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Karnal News: उद्योगों को सीएक्यूएम गाइडलाइन का पालन अनिवार्य करना होगा
Thu, 04 Jun 2026 12:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Thu, 04 Jun 2026 12:13 AM IST
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बैठक में पीपीटी देखते औद्योगिक संगठनों के पदाधिकारी और आरओ भूपेंद्र चहल। स्रोत : सोशल मीडिया
- फोटो : जनसुनवाई के दौरान फरियाद सुनतीं डीएम अन्नपूर्णा गर्ग।
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पानीपत। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) ने पर्यावरण और जल प्रदूषण नियंत्रण को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए उद्योगों को केंद्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की गाइडलाइन का पालन अनिवार्य कर दिया है। इस संबंध में बुधवार को जिमखाना क्लब में टेक्सटाइल, डाइंग और मिंक कंबल उद्योगों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित की गई।
एचएसपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी भूपेंद्र चहल ने बैठक में उद्यमियों को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की गाइडलाइन की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सभी उद्योगों को निर्धारित मानकों के अनुसार प्रदूषण नियंत्रण उपाय अपनाने होंगे, अन्यथा कार्रवाई करते हुए उद्योग बंद करने तक की स्थिति बन सकती है।
गाइडलाइन के अनुसार, उद्योगों में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) स्तर को 80 से घटाकर 50 तक लाना अनिवार्य किया गया है। इसके लिए उद्योगों को बैग हाउस और इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रीसिपिटेटर (ईएसपी) जैसे सिस्टम 1 अगस्त से पहले स्थापित करने होंगे। यह नियम एनसीआर क्षेत्र के सभी उद्योगों, बॉयलर, फर्नेस और टीएफएच इकाइयों पर लागू होंगे। ईएसपी गैसों से धूल और धुएं जैसे महीन और हानिकारक कणों को विद्युत आवेश की मदद से अलग कर देता है, जिससे हवा शुद्ध हो जाती है।
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भूपेंद्र चहल ने बताया कि 20 अप्रैल को जारी निर्देशों के अनुसार जो उद्योग क्लीन फ्यूल जैसे गैस या बिजली पर आधारित हैं, उन्हें प्रदूषण नियंत्रण उपकरण लगाने की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि अन्य सभी इकाइयों को मान्यता प्राप्त संस्थानों जैसे आईआईटी या एनआईटी से अपने सिस्टम का अध्ययन कराकर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
उन्होंने यह भी कहा कि उद्योगों को सैंपलिंग और निरीक्षण के लिए उचित सुविधा उपलब्ध करानी होगी, ताकि चिमनी और अन्य उपकरणों की जांच सुचारू रूप से की जा सके।
बैठक में हरियाणा एनवायरनमेंट मैनेजमेंट के प्रदेशाध्यक्ष भीम राणा, पुराना औद्योगिक एसोसिएशन के प्रधान वीरभान, आरके जैन, शिव मल्होत्रा, मनोज गुप्ता और रामप्रताप सहित अन्य उद्यमी मौजूद रहे।
उद्योगों ने जताई व्यावहारिक दिक्कतें
बैठक में पानीपत डायर्स एसोसिएशन के प्रधान नितिन अरोड़ा ने कहा कि 300 से 500 वर्ग मीटर क्षेत्रफल वाले उद्योगों में जगह की कमी के कारण उपकरण लगाने में कठिनाई आ रही है। वहीं डाइंग एसोसिएशन के प्रतिनिधि राजपाल ने वेंडर कंपनियों की संख्या बढ़ाने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि वर्तमान में केवल आठ अधिकृत वेंडर ही उपलब्ध हैं, जिससे उपकरण खरीद और इंस्टॉलेशन में समस्या हो रही है।
निगरानी के लिए आधुनिक उपकरण अनिवार्य
बोर्ड अधिकारियों ने बताया कि कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) और जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (जेडएलडी) आधारित इकाइयों में पीटीजेड कैमरा और फ्लो मीटर लगाना अनिवार्य होगा। यदि उद्योग एसटीपी या सीवर में जल छोड़ते हैं तो वाटर एनालाइजर लगाना जरूरी होगा, जिसमें पीएच, बीओडी, सीओडी और सस्पेंडेड सॉलिड्स जैसे पैरामीटर की निगरानी की जाएगी।
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एचएसपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी भूपेंद्र चहल ने बैठक में उद्यमियों को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की गाइडलाइन की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सभी उद्योगों को निर्धारित मानकों के अनुसार प्रदूषण नियंत्रण उपाय अपनाने होंगे, अन्यथा कार्रवाई करते हुए उद्योग बंद करने तक की स्थिति बन सकती है।
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गाइडलाइन के अनुसार, उद्योगों में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) स्तर को 80 से घटाकर 50 तक लाना अनिवार्य किया गया है। इसके लिए उद्योगों को बैग हाउस और इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रीसिपिटेटर (ईएसपी) जैसे सिस्टम 1 अगस्त से पहले स्थापित करने होंगे। यह नियम एनसीआर क्षेत्र के सभी उद्योगों, बॉयलर, फर्नेस और टीएफएच इकाइयों पर लागू होंगे। ईएसपी गैसों से धूल और धुएं जैसे महीन और हानिकारक कणों को विद्युत आवेश की मदद से अलग कर देता है, जिससे हवा शुद्ध हो जाती है।
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भूपेंद्र चहल ने बताया कि 20 अप्रैल को जारी निर्देशों के अनुसार जो उद्योग क्लीन फ्यूल जैसे गैस या बिजली पर आधारित हैं, उन्हें प्रदूषण नियंत्रण उपकरण लगाने की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि अन्य सभी इकाइयों को मान्यता प्राप्त संस्थानों जैसे आईआईटी या एनआईटी से अपने सिस्टम का अध्ययन कराकर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
उन्होंने यह भी कहा कि उद्योगों को सैंपलिंग और निरीक्षण के लिए उचित सुविधा उपलब्ध करानी होगी, ताकि चिमनी और अन्य उपकरणों की जांच सुचारू रूप से की जा सके।
बैठक में हरियाणा एनवायरनमेंट मैनेजमेंट के प्रदेशाध्यक्ष भीम राणा, पुराना औद्योगिक एसोसिएशन के प्रधान वीरभान, आरके जैन, शिव मल्होत्रा, मनोज गुप्ता और रामप्रताप सहित अन्य उद्यमी मौजूद रहे।
उद्योगों ने जताई व्यावहारिक दिक्कतें
बैठक में पानीपत डायर्स एसोसिएशन के प्रधान नितिन अरोड़ा ने कहा कि 300 से 500 वर्ग मीटर क्षेत्रफल वाले उद्योगों में जगह की कमी के कारण उपकरण लगाने में कठिनाई आ रही है। वहीं डाइंग एसोसिएशन के प्रतिनिधि राजपाल ने वेंडर कंपनियों की संख्या बढ़ाने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि वर्तमान में केवल आठ अधिकृत वेंडर ही उपलब्ध हैं, जिससे उपकरण खरीद और इंस्टॉलेशन में समस्या हो रही है।
निगरानी के लिए आधुनिक उपकरण अनिवार्य
बोर्ड अधिकारियों ने बताया कि कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) और जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (जेडएलडी) आधारित इकाइयों में पीटीजेड कैमरा और फ्लो मीटर लगाना अनिवार्य होगा। यदि उद्योग एसटीपी या सीवर में जल छोड़ते हैं तो वाटर एनालाइजर लगाना जरूरी होगा, जिसमें पीएच, बीओडी, सीओडी और सस्पेंडेड सॉलिड्स जैसे पैरामीटर की निगरानी की जाएगी।

बैठक में पीपीटी देखते औद्योगिक संगठनों के पदाधिकारी और आरओ भूपेंद्र चहल। स्रोत : सोशल मीडिया- फोटो : जनसुनवाई के दौरान फरियाद सुनतीं डीएम अन्नपूर्णा गर्ग।