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Karnal News: धान घोटाले की चार्जशीट में खुले कई राज, जवाब में लिखा- अकेले निरीक्षक नहीं कर सकता गड़बड़ी
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धान घोटाले की चार्जशीट में खुले कई राज, जवाब में लिखा- अकेले निरीक्षक नहीं कर सकता गड़बड़ी
- फोटो : धान घोटाले की चार्जशीट में खुले कई राज, जवाब में लिखा- अकेले निरीक्षक नहीं कर सकता गड़बड़ी
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- धान घोटाले की चार्जशीट में खुले कई राज, जवाब में लिखा- अकेला निरीक्षक नहीं कर सकता गड़बड़ी
- परिमंडल कार्यालय को ठहराया जिम्मेदार, आढ़तियों, ठेकेदारों और मिल मालिकों की बताई भूमिका
- आढ़तियों ने कराया लोड, मिलर ने किया इनवर्ड, नियंत्रक की ओर से पोर्टल पर दर्ज ट्रकों के ही कटे गेट पास
- जांच अधिकारी बोले- ईमानदारी से काम होता तो नहीं होता 3.54 करोड़ का घोटाला
जितेंद्र नरवाल
करनाल। जिले की चार अनाज मंडियों में सामने आए 3.54 करोड़ के धान घोटाले में विभागीय चार्जशीट के जवाबों ने कई खुलासे किए हैं। बर्खास्त किए गए चार निरीक्षकों और एक उप निरीक्षक ने विभागीय जांच के चलते आरोप पत्र के जवाबों में लगभग एक जैसी दलीलें देते हुए कहा है कि पूरी खरीद और डिलीवरी प्रक्रिया ऑनलाइन थी, ऐसे में कोई अकेला कर्मचारी इतना बड़ा घोटाला नहीं कर सकता। अधिकारियों ने उन पर दर्ज प्राथमिकी को जल्दबाजी में उत्तरदायित्व से बचने और शिकायतकर्ता के दबाव में कार्रवाई बताया है। हालांकि विभागीय जांच अधिकारी ने अधिकतर जवाब को असंतोषजनक मानते हुए कर्मचारियों की लापरवाही और निगरानी में गंभीर कमी को घोटाले का प्रमुख कारण बताया है। कई मामलों में अधिकारियों ने व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण तथ्य भी स्वीकार किए, जिसके बाद जांच अधिकारी ने आरोपों को सही माना।
समीर वशिष्ठ बोले- पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन थी, अकेला निरीक्षक कैसे कर सकता है गड़बड़ी
आरोप पत्र के जवाब में निरीक्षक समीर वशिष्ठ ने कहा कि उनके द्वितीय प्रभारी मनोज कुमार और एएफएसओ मुकेश गुप्ता अधीक्षण अधिकारी नियुक्त थे। 26 सितंबर से 30 अक्तूबर तक 10,34,710 क्विंटल धान की नियमानुसार खरीद हुई, जिसे उच्च अधिकारियों ने 54 राइस मिलों को कस्टम मिलिंग के लिए अलॉट किया था। समीर ने कहा कि खरीद से लेकर भुगतान तक पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन थी। इसमें निरीक्षक अकेले गड़बड़ी नहीं कर सकता। बतान फूड्स की पीवी में मौजूदगी या भाटिया ओपन प्लिंथ में रखे स्टॉक की जानकारी उन्हें नहीं थी। उन्होंने कहा कि करनाल मंडी से भेजे गए 12 ट्रक आढ़तियों के अनुरोध पर ठेकेदार ने उपलब्ध करवाए थे और सभी डिलीवरी चालान मिलर ने ऑनलाइन इनवर्ड किए थे।
उन्होंने यह भी कहा कि केवल उन्हीं वाहनों के गेट पास कटते हैं जिन्हें डीएफएससी द्वारा पोर्टल पर अपलोड किया जाता है। पोर्टल में गाड़ियों की लोकेशन जांचने का कोई विकल्प नहीं था और न ही इस संबंध में कोई प्रशिक्षण दिया गया था। समीर ने अपने बचाव में कहा कि वास्तव में 3.54 करोड़ रुपये के धान की हानि हुई ही नहीं और कोर्ट द्वारा नियुक्त आयुक्त की मौजूदगी में धान पूरा पाया गया था। लेकिन जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि अगर समीर वशिष्ठ ईमानदारी से कार्य करते और गेट पास जारी करने के बाद मिल का भौतिक निरीक्षण करते तो यह घोटाला संभव नहीं था। व्यक्तिगत सुनवाई में समीर ने माना कि बतान फूड्स उनके नियंत्रण में थी और मिल प्रबंधन ने बिना जानकारी दिए खुले में धान का स्टॉक लगाया। ट्रकों की शून्य दूरी और कम मिले धान पर वे कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
संदीप शर्मा ने कहा- मैं बतान फूड्स का कस्टोडियन ही नहीं
निरीक्षक संदीप शर्मा ने अपने जवाब में कहा कि उन्हें जुंडला मंडी का इंचार्ज नियुक्त किया गया था जबकि दीपक कुमार द्वितीय प्रभारी और सुभाष चंद अधीक्षण अधिकारी थे। उन्होंने कहा कि बतान फूड्स करनाल परिमंडल के अधीन आती है और वे उसके कस्टोडियन नहीं थे। उन्होंने भी अन्य अधिकारियों की तरह शून्य किलोमीटर दूरी को तकनीकी खामी बताया। उनका कहना था कि निरीक्षक केवल उन्हीं ट्रकों के गेट पास जारी कर सकता है जिन्हें परिमंडल कार्यालय पोर्टल पर दर्ज करता है। हालांकि व्यक्तिगत सुनवाई में संदीप शर्मा ने माना कि उनके द्वारा बतान फूड्स को करीब 21 हजार क्विंटल धान भेजी गई थी। जांच अधिकारी ने यह आरोप भी सही माना कि जुंडला केंद्र से बिना अनुमति धान भेजी गई।
यशबीर सुनवाई में पहुंचे ही नहीं, वकील के जरिए भेजा जवाब
घरौंडा मंडी के इंचार्ज रहे निरीक्षक यशबीर ने अपने जवाब में कहा कि उनके साथ राहुल द्वितीय प्रभारी और एएफएसओ सुभाष चंद तैनात थे। उन्होंने भी कम मिले धान और भाटिया ओपन प्लिंथ में रखे स्टॉक की जानकारी होने से इन्कार किया। जांच अधिकारी ने रिपोर्ट में लिखा कि यशबीर व्यक्तिगत सुनवाई में उपस्थित ही नहीं हुए। उनके अधिवक्ता ने लिखित जवाब को ही अंतिम उत्तर मानने की बात कही।
रामफल बोले- अनुमति मैंने नहीं दी, मुनीम ने हस्ताक्षर का दुरुपयोग किया
उप निरीक्षक रामफल ने अपने जवाब में कहा कि उन्हें तरावड़ी में द्वितीय इंचार्ज लगाया गया था इसलिए उन्हें प्रथम इंचार्ज कहना गलत होगा। उन्होंने माना कि भौतिक जांच के दौरान बीआरसी मिल में 855 एमटी धान कम मिला था लेकिन यह धान सुखाने के लिए सग्गा उपकेंद्र भेजा गया था। रामफल ने कहा कि धान भेजने की अनुमति उन्होंने नहीं दी थी। उनके अनुसार मिल का मुनीम अनुमति पत्र पर रसीद के तौर पर हस्ताक्षर करवा ले गया और बाद में उसका दुरुपयोग किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि भौतिक जांच उप निरीक्षक का कार्य नहीं होता, यह जिम्मेदारी उच्च अधिकारियों की होती है। लेकिन जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि बिना अनुमति धान बाहर भेजे जाने की जानकारी उच्च अधिकारियों को देना रामफल की जिम्मेदारी थी। उन्होंने माना कि एग्रीमेंट फाइल में नोटरी अटेस्टेशन की कमी थी और कोई भौतिक जांच नहीं की गई। जांच अधिकारी ने कर्मचारी पर लगे सभी आरोप सही पाए।
लोकेश भी दूरी और ट्रकों के जवाब में फेल
निसिंग मंडी के इंचार्ज निरीक्षक लोकेश ने भी लगभग वही जवाब दिया जो अन्य अधिकारियों ने दिया था। उन्होंने कहा कि तीन ट्रक ठेकेदार द्वारा उपलब्ध कराए गए थे, आढ़तियों ने उन्हें लोड कराया और मिलर ने इनवर्ड किया। उन्होंने कहा कि केवल वही ट्रक पोर्टल पर दर्ज थे जिन्हें परिमंडल कार्यालय ने मंजूरी दी थी और शून्य किलोमीटर दूरी तकनीकी खामी हो सकती है। लेकिन जांच अधिकारी ने कहा कि व्यक्तिगत सुनवाई में लोकेश कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। ट्रकों की आवाजाही और दूरी के मामले में उनकी गंभीर कमी पाई गई।
जांच अधिकारी की रिपोर्ट से बढ़ीं मुश्किलें
जांच अधिकारी अपार तिवारी के अनुसार चार्जशीट के जवाबों से साफ हुआ है कि अधिकांश अधिकारियों ने जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालने की कोशिश की। किसी ने परिमंडल कार्यालय को जिम्मेदार ठहराया तो किसी ने आढ़तियों, ठेकेदारों और मिल मालिकों की भूमिका बताई। दूसरी ओर जांच अधिकारी ने स्पष्ट किया कि अगर संबंधित निरीक्षक और उप निरीक्षक समय-समय पर भौतिक निरीक्षण, स्टॉक सत्यापन और ट्रकों की निगरानी करते तो करोड़ों रुपये का यह घोटाला संभव नहीं था। विभागीय जांच की रिपोर्ट और व्यक्तिगत सुनवाई के बाद कर्मचारियों पर लगे अधिकांश आरोपों को सही माना गया है, जिसके चलते पहले ही पांच निरीक्षकों और एक उप निरीक्षक को सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है।
- परिमंडल कार्यालय को ठहराया जिम्मेदार, आढ़तियों, ठेकेदारों और मिल मालिकों की बताई भूमिका
- आढ़तियों ने कराया लोड, मिलर ने किया इनवर्ड, नियंत्रक की ओर से पोर्टल पर दर्ज ट्रकों के ही कटे गेट पास
- जांच अधिकारी बोले- ईमानदारी से काम होता तो नहीं होता 3.54 करोड़ का घोटाला
जितेंद्र नरवाल
करनाल। जिले की चार अनाज मंडियों में सामने आए 3.54 करोड़ के धान घोटाले में विभागीय चार्जशीट के जवाबों ने कई खुलासे किए हैं। बर्खास्त किए गए चार निरीक्षकों और एक उप निरीक्षक ने विभागीय जांच के चलते आरोप पत्र के जवाबों में लगभग एक जैसी दलीलें देते हुए कहा है कि पूरी खरीद और डिलीवरी प्रक्रिया ऑनलाइन थी, ऐसे में कोई अकेला कर्मचारी इतना बड़ा घोटाला नहीं कर सकता। अधिकारियों ने उन पर दर्ज प्राथमिकी को जल्दबाजी में उत्तरदायित्व से बचने और शिकायतकर्ता के दबाव में कार्रवाई बताया है। हालांकि विभागीय जांच अधिकारी ने अधिकतर जवाब को असंतोषजनक मानते हुए कर्मचारियों की लापरवाही और निगरानी में गंभीर कमी को घोटाले का प्रमुख कारण बताया है। कई मामलों में अधिकारियों ने व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण तथ्य भी स्वीकार किए, जिसके बाद जांच अधिकारी ने आरोपों को सही माना।
समीर वशिष्ठ बोले- पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन थी, अकेला निरीक्षक कैसे कर सकता है गड़बड़ी
आरोप पत्र के जवाब में निरीक्षक समीर वशिष्ठ ने कहा कि उनके द्वितीय प्रभारी मनोज कुमार और एएफएसओ मुकेश गुप्ता अधीक्षण अधिकारी नियुक्त थे। 26 सितंबर से 30 अक्तूबर तक 10,34,710 क्विंटल धान की नियमानुसार खरीद हुई, जिसे उच्च अधिकारियों ने 54 राइस मिलों को कस्टम मिलिंग के लिए अलॉट किया था। समीर ने कहा कि खरीद से लेकर भुगतान तक पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन थी। इसमें निरीक्षक अकेले गड़बड़ी नहीं कर सकता। बतान फूड्स की पीवी में मौजूदगी या भाटिया ओपन प्लिंथ में रखे स्टॉक की जानकारी उन्हें नहीं थी। उन्होंने कहा कि करनाल मंडी से भेजे गए 12 ट्रक आढ़तियों के अनुरोध पर ठेकेदार ने उपलब्ध करवाए थे और सभी डिलीवरी चालान मिलर ने ऑनलाइन इनवर्ड किए थे।
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संदीप शर्मा ने कहा- मैं बतान फूड्स का कस्टोडियन ही नहीं
निरीक्षक संदीप शर्मा ने अपने जवाब में कहा कि उन्हें जुंडला मंडी का इंचार्ज नियुक्त किया गया था जबकि दीपक कुमार द्वितीय प्रभारी और सुभाष चंद अधीक्षण अधिकारी थे। उन्होंने कहा कि बतान फूड्स करनाल परिमंडल के अधीन आती है और वे उसके कस्टोडियन नहीं थे। उन्होंने भी अन्य अधिकारियों की तरह शून्य किलोमीटर दूरी को तकनीकी खामी बताया। उनका कहना था कि निरीक्षक केवल उन्हीं ट्रकों के गेट पास जारी कर सकता है जिन्हें परिमंडल कार्यालय पोर्टल पर दर्ज करता है। हालांकि व्यक्तिगत सुनवाई में संदीप शर्मा ने माना कि उनके द्वारा बतान फूड्स को करीब 21 हजार क्विंटल धान भेजी गई थी। जांच अधिकारी ने यह आरोप भी सही माना कि जुंडला केंद्र से बिना अनुमति धान भेजी गई।
यशबीर सुनवाई में पहुंचे ही नहीं, वकील के जरिए भेजा जवाब
घरौंडा मंडी के इंचार्ज रहे निरीक्षक यशबीर ने अपने जवाब में कहा कि उनके साथ राहुल द्वितीय प्रभारी और एएफएसओ सुभाष चंद तैनात थे। उन्होंने भी कम मिले धान और भाटिया ओपन प्लिंथ में रखे स्टॉक की जानकारी होने से इन्कार किया। जांच अधिकारी ने रिपोर्ट में लिखा कि यशबीर व्यक्तिगत सुनवाई में उपस्थित ही नहीं हुए। उनके अधिवक्ता ने लिखित जवाब को ही अंतिम उत्तर मानने की बात कही।
रामफल बोले- अनुमति मैंने नहीं दी, मुनीम ने हस्ताक्षर का दुरुपयोग किया
उप निरीक्षक रामफल ने अपने जवाब में कहा कि उन्हें तरावड़ी में द्वितीय इंचार्ज लगाया गया था इसलिए उन्हें प्रथम इंचार्ज कहना गलत होगा। उन्होंने माना कि भौतिक जांच के दौरान बीआरसी मिल में 855 एमटी धान कम मिला था लेकिन यह धान सुखाने के लिए सग्गा उपकेंद्र भेजा गया था। रामफल ने कहा कि धान भेजने की अनुमति उन्होंने नहीं दी थी। उनके अनुसार मिल का मुनीम अनुमति पत्र पर रसीद के तौर पर हस्ताक्षर करवा ले गया और बाद में उसका दुरुपयोग किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि भौतिक जांच उप निरीक्षक का कार्य नहीं होता, यह जिम्मेदारी उच्च अधिकारियों की होती है। लेकिन जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि बिना अनुमति धान बाहर भेजे जाने की जानकारी उच्च अधिकारियों को देना रामफल की जिम्मेदारी थी। उन्होंने माना कि एग्रीमेंट फाइल में नोटरी अटेस्टेशन की कमी थी और कोई भौतिक जांच नहीं की गई। जांच अधिकारी ने कर्मचारी पर लगे सभी आरोप सही पाए।
लोकेश भी दूरी और ट्रकों के जवाब में फेल
निसिंग मंडी के इंचार्ज निरीक्षक लोकेश ने भी लगभग वही जवाब दिया जो अन्य अधिकारियों ने दिया था। उन्होंने कहा कि तीन ट्रक ठेकेदार द्वारा उपलब्ध कराए गए थे, आढ़तियों ने उन्हें लोड कराया और मिलर ने इनवर्ड किया। उन्होंने कहा कि केवल वही ट्रक पोर्टल पर दर्ज थे जिन्हें परिमंडल कार्यालय ने मंजूरी दी थी और शून्य किलोमीटर दूरी तकनीकी खामी हो सकती है। लेकिन जांच अधिकारी ने कहा कि व्यक्तिगत सुनवाई में लोकेश कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। ट्रकों की आवाजाही और दूरी के मामले में उनकी गंभीर कमी पाई गई।
जांच अधिकारी की रिपोर्ट से बढ़ीं मुश्किलें
जांच अधिकारी अपार तिवारी के अनुसार चार्जशीट के जवाबों से साफ हुआ है कि अधिकांश अधिकारियों ने जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालने की कोशिश की। किसी ने परिमंडल कार्यालय को जिम्मेदार ठहराया तो किसी ने आढ़तियों, ठेकेदारों और मिल मालिकों की भूमिका बताई। दूसरी ओर जांच अधिकारी ने स्पष्ट किया कि अगर संबंधित निरीक्षक और उप निरीक्षक समय-समय पर भौतिक निरीक्षण, स्टॉक सत्यापन और ट्रकों की निगरानी करते तो करोड़ों रुपये का यह घोटाला संभव नहीं था। विभागीय जांच की रिपोर्ट और व्यक्तिगत सुनवाई के बाद कर्मचारियों पर लगे अधिकांश आरोपों को सही माना गया है, जिसके चलते पहले ही पांच निरीक्षकों और एक उप निरीक्षक को सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है।