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Karnal News: अब इंद्री एस्केप में गंदे पानी की जगह बहेगा बारिश का पानी
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करनाल। नगर निगम ने इंद्री एस्केप को पूरी तरह नए स्वरूप में विकसित करने की तैयारी शुरू कर दी है। निगम क्षेत्र में आने वाले गांव मंगलपुर से छपरा खेड़ा तक करीब 6 किलोमीटर लंबी इस ड्रेन को अब गंदे पानी की निकासी की बजाय स्ट्रॉम वॉटर ड्रेन में बदला जाएगा, जिसमें केवल बारिश का पानी बह सकेगा। इससे वर्षों से फैक्ट्रियों के केमिकलयुक्त गंदे पानी, बदबू और प्रदूषण की मार झेल रहे शहर के लोगों को अब बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है।
योजना के तहत ड्रेन को पूरी तरह पक्का किया जाएगा, दोनों ओर मजबूत पटरी बनाई जाएगी और इसके किनारों को हरित कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां हजारों की संख्या में नीम, बरगद और पीपल जैसे छाया देने वाले पेड़ लगाए जाएंगे। इसके अलावा पूरी ड्रेन के किनारे आधुनिक लाइटिंग व्यवस्था होगी और सोलर पैनलों से बिजली तैयार की जाएगी। यहां लोगों के सुबह-शाम घूमने, सैर करने और बैठने के लिए भी विशेष स्थान विकसित किए जाएंगे।
फैक्ट्रियों का गंदा पानी बन रहा था बड़ी समस्या :
इंद्री की ओर विकसित औद्योगिक इकाइयों और फैक्ट्रियों से निकलने वाले केमिकलयुक्त गंदे पानी की निकासी के लिए वर्षों पहले यह एस्केप बनाई गई थी। समय के साथ इसमें लगातार प्रदूषित पानी छोड़ा जाने लगा, जिससे आसपास के गांवों और कॉलोनियों के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। ड्रेन से उठने वाली बदबू से लोगों का जीना मुश्किल हो गया था। गर्मियों में हालात और ज्यादा खराब हो जाते थे। लोगों का कहना है कि कई बार बदबू इतनी अधिक होती थी कि घरों के बाहर बैठना भी मुश्किल हो जाता था। इसके साथ ही गंदा पानी आगे जाकर यमुना में मिल रहा था, जिससे नदी का पानी भी लगातार प्रदूषित हो रहा था।
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सरकार को भेजा दिया है प्रस्ताव : मेयर
मेयर रेणु बाला गुप्ता ने बताया कि पूरे प्रोजेक्ट का प्रस्ताव सरकार को भेज दिया है। सबसे पहले एक सलाहकार एजेंसी नियुक्त की जाएगी, जो ड्रेन के डिजाइन, तकनीकी पहलुओं और लागत का विस्तृत खाका तैयार करेगी। इसके बाद टेंडर प्रक्रिया पूरी कर निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।
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योजना के तहत ड्रेन को पूरी तरह पक्का किया जाएगा, दोनों ओर मजबूत पटरी बनाई जाएगी और इसके किनारों को हरित कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां हजारों की संख्या में नीम, बरगद और पीपल जैसे छाया देने वाले पेड़ लगाए जाएंगे। इसके अलावा पूरी ड्रेन के किनारे आधुनिक लाइटिंग व्यवस्था होगी और सोलर पैनलों से बिजली तैयार की जाएगी। यहां लोगों के सुबह-शाम घूमने, सैर करने और बैठने के लिए भी विशेष स्थान विकसित किए जाएंगे।
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फैक्ट्रियों का गंदा पानी बन रहा था बड़ी समस्या :
इंद्री की ओर विकसित औद्योगिक इकाइयों और फैक्ट्रियों से निकलने वाले केमिकलयुक्त गंदे पानी की निकासी के लिए वर्षों पहले यह एस्केप बनाई गई थी। समय के साथ इसमें लगातार प्रदूषित पानी छोड़ा जाने लगा, जिससे आसपास के गांवों और कॉलोनियों के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। ड्रेन से उठने वाली बदबू से लोगों का जीना मुश्किल हो गया था। गर्मियों में हालात और ज्यादा खराब हो जाते थे। लोगों का कहना है कि कई बार बदबू इतनी अधिक होती थी कि घरों के बाहर बैठना भी मुश्किल हो जाता था। इसके साथ ही गंदा पानी आगे जाकर यमुना में मिल रहा था, जिससे नदी का पानी भी लगातार प्रदूषित हो रहा था।
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सरकार को भेजा दिया है प्रस्ताव : मेयर
मेयर रेणु बाला गुप्ता ने बताया कि पूरे प्रोजेक्ट का प्रस्ताव सरकार को भेज दिया है। सबसे पहले एक सलाहकार एजेंसी नियुक्त की जाएगी, जो ड्रेन के डिजाइन, तकनीकी पहलुओं और लागत का विस्तृत खाका तैयार करेगी। इसके बाद टेंडर प्रक्रिया पूरी कर निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।