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Karnal News: स्मार्ट सिटी में निगम ही स्मार्ट नहीं... चार साल बाद ई-ऑफिस प्रणाली होगी लागू
Sat, 23 May 2026 02:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Sat, 23 May 2026 02:10 AM IST
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करनाल। यूं तो करनाल स्मार्ट सिटी है। हालांकि शहर को स्मार्ट बनाने में सबसे अहम भूमिका रखने वाला नगर निगम स्मार्ट नहीं बन पाया है। प्रदेश सरकार के निर्देशों के चार साल बाद भी ई-ऑफिस प्रणाली लागू नहीं हो पाई है। अब इसकी कवायद की जा रही है।
विदित हो कि 25 दिसंबर 2020 में सुशासन दिवस पर प्रदेश सरकार ने ई-ऑफिस प्रणाली लागू की थी लेकिन कोरोना व अन्य अव्यवस्थाओं के कारण लागू नहीं हो पाई। इसके बाद पायलट पर जनवरी 2025 में इसे जिले में लागू किया गया। जिला प्रशासन की ओर से तत्कालीन उपायुक्त उत्तम सिंह ने इसे सभी विभागों में लागू कराया। पंचायत स्तर पर भी प्रशिक्षण दिया गया लेकिन नगर निगम इसे लागू नहीं कर पाया।
अब इस पर काम हो रहा है। आयुक्त डॉ. वैशाली शर्मा के निर्देश पर निगम अधिकारियों एवं कर्मचारियों को ई-ऑफिस पोर्टल का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। दावा है कि ई-ऑफिस व्यवस्था लागू करने के लिए आवश्यक प्रक्रियाएं लगभग पूर्ण कर ली गई हैं। इनमें अधिकारियों एवं कर्मचारियों की आईडी बनाना, डिजिटल सिग्नेचर तैयार करवाना और अन्य तकनीकी औपचारिकताएं शामिल हैं।
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कागज की बचत होगीनगर निगम आयुक्त ने बताया कि ई-ऑफिस व्यवस्था लागू होने से कार्यालय कार्य प्रणाली पूरी तरह डिजिटल और सुव्यवस्थित होगी। इससे विभिन्न शाखाओं में फाइलों की आवाजाही तेज होगी और कार्यों में पारदर्शिता भी बढ़ेगी। कार्यालयों में समय की बचत के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि कागज की खपत में कमी आएगी। डिजिटल कार्य प्रणाली अपनाने से दस्तावेजों का रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा और आवश्यक फाइलें आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी।
-देरी की जांच की मांग
सामाजिक कार्यकर्ता एडवोकेट राजेश और संदीप राणा ने सवाल उठाए कि निगम प्रशासन देरी से क्यों जाग रहा है। एक साल में कितने कागज की खपत हुई होगी और कितनी फाइलें अटकी होंगी, इसकी भी जांच करके अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।
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विदित हो कि 25 दिसंबर 2020 में सुशासन दिवस पर प्रदेश सरकार ने ई-ऑफिस प्रणाली लागू की थी लेकिन कोरोना व अन्य अव्यवस्थाओं के कारण लागू नहीं हो पाई। इसके बाद पायलट पर जनवरी 2025 में इसे जिले में लागू किया गया। जिला प्रशासन की ओर से तत्कालीन उपायुक्त उत्तम सिंह ने इसे सभी विभागों में लागू कराया। पंचायत स्तर पर भी प्रशिक्षण दिया गया लेकिन नगर निगम इसे लागू नहीं कर पाया।
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अब इस पर काम हो रहा है। आयुक्त डॉ. वैशाली शर्मा के निर्देश पर निगम अधिकारियों एवं कर्मचारियों को ई-ऑफिस पोर्टल का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। दावा है कि ई-ऑफिस व्यवस्था लागू करने के लिए आवश्यक प्रक्रियाएं लगभग पूर्ण कर ली गई हैं। इनमें अधिकारियों एवं कर्मचारियों की आईडी बनाना, डिजिटल सिग्नेचर तैयार करवाना और अन्य तकनीकी औपचारिकताएं शामिल हैं।
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कागज की बचत होगीनगर निगम आयुक्त ने बताया कि ई-ऑफिस व्यवस्था लागू होने से कार्यालय कार्य प्रणाली पूरी तरह डिजिटल और सुव्यवस्थित होगी। इससे विभिन्न शाखाओं में फाइलों की आवाजाही तेज होगी और कार्यों में पारदर्शिता भी बढ़ेगी। कार्यालयों में समय की बचत के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि कागज की खपत में कमी आएगी। डिजिटल कार्य प्रणाली अपनाने से दस्तावेजों का रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा और आवश्यक फाइलें आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी।
-देरी की जांच की मांग
सामाजिक कार्यकर्ता एडवोकेट राजेश और संदीप राणा ने सवाल उठाए कि निगम प्रशासन देरी से क्यों जाग रहा है। एक साल में कितने कागज की खपत हुई होगी और कितनी फाइलें अटकी होंगी, इसकी भी जांच करके अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।