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Karnal News: प्लेटलेट्स की कमी से जूझ रहा नागरिक अस्पताल
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। जिला नागरिक अस्पताल इन दिनों प्लेटलेट्स की कमी से जूझ रहा है। हालात ऐसे हैं कि ब्लड बैंक में उपलब्ध प्लेटलेट्स मरीजों की जरूरत के हिसाब से पर्याप्त नहीं हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि अस्पताल में अब तक सिंगल डोनर प्लेटलेट्स मशीन उपलब्ध नहीं हो पाई है जिससे मरीजों को छोटे-छोटे पैक के सहारे ही इलाज करना पड़ रहा है।
डेंगू और मौसमी बीमारियों के बढ़ते खतरे के बीच यह स्थिति और चिंताजनक हो गई है। डॉक्टरों के अनुसार, डेंगू के मामलों में प्लेटलेट्स तेजी से गिरते हैं और ऐसे में मरीज को अधिक मात्रा में प्लेटलेट्स की जरूरत होती है लेकिन ब्लड बैंक में जो प्लेटलेट्स उपलब्ध हैं वे रैंडम डोनर से तैयार छोटे पैक होते हैं जिनमें प्लेटलेट्स की संख्या सीमित रहती है। इससे मरीज को बार-बार प्लेटलेट्स चढ़ाने पड़ते हैं जिससे समय और संसाधनों दोनों पर दबाव बढ़ता है।
सिंगल डोनर मशीन से एक ही डोनर से बड़ी मात्रा में प्लेटलेट्स निकाले जा सकते हैं। इससे मरीज को एक बार में पर्याप्त प्लेटलेट्स मिल जाते हैं और संक्रमण का खतरा भी कम होता है। यही कारण है कि बड़े मेडिकल संस्थानों में इस तकनीक को प्राथमिकता दी जाती है लेकिन करनाल में यह सुविधा कई वर्षों से सिर्फ प्रस्तावों और फाइलों तक सीमित है।
डेंगू के सीजन में बढ़ जाती है मांग
वर्तमान व्यवस्था में ब्लड बैंक को हर दिन डोनर्स पर निर्भर रहना पड़ता है। जैसे ही डेंगू के केस बढ़ते हैं, प्लेटलेट्स की मांग अचानक बढ़ जाती है और ब्लड बैंक पर दबाव कई गुना हो जाता है। ऐसे में परिजनों को खुद डोनर लाने पड़ते हैं जिससे मरीजों के इलाज में देरी भी होती है और मानसिक तनाव भी बढ़ता है। सिंगल डोनर प्लेटलेट्स मशीन उपलब्ध हो जाने से केवल प्लेटलेट्स की गुणवत्ता बेहतर होगी बल्कि मरीजों को कम समय में बेहतर उपचार मिल सकेगा। इसके अलावा बार-बार डोनर तलाशने की समस्या भी काफी हद तक खत्म हो जाएगी।
सिंगल डोनर मशीन के लिए प्रस्ताव बना कर भेजा जा चुका है लेकिन अभी तक मशीन नहीं मिल सकी है। इस मशीन के न होने से छोटे पैक ही मरीजों को दिए जाते हैं। इससे प्लेट अधिक तेजी से नहीं बन पाती हैं।
- संजय वर्मा, इंचार्ज ब्लड बैंक, जिला नागरिक अस्पताल
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करनाल। जिला नागरिक अस्पताल इन दिनों प्लेटलेट्स की कमी से जूझ रहा है। हालात ऐसे हैं कि ब्लड बैंक में उपलब्ध प्लेटलेट्स मरीजों की जरूरत के हिसाब से पर्याप्त नहीं हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि अस्पताल में अब तक सिंगल डोनर प्लेटलेट्स मशीन उपलब्ध नहीं हो पाई है जिससे मरीजों को छोटे-छोटे पैक के सहारे ही इलाज करना पड़ रहा है।
डेंगू और मौसमी बीमारियों के बढ़ते खतरे के बीच यह स्थिति और चिंताजनक हो गई है। डॉक्टरों के अनुसार, डेंगू के मामलों में प्लेटलेट्स तेजी से गिरते हैं और ऐसे में मरीज को अधिक मात्रा में प्लेटलेट्स की जरूरत होती है लेकिन ब्लड बैंक में जो प्लेटलेट्स उपलब्ध हैं वे रैंडम डोनर से तैयार छोटे पैक होते हैं जिनमें प्लेटलेट्स की संख्या सीमित रहती है। इससे मरीज को बार-बार प्लेटलेट्स चढ़ाने पड़ते हैं जिससे समय और संसाधनों दोनों पर दबाव बढ़ता है।
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सिंगल डोनर मशीन से एक ही डोनर से बड़ी मात्रा में प्लेटलेट्स निकाले जा सकते हैं। इससे मरीज को एक बार में पर्याप्त प्लेटलेट्स मिल जाते हैं और संक्रमण का खतरा भी कम होता है। यही कारण है कि बड़े मेडिकल संस्थानों में इस तकनीक को प्राथमिकता दी जाती है लेकिन करनाल में यह सुविधा कई वर्षों से सिर्फ प्रस्तावों और फाइलों तक सीमित है।
डेंगू के सीजन में बढ़ जाती है मांग
वर्तमान व्यवस्था में ब्लड बैंक को हर दिन डोनर्स पर निर्भर रहना पड़ता है। जैसे ही डेंगू के केस बढ़ते हैं, प्लेटलेट्स की मांग अचानक बढ़ जाती है और ब्लड बैंक पर दबाव कई गुना हो जाता है। ऐसे में परिजनों को खुद डोनर लाने पड़ते हैं जिससे मरीजों के इलाज में देरी भी होती है और मानसिक तनाव भी बढ़ता है। सिंगल डोनर प्लेटलेट्स मशीन उपलब्ध हो जाने से केवल प्लेटलेट्स की गुणवत्ता बेहतर होगी बल्कि मरीजों को कम समय में बेहतर उपचार मिल सकेगा। इसके अलावा बार-बार डोनर तलाशने की समस्या भी काफी हद तक खत्म हो जाएगी।
सिंगल डोनर मशीन के लिए प्रस्ताव बना कर भेजा जा चुका है लेकिन अभी तक मशीन नहीं मिल सकी है। इस मशीन के न होने से छोटे पैक ही मरीजों को दिए जाते हैं। इससे प्लेट अधिक तेजी से नहीं बन पाती हैं।
- संजय वर्मा, इंचार्ज ब्लड बैंक, जिला नागरिक अस्पताल