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Karnal News: पेंटाथलॉन में मात्र दो खिलाड़ी खेले...राज्य स्तर पर चयन
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.जिला स्तर की तैराकी प्रतियोगिता में हिस्सा लेते खिलाड़ी। स्वयं
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करनाल। शिक्षा विभाग की ओर से आयोजित जिला स्तर की आधुनिक पेंटाथलॉन खेल प्रतियोगिता में मात्र दो खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। दोनों का प्रदेश स्तर की प्रतियोगिता के लिए चयन हो गया। जिला स्तरीय तैराकी प्रतियोगिता में 70 खिलाड़ियों ने अलग-अलग वर्ग में हिस्सा लिया।
आधुनिक पेंटाथलॉन में लड़कों की अंडर-17 स्पर्धा में युवराज और लड़कियों की अंडर-17 स्पर्धा में अदित्री ने हिस्सा लिया। कोच वसंत ने सिर्फ इन दो खिलाड़ियों के ट्रायल की औपचारिकता निभाई। आधुनिक पेंटाथलॉन में यह स्थिति तब है जब कर्ण स्टेडियम में इस खेल की नियमित नर्सरी संचालित की जा रही है। नर्सरी में रोजाना 5 से 6 खिलाड़ी नियमित रूप से अभ्यास करने आते हैं।
इस खेल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत चुके कोच वसंत ने बताया कि आधुनिक पेंटाथलॉन एक ओलंपिक खेल है। खेल की जटिलता और इसके प्रचार-प्रसार में कमी के कारण युवा खिलाड़ी इसमें आने से झिझकते हैं। कर्ण स्टेडियम में अप्रैल महीने से इस खेल की नर्सरी संचालित है।
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उन्होंने कहा कि खेल के प्रति बच्चों को आकर्षित करने के लिए प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल स्तर पर विशेष जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए। कर्ण स्टेडियम में खेल की नर्सरी होने के बाद भी बच्चों को इस खेल के बारे में पता ही नहीं है।
ये है आधुनिक पेंटाथलॉन
कोच वसंत ने बताया कि आधुनिक पेंटाथलॉन खेल एक ओलंपिक बहु-खेल है जिसमें पांच स्पर्धाएं शामिल हैं। इसमें तलवारबाजी, फ्रीस्टाइल तैराकी, बाधा दौड़, लेजर पिस्टल शूटिंग और क्रॉस कंट्री दौड़ शामिल है। इस खेल का पहला आयोजन 1912 में हुआ था, जो प्राचीन ओलंपिक खेलों में आयोजित होने वाले पारंपरिक पेंटाथलॉन से प्रेरित था। उस समय के सैनिकों के लिए आवश्यक कौशल का प्रदर्शन करने के लिए तैयार किया गया था। 1949 से इसकी विश्व चैंपियनशिप भी प्रतिवर्ष आयोजित की जाती रही है।
तलवारबाजी : एथलीट ''''एपि'''' तलवार का उपयोग करके वन-टच प्रारूप में एक-दूसरे से मुकाबला करते हैं।
तैराकी : इसमें खिलाड़ियों को 200 मीटर फ्रीस्टाइल तैराकी पूरी करनी होती है।
बाधा दौड़ : पारंपरिक रूप से यहां घुड़सवारी (शो जंपिंग) होती थी। हालांकि, विवादों और खेल को सुलभ बनाने के लिए 2024 पेरिस ओलंपिक के बाद घुड़सवारी को पूरी तरह हटाकर इसकी जगह बाधा दौड़ को शामिल कर लिया गया है।
लेजर रन : यह खेल का अंतिम और निर्णायक चरण होता है, जो दो स्पर्धाओं का मिश्रण है। इसमें निशानेबाजी में 10 मीटर की दूरी से लेजर पिस्टल से लक्ष्य साधना होता है। वहीं क्रॉस-कंट्री दौड़ में निशानेबाजी के साथ-साथ 3 किमी (या 3.2 किमी) की दौड़ पूरी करनी होती है।
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आधुनिक पेंटाथलॉन में लड़कों की अंडर-17 स्पर्धा में युवराज और लड़कियों की अंडर-17 स्पर्धा में अदित्री ने हिस्सा लिया। कोच वसंत ने सिर्फ इन दो खिलाड़ियों के ट्रायल की औपचारिकता निभाई। आधुनिक पेंटाथलॉन में यह स्थिति तब है जब कर्ण स्टेडियम में इस खेल की नियमित नर्सरी संचालित की जा रही है। नर्सरी में रोजाना 5 से 6 खिलाड़ी नियमित रूप से अभ्यास करने आते हैं।
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इस खेल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत चुके कोच वसंत ने बताया कि आधुनिक पेंटाथलॉन एक ओलंपिक खेल है। खेल की जटिलता और इसके प्रचार-प्रसार में कमी के कारण युवा खिलाड़ी इसमें आने से झिझकते हैं। कर्ण स्टेडियम में अप्रैल महीने से इस खेल की नर्सरी संचालित है।
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उन्होंने कहा कि खेल के प्रति बच्चों को आकर्षित करने के लिए प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल स्तर पर विशेष जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए। कर्ण स्टेडियम में खेल की नर्सरी होने के बाद भी बच्चों को इस खेल के बारे में पता ही नहीं है।
ये है आधुनिक पेंटाथलॉन
कोच वसंत ने बताया कि आधुनिक पेंटाथलॉन खेल एक ओलंपिक बहु-खेल है जिसमें पांच स्पर्धाएं शामिल हैं। इसमें तलवारबाजी, फ्रीस्टाइल तैराकी, बाधा दौड़, लेजर पिस्टल शूटिंग और क्रॉस कंट्री दौड़ शामिल है। इस खेल का पहला आयोजन 1912 में हुआ था, जो प्राचीन ओलंपिक खेलों में आयोजित होने वाले पारंपरिक पेंटाथलॉन से प्रेरित था। उस समय के सैनिकों के लिए आवश्यक कौशल का प्रदर्शन करने के लिए तैयार किया गया था। 1949 से इसकी विश्व चैंपियनशिप भी प्रतिवर्ष आयोजित की जाती रही है।
तलवारबाजी : एथलीट ''''एपि'''' तलवार का उपयोग करके वन-टच प्रारूप में एक-दूसरे से मुकाबला करते हैं।
तैराकी : इसमें खिलाड़ियों को 200 मीटर फ्रीस्टाइल तैराकी पूरी करनी होती है।
बाधा दौड़ : पारंपरिक रूप से यहां घुड़सवारी (शो जंपिंग) होती थी। हालांकि, विवादों और खेल को सुलभ बनाने के लिए 2024 पेरिस ओलंपिक के बाद घुड़सवारी को पूरी तरह हटाकर इसकी जगह बाधा दौड़ को शामिल कर लिया गया है।
लेजर रन : यह खेल का अंतिम और निर्णायक चरण होता है, जो दो स्पर्धाओं का मिश्रण है। इसमें निशानेबाजी में 10 मीटर की दूरी से लेजर पिस्टल से लक्ष्य साधना होता है। वहीं क्रॉस-कंट्री दौड़ में निशानेबाजी के साथ-साथ 3 किमी (या 3.2 किमी) की दौड़ पूरी करनी होती है।