प्रति स्कूल हजार छात्रों के हिसाब से देखें तो जिन 58 स्कूलों ने डाटा अपलोड नहीं किया। एंट्री लेवल कक्षाओं में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी ईडब्ल्यूएस के बच्चों के लिए आरक्षित होती हैं। ऐसे में करीब 10 हजार सीटें आरटीई के तहत आती हैं, जिनकी अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं है।
सबसे अधिक वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल-
जिन स्कूलों ने डाटा अपलोड नहीं किया है उनमें सबसे अधिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल हैं। इनमें 17 सीनियर सेकेंडरी, 22 हाई, 12 मिडिल और 7 प्राइमरी स्कूल हैं। वहीं, हर ब्लॉक से स्कूलों शामिल हैं। सबसे अधिक करनाल में 36 स्कूल हैं। वहीं, आठ स्कूल नीलोखेड़ी, छह असंध, पांच निसिंग, दो घरौंडा और एक इंद्री ब्लॉक से हैं।
जुर्माना भरने पर फिर खुलेगा पोर्टलविभाग ने स्पष्ट किया है कि अगर स्कूल समय रहते सीट डिक्लेरेशन पोर्टल पर डाटा फाइनल सबमिट नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। स्कूलों का एमआईएस पोर्टल बंद किया गया है और पांच हजार से एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया गया है। स्कूलों को पहले जुर्माना जमा करना होगा। कोई स्कूल जुर्माना जमा नहीं करता है तो जिम्मेदारी स्कूल मुखिया की मानी जाएगी। जुर्माने के बाद ही उनका एमआईएस पोर्टल दोबारा चालू किया जाएगा और उन्हें नए सत्र के लिए सीटें दिखाने की अनुमति मिलेगी।
सभी स्कूलों को 20 मार्च की रात 12 बजे तक समय दिया गया था। अब जो भी विभाग के निर्देश होंगे उसके अनुसार स्कूलों पर कार्रवाई की जाएगी। जिन स्कूलों ने आरटीई के तहत सीट अपलोड नहीं की हैं उन पर जुर्माना लगाया जाएगा। जब तक स्कूलों की ओर से जुर्माना नहीं भरा दिया जाएगा तब तक एमआईएस पोर्टल बंद रहेगा। - नीलम कुंडू, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी
जिले में जो 58 निजी स्कूल सूची में आए हैं जिन्होंने एमआईएस पोर्टल पर आरक्षित सीटों को डाटा अपलोड नहीं किया है, उन पर कार्रवाई की जाएगी और जुर्माना लगाया जाएगा। - रोहतास वर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी
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करनाल। स्कूली शिक्षा के नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत में अब महज आठ दिन शेष हैं लेकिन अभी तक जिले में 58 स्कूलों ने शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के लिए निर्धारित सीटों तक की घोषणा नहीं की है। इससे जिलेभर से करीब दस हजार बच्चों के दाखिले अटक गए हैं। अब शिक्षा विभाग ने एमआईएस पोर्टल को बंद कर दिया है। स्कूलों पर पांच हजार रुपये से एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया है। जब तक ये स्कूल जुर्माना नहीं भरेंगे तब तक पोर्टल नहीं खोला जाएगा।
जिले में आरटीई दाखिलों के लिए सीबीएसई के 160 स्कूलों में से 58 स्कूलों ने एंट्री लेवल कक्षाओं की सीटों का डाटा अब तक सीट डिक्लेरेशन पोर्टल पर अपलोड ही नहीं किया है। 20 मार्च की रात तक सीट डिक्लेरेशन पोर्टल पर अपनी सीटों का डाटा अपलोड करने के निर्देश दिए थे। विभाग ने पहले भी कई बार इस संबंध में पत्र जारी किए और समय भी बढ़ाया लेकिन इसके बावजूद कई स्कूलों ने प्रक्रिया पूरी नहीं की। ऐसे में लगभग 10 हजार आरटीई सीटों की स्थिति स्पष्ट ही नहीं हो पाई। इसका असर जरूरतमंद बच्चों के दाखिलों पर पड़ने लगा है। संवाद
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160 स्कूलों में 1.60 लाख छात्र-
जिले में करीब 160 निजी सीबीएसई स्कूलों में लगभग एक लाख 60 हजार छात्र पढ़ते हैं। औसतन प्रति स्कूल हजार छात्रों के हिसाब से देखें तो जिन 58 स्कूलों ने डाटा अपलोड नहीं किया। एंट्री लेवल कक्षाओं में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी ईडब्ल्यूएस के बच्चों के लिए आरक्षित होती हैं। ऐसे में करीब 10 हजार सीटें आरटीई के तहत आती हैं, जिनकी अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं है।
सबसे अधिक वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल-
जिन स्कूलों ने डाटा अपलोड नहीं किया है उनमें सबसे अधिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल हैं। इनमें 17 सीनियर सेकेंडरी, 22 हाई, 12 मिडिल और 7 प्राइमरी स्कूल हैं। वहीं, हर ब्लॉक से स्कूलों शामिल हैं। सबसे अधिक करनाल में 36 स्कूल हैं। वहीं, आठ स्कूल नीलोखेड़ी, छह असंध, पांच निसिंग, दो घरौंडा और एक इंद्री ब्लॉक से हैं।
जुर्माना भरने पर फिर खुलेगा पोर्टलविभाग ने स्पष्ट किया है कि अगर स्कूल समय रहते सीट डिक्लेरेशन पोर्टल पर डाटा फाइनल सबमिट नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। स्कूलों का एमआईएस पोर्टल बंद किया गया है और पांच हजार से एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया गया है। स्कूलों को पहले जुर्माना जमा करना होगा। कोई स्कूल जुर्माना जमा नहीं करता है तो जिम्मेदारी स्कूल मुखिया की मानी जाएगी। जुर्माने के बाद ही उनका एमआईएस पोर्टल दोबारा चालू किया जाएगा और उन्हें नए सत्र के लिए सीटें दिखाने की अनुमति मिलेगी।
सभी स्कूलों को 20 मार्च की रात 12 बजे तक समय दिया गया था। अब जो भी विभाग के निर्देश होंगे उसके अनुसार स्कूलों पर कार्रवाई की जाएगी। जिन स्कूलों ने आरटीई के तहत सीट अपलोड नहीं की हैं उन पर जुर्माना लगाया जाएगा। जब तक स्कूलों की ओर से जुर्माना नहीं भरा दिया जाएगा तब तक एमआईएस पोर्टल बंद रहेगा। - नीलम कुंडू, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी
जिले में जो 58 निजी स्कूल सूची में आए हैं जिन्होंने एमआईएस पोर्टल पर आरक्षित सीटों को डाटा अपलोड नहीं किया है, उन पर कार्रवाई की जाएगी और जुर्माना लगाया जाएगा। - रोहतास वर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी