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Karnal News: फर्जी मीटर लगाकर सात साल से जला रहा था बिजली, जांच में पकड़ा
Thu, 04 Jun 2026 12:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Thu, 04 Jun 2026 12:13 AM IST
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समालखा। शहर के औद्योगिक क्षेत्र स्थित एक गोदाम में पिछले करीब सात वर्षों से कथित रूप से फर्जी मीटर के माध्यम से बिजली का उपयोग किया जा रहा था। हैरानी की बात यह रही कि इतने लंबे समय तक यह मामला निगम की नजर में नहीं आया। एक शिकायत मिलने के बाद बिजली निगम ने जांच कराई तो पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। निगम ने संबंधित व्यक्ति पर बिजली बिल और जुर्माना मिलाकर 4.78 लाख रुपये की राशि निर्धारित की है।
बिजली निगम बकाया बिलों की वसूली के लिए विशेष अभियान चला रहा है। टीमें जांच कर रही हैं। इसी दौरान औद्योगिक क्षेत्र स्थित एक सीमेंट गोदाम में फर्जी मीटर से बिजली उपयोग किए जाने की शिकायत निगम अधिकारियों को मिली। शिकायत पर दो जूनियर इंजीनियरों (जेई) की टीम गठित कर जांच कराई गई। जांच के दौरान पाया गया कि मीटर निगम के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं था और संबंधित व्यक्ति उसके संबंध में कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका।
जांच के बाद निगम अधिकारियों ने मीटर की एमडीआई (मैक्सिमम डिमांड इंडिकेटर) के आधार पर बिजली खपत का आकलन किया। इसके बाद एक वर्ष की देय राशि और निर्धारित जुर्माना जोड़कर कुल 4.78 लाख रुपये का बिल तैयार किया गया।
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जेई टीम की जांच रिपोर्ट में मीटर फर्जी पाया गया है। संबंधित उपभोक्ता का निगम में कोई वैध खाता नहीं मिला। सभी तथ्यों और दस्तावेजों की जांच के बाद 4.78 लाख रुपये का बिल तैयार कर भेज दिया गया है। -नरेश कुमार, एसडीओ, बिजली निगम
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बिजली निगम बकाया बिलों की वसूली के लिए विशेष अभियान चला रहा है। टीमें जांच कर रही हैं। इसी दौरान औद्योगिक क्षेत्र स्थित एक सीमेंट गोदाम में फर्जी मीटर से बिजली उपयोग किए जाने की शिकायत निगम अधिकारियों को मिली। शिकायत पर दो जूनियर इंजीनियरों (जेई) की टीम गठित कर जांच कराई गई। जांच के दौरान पाया गया कि मीटर निगम के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं था और संबंधित व्यक्ति उसके संबंध में कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका।
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जांच के बाद निगम अधिकारियों ने मीटर की एमडीआई (मैक्सिमम डिमांड इंडिकेटर) के आधार पर बिजली खपत का आकलन किया। इसके बाद एक वर्ष की देय राशि और निर्धारित जुर्माना जोड़कर कुल 4.78 लाख रुपये का बिल तैयार किया गया।
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जेई टीम की जांच रिपोर्ट में मीटर फर्जी पाया गया है। संबंधित उपभोक्ता का निगम में कोई वैध खाता नहीं मिला। सभी तथ्यों और दस्तावेजों की जांच के बाद 4.78 लाख रुपये का बिल तैयार कर भेज दिया गया है। -नरेश कुमार, एसडीओ, बिजली निगम