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Karnal News: डिफॉल्टर मिलों पर शिकंजा, बेहतर प्रदर्शन वालों को मिलेगा अधिक धान
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जितेंद्र नरवाल
करनाल। धान घोटाले के बाद खरीफ विपणन सीजन 2026-27 के लिए राज्य सरकार ने कस्टम मिलिंग के लिए नई नीति जारी की है। अब राइस मिलों को धान का आवंटन उनके पिछले वर्षों के प्रदर्शन, समय पर सीएमआर (कस्टम मिल्ड राइस) जमा करने की क्षमता, आधुनिक मशीनरी और ऑनलाइन रिकॉर्ड के आधार पर होगा। डिफॉल्टर मिलों को धान आवंटन से बाहर रखने का प्रावधान किया गया है।
सभी राइस मिलों का पंजीकरण ई-खरीद पोर्टल पर अनिवार्य होगा। धान आवंटन से लेकर सीएमआर जमा करने तक की प्रक्रिया की ऑनलाइन निगरानी होगी। सरकार ने राइस मिलों को उनके पिछले चार वर्षों के प्रदर्शन के आधार पर ए+, ए, बी, सी, डी, ई और एफ श्रेणियों में विभाजित किया है। 31 मार्च तक लगातार समय पर सीएमआर जमा करने वाली मिलों को ए+ श्रेणी मिलेगी जबकि समय पर सीएमआर जमा नहीं करने वाली मिलें निचली श्रेणियों में रहेंगी।
ए, ए+ और बी श्रेणी की मिलों को एक बार में 7000 मीट्रिक टन तक धान आवंटित किया जा सकेगा जबकि सी और डी श्रेणी की मिलों को अधिकतम 3000 मीट्रिक टन तक धान मिलेगा। इस नीति का असर प्रदेश की 1400 मिलों पर पड़ेगा। इसमें 228 राइस मिल करनाल की भी रहेंगी।
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सीएमआर में देरी से आवंटन में कटौती
किसी मिल ने पिछले सीजन में सीएमआर देर से जमा किया है तो अगले सीजन में धान आवंटन में कटौती होगी। इसमें 0 से 5 प्रतिशत चावल देरी से लौटाने वालों को 100 प्रतिशत धान मिलेगा। 5 से 20 प्रतिशत वालों को 80 प्रतिशत, 21 से 40 प्रतिशत देरी वालों को 60 प्रतिशत, 40 से 60 प्रतिशत की देरी वालों को 50 प्रतिशत और 60 प्रतिशत से अधिक देरी वालों पर नीति के अनुसार विशेष कार्रवाई होगी।
50 लाख रुपये प्रति क्षमता की गारंटी
मिल की स्थापित मिलिंग क्षमता के अनुसार धान आवंटित होगा। एक मीट्रिक टन प्रति घंटा क्षमता वाले मिल को 3000 मीट्रिक टन, 2 मीट्रिक टन प्रति घंटा वालों को 5000 एमटी, 3 एमटी प्रति घंटा वालों को 6000 एमटी, 4 एमटी प्रति घंटा वालों को 7000 एमटी, लीज पर चल रही मिलों को अधिकतम 4000 एमटी तक ही धान मिलेगा। मिल को अपनी मिलिंग क्षमता के अनुसार बैंक गारंटी देनी होगी। गारंटर परिवार का सदस्य नहीं हो सकेगा तथा बैंक से हस्ताक्षर सत्यापित कराना अनिवार्य होगा।
डिफॉल्टर मिलों पर बड़ी कार्रवाई
सरकार ने साफ किया है कि पिछले सीजन का सीएमआर जमा नहीं करने वाली मिल, डिफॉल्टर मालिक, पार्टनर, प्रोपराइटर, निदेशक, लीजधारक को नए नाम से फर्म बनाकर भी धान आवंटन का लाभ नहीं मिलेगा। अगर किसी डिफॉल्टर मिल की संपत्ति किसी अन्य व्यक्ति को ट्रांसफर की जाती है तो भी बकाया चुकाने तक धान आवंटित नहीं होगा। जिन मिलों पर बैंक का बकाया है, सरकारी धान का विवाद लंबित है, कस्टम मिलिंग का हिसाब लंबित है, बिजली कनेक्शन स्वतंत्र नहीं है, ई-खरीद पोर्टल पर पंजीकरण नहीं कराया गया है, उन्हें धान आवंटन नहीं किया जाएगा।
बिजली खपत पर भी रहेगी नजर
अब प्रत्येक राइस मिल के लिए अलग बिजली कनेक्शन अनिवार्य होगा। हर महीने बिजली निगमों से मिलवार बिजली खपत का डाटा लिया जाएगा और उसे ई-खरीद पोर्टल से जोड़ा जाएगा। सरकारी धान और निजी धान की मिलिंग का अलग-अलग रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज करना होगा। जिन मिलों में बॉउंड्री वॉल, ग्रेडर, शिफ्टर, सॉर्टेक्स, ड्रायर जैसी आधुनिक सुविधाएं होंगी, उन्हें धान आवंटन में प्राथमिकता दी जाएगी। हालांकि मिलों को समझौते के बिना धान नहीं मिलेगा। धान उठाने से पहले प्रत्येक राइस मिल को संबंधित खरीद एजेंसी के साथ विधिवत समझौता करना होगा।
नई मिलिंग नीति का उद्देश्य समय पर सीएमआर जमा कराना, सरकारी धान की सुरक्षा सुनिश्चित करना और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना है। प्रदर्शन के आधार पर ही धान आवंटन किया जाएगा तथा डिफॉल्टर मिलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। -मुकेश कुमार, डीएफएससी, करनाल
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करनाल। धान घोटाले के बाद खरीफ विपणन सीजन 2026-27 के लिए राज्य सरकार ने कस्टम मिलिंग के लिए नई नीति जारी की है। अब राइस मिलों को धान का आवंटन उनके पिछले वर्षों के प्रदर्शन, समय पर सीएमआर (कस्टम मिल्ड राइस) जमा करने की क्षमता, आधुनिक मशीनरी और ऑनलाइन रिकॉर्ड के आधार पर होगा। डिफॉल्टर मिलों को धान आवंटन से बाहर रखने का प्रावधान किया गया है।
सभी राइस मिलों का पंजीकरण ई-खरीद पोर्टल पर अनिवार्य होगा। धान आवंटन से लेकर सीएमआर जमा करने तक की प्रक्रिया की ऑनलाइन निगरानी होगी। सरकार ने राइस मिलों को उनके पिछले चार वर्षों के प्रदर्शन के आधार पर ए+, ए, बी, सी, डी, ई और एफ श्रेणियों में विभाजित किया है। 31 मार्च तक लगातार समय पर सीएमआर जमा करने वाली मिलों को ए+ श्रेणी मिलेगी जबकि समय पर सीएमआर जमा नहीं करने वाली मिलें निचली श्रेणियों में रहेंगी।
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ए, ए+ और बी श्रेणी की मिलों को एक बार में 7000 मीट्रिक टन तक धान आवंटित किया जा सकेगा जबकि सी और डी श्रेणी की मिलों को अधिकतम 3000 मीट्रिक टन तक धान मिलेगा। इस नीति का असर प्रदेश की 1400 मिलों पर पड़ेगा। इसमें 228 राइस मिल करनाल की भी रहेंगी।
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सीएमआर में देरी से आवंटन में कटौती
किसी मिल ने पिछले सीजन में सीएमआर देर से जमा किया है तो अगले सीजन में धान आवंटन में कटौती होगी। इसमें 0 से 5 प्रतिशत चावल देरी से लौटाने वालों को 100 प्रतिशत धान मिलेगा। 5 से 20 प्रतिशत वालों को 80 प्रतिशत, 21 से 40 प्रतिशत देरी वालों को 60 प्रतिशत, 40 से 60 प्रतिशत की देरी वालों को 50 प्रतिशत और 60 प्रतिशत से अधिक देरी वालों पर नीति के अनुसार विशेष कार्रवाई होगी।
50 लाख रुपये प्रति क्षमता की गारंटी
मिल की स्थापित मिलिंग क्षमता के अनुसार धान आवंटित होगा। एक मीट्रिक टन प्रति घंटा क्षमता वाले मिल को 3000 मीट्रिक टन, 2 मीट्रिक टन प्रति घंटा वालों को 5000 एमटी, 3 एमटी प्रति घंटा वालों को 6000 एमटी, 4 एमटी प्रति घंटा वालों को 7000 एमटी, लीज पर चल रही मिलों को अधिकतम 4000 एमटी तक ही धान मिलेगा। मिल को अपनी मिलिंग क्षमता के अनुसार बैंक गारंटी देनी होगी। गारंटर परिवार का सदस्य नहीं हो सकेगा तथा बैंक से हस्ताक्षर सत्यापित कराना अनिवार्य होगा।
डिफॉल्टर मिलों पर बड़ी कार्रवाई
सरकार ने साफ किया है कि पिछले सीजन का सीएमआर जमा नहीं करने वाली मिल, डिफॉल्टर मालिक, पार्टनर, प्रोपराइटर, निदेशक, लीजधारक को नए नाम से फर्म बनाकर भी धान आवंटन का लाभ नहीं मिलेगा। अगर किसी डिफॉल्टर मिल की संपत्ति किसी अन्य व्यक्ति को ट्रांसफर की जाती है तो भी बकाया चुकाने तक धान आवंटित नहीं होगा। जिन मिलों पर बैंक का बकाया है, सरकारी धान का विवाद लंबित है, कस्टम मिलिंग का हिसाब लंबित है, बिजली कनेक्शन स्वतंत्र नहीं है, ई-खरीद पोर्टल पर पंजीकरण नहीं कराया गया है, उन्हें धान आवंटन नहीं किया जाएगा।
बिजली खपत पर भी रहेगी नजर
अब प्रत्येक राइस मिल के लिए अलग बिजली कनेक्शन अनिवार्य होगा। हर महीने बिजली निगमों से मिलवार बिजली खपत का डाटा लिया जाएगा और उसे ई-खरीद पोर्टल से जोड़ा जाएगा। सरकारी धान और निजी धान की मिलिंग का अलग-अलग रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज करना होगा। जिन मिलों में बॉउंड्री वॉल, ग्रेडर, शिफ्टर, सॉर्टेक्स, ड्रायर जैसी आधुनिक सुविधाएं होंगी, उन्हें धान आवंटन में प्राथमिकता दी जाएगी। हालांकि मिलों को समझौते के बिना धान नहीं मिलेगा। धान उठाने से पहले प्रत्येक राइस मिल को संबंधित खरीद एजेंसी के साथ विधिवत समझौता करना होगा।
नई मिलिंग नीति का उद्देश्य समय पर सीएमआर जमा कराना, सरकारी धान की सुरक्षा सुनिश्चित करना और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना है। प्रदर्शन के आधार पर ही धान आवंटन किया जाएगा तथा डिफॉल्टर मिलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। -मुकेश कुमार, डीएफएससी, करनाल