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Karnal News: बैंक ने बिना अनुमति 50 लाख की एफडी तोड़ी, 32 हजार का जुर्माना
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- जरनैली काॅलोनी निवासी अक्षत शर्मा ने 2014 में एयू स्माॅल बैंक में करवाई थी एफडी
- बैंक को टीडीएस के रूप में काटने थे 32344 रुपये, बचत खाते में माैजूद थे 90 हजार रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बैंकिंग सेवा में लापरवाही पर एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक पर जुर्माना लगाया है। आयोग ने बैंक को आदेश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को हुए नुकसान की भरपाई करे और मानसिक उत्पीड़न के लिए 20 हजार रुपये मुआवजा दे।
आयोग के फैसले के अनुसार, शिकायतकर्ता अधिवक्ता अक्षत शर्मा ने एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक की सेक्टर-12 शाखा में 50 लाख रुपये की एफडी करवाई थी। इसकी अवधि 14 जून 2024 से 14 दिसंबर 2025 तक थी। इसके साथ ही उनका इसी बैंक में एक बचत खाता भी चल रहा था। बैंक की ओर से 31 मार्च 2025 को बैंक ने टीडीएस कटौती के नाम पर 32 हजार 343.85 रुपये की राशि काट ली। बैंक ने इस टीडीएस का एक हिस्सा (यानि 12,791) अक्षत शर्मा की 50 लाख रुपये वाली एफडी को बीच में ही आंशिक रूप से तोड़कर निकाला जबकि बाकी की रकम (19,552.85 रुपये) उनके बचत खाते से काटे गए हैं।
अक्षत शर्मा का आरोप था कि जब उनकी एफडी तोड़कर राशि निकाली गई है, उस समय उनके बचत खाते में लगभग 90 हजार रुपये की पर्याप्त राशि मौजूद थी। बैंक चाहता तो पूरी टीडीएस राशि बचत खाते से काट सकता था लेकिन बिना उनकी सहमति के एफडी को बीच में तोड़ दिया। इससे उन्हें करीब 12 हजार रुपये के ब्याज राशि का नुकसान पहुंचा है। बैंक से कई बार शिकायत करने के बाद भी जब समाधान नहीं निकला तो उन्होंने उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया।
सुनवाई के दौरान बैंक ने कहा कि शिकायतकर्ता ने वित्तीय वर्ष 2024-2025 के लिए फॉर्म 15जी जमा किया था, इसके तहत तीन लाख तक की टैक्स छूट मिलती है। चूंकि 31 मार्च 2025 को उनकी छूट की सीमा पार हो गई थी इसलिए नियमों के तहत कुल ब्याज पर 10 प्रतिशत की दर से टीडीएस काटना कानूनी रूप से अनिवार्य था। बैंक ने नियम-शर्तों का हवाला देते हुए कहा कि यदि टीडीएस काटने के लिए पर्याप्त ब्याज राशि उपलब्ध न हो, तो बैंक को ग्राहक के किसी अन्य खाते या मुख्य एफडीआर राशि को समय से पहले तोड़कर टैक्स वसूलने का अधिकार है।
बैंक के तर्क को माना गलत
जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह और सदस्य नीरु अग्रवाल व सर्वजीत कौर की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद बैंक के इस रवैये को गलत माना। अदालत ने कहा कि जब शिकायतकर्ता के बचत खाते में 90 हजार रुपये की पर्याप्त राशि मौजूद थी, तो बैंक को टीडीएस काटने के लिए एफडीआर तोड़ने की कोई आवश्यकता नहीं थी। उपभोक्ता फोरम ने शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए आदेश दिए कि एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक शिकायतकर्ता को एफडी के ब्याज के नुकसान के रूप में 12 हजार रुपये लाैटाएगा। इसके अलावा मानसिक प्रताड़ना, परेशानी और अदालती कार्रवाई के खर्च के एवज में 20 हजार रुपये का भुगतान करे।
- बैंक को टीडीएस के रूप में काटने थे 32344 रुपये, बचत खाते में माैजूद थे 90 हजार रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बैंकिंग सेवा में लापरवाही पर एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक पर जुर्माना लगाया है। आयोग ने बैंक को आदेश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को हुए नुकसान की भरपाई करे और मानसिक उत्पीड़न के लिए 20 हजार रुपये मुआवजा दे।
आयोग के फैसले के अनुसार, शिकायतकर्ता अधिवक्ता अक्षत शर्मा ने एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक की सेक्टर-12 शाखा में 50 लाख रुपये की एफडी करवाई थी। इसकी अवधि 14 जून 2024 से 14 दिसंबर 2025 तक थी। इसके साथ ही उनका इसी बैंक में एक बचत खाता भी चल रहा था। बैंक की ओर से 31 मार्च 2025 को बैंक ने टीडीएस कटौती के नाम पर 32 हजार 343.85 रुपये की राशि काट ली। बैंक ने इस टीडीएस का एक हिस्सा (यानि 12,791) अक्षत शर्मा की 50 लाख रुपये वाली एफडी को बीच में ही आंशिक रूप से तोड़कर निकाला जबकि बाकी की रकम (19,552.85 रुपये) उनके बचत खाते से काटे गए हैं।
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अक्षत शर्मा का आरोप था कि जब उनकी एफडी तोड़कर राशि निकाली गई है, उस समय उनके बचत खाते में लगभग 90 हजार रुपये की पर्याप्त राशि मौजूद थी। बैंक चाहता तो पूरी टीडीएस राशि बचत खाते से काट सकता था लेकिन बिना उनकी सहमति के एफडी को बीच में तोड़ दिया। इससे उन्हें करीब 12 हजार रुपये के ब्याज राशि का नुकसान पहुंचा है। बैंक से कई बार शिकायत करने के बाद भी जब समाधान नहीं निकला तो उन्होंने उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया।
सुनवाई के दौरान बैंक ने कहा कि शिकायतकर्ता ने वित्तीय वर्ष 2024-2025 के लिए फॉर्म 15जी जमा किया था, इसके तहत तीन लाख तक की टैक्स छूट मिलती है। चूंकि 31 मार्च 2025 को उनकी छूट की सीमा पार हो गई थी इसलिए नियमों के तहत कुल ब्याज पर 10 प्रतिशत की दर से टीडीएस काटना कानूनी रूप से अनिवार्य था। बैंक ने नियम-शर्तों का हवाला देते हुए कहा कि यदि टीडीएस काटने के लिए पर्याप्त ब्याज राशि उपलब्ध न हो, तो बैंक को ग्राहक के किसी अन्य खाते या मुख्य एफडीआर राशि को समय से पहले तोड़कर टैक्स वसूलने का अधिकार है।
बैंक के तर्क को माना गलत
जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह और सदस्य नीरु अग्रवाल व सर्वजीत कौर की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद बैंक के इस रवैये को गलत माना। अदालत ने कहा कि जब शिकायतकर्ता के बचत खाते में 90 हजार रुपये की पर्याप्त राशि मौजूद थी, तो बैंक को टीडीएस काटने के लिए एफडीआर तोड़ने की कोई आवश्यकता नहीं थी। उपभोक्ता फोरम ने शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए आदेश दिए कि एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक शिकायतकर्ता को एफडी के ब्याज के नुकसान के रूप में 12 हजार रुपये लाैटाएगा। इसके अलावा मानसिक प्रताड़ना, परेशानी और अदालती कार्रवाई के खर्च के एवज में 20 हजार रुपये का भुगतान करे।