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धान घोटाला : फर्जी गेट पास काटे, कागजों में दौड़ा दिए ट्रक और गायब कर गए 12500 क्विंटल धान
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- 20 करोड़ के धान घोटाले में से 3.54 करोड़ का फर्जीवाड़ा कर गए पांच अधिकारी अब और बड़े नाम सामने आने की आशंका
- नुकसान पर खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने की कार्रवाई, अब मिलर्स और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क भी जांच के घेरे में
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। जिले की मंडियों से सामने आए धान घोटाले में पांच अधिकारियों की बर्खास्तगी के साथ बड़ा खुलासा हुआ है। अधिकारियों ने मिलीभगत से फर्जी गेट पास काटे, सरकारी रिकॉर्ड में ट्रक चलते रहे और सरकारी कागजों में धान इधर से उधर होता रहा लेकिन जब भौतिक सत्यापन हुआ तो 3.54 करोड़ रुपये का 12500 क्विंटल से ज्यादा धान गायब मिला। करोड़ों रुपये के इस खेल में खाद्य एवं पूर्ति विभाग के चार निरीक्षक और एक उप निरीक्षक पर सरकार की गाज गिर गई है।
हरियाणा सरकार ने विभागीय जांच में गंभीर अनियमितताएं, फर्जी रिकॉर्ड, धान स्टॉक में भारी कमी और सरकारी खरीद नीति की अनदेखी पाए जाने के बाद तत्कालीन खाद्य एवं पूर्ति निरीक्षक समीर वशिष्ठ, संदीप शर्मा, लोकेश, यशवीर सिंह तथा निलंबित उप-निरीक्षक रामफल को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया है। अब जांच और कार्रवाई अब केवल निरीक्षकों तक सीमित नहीं रहेगी। विभाग पूरे नेटवर्क की भूमिका खंगाल रहा है। राइस मिल संचालकों, ट्रांसपोर्ट एजेंसियों, मंडी कर्मचारियों और अन्य विभागीय अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ चुकी है।
अलग-अलग जांच रिपोर्ट के अनुसार, करनाल की बतान फूड्स राइस मिल में विभागीय रिकॉर्ड में 67,013 बैग पीआर धान आवंटित दिखाया गया था लेकिन मौके पर जांच में 2,906 बैग कम मिले। यह कमी करीब 1032 क्विंटल धान की निकली। दूसरा बड़ा खुलासा जुंडला स्थित ओपन प्लिंथ में हुआ, जहां सरकारी रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में भारी अंतर मिला। विभागीय टीम और मार्केट कमेटी की संयुक्त जांच में यहां 32354 बैग धान कम पाया। दोनों जगह का कुल 33759 बैग यानीकरीब 12,500 क्विंटल धान कम पाया गया। अधिकारियों के अनुसार इतनी बड़ी मात्रा में धान का गायब होना केवल लापरवाही नहीं बल्कि संगठित स्तर पर हुई गंभीर अनियमितता है।
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कागजों में चले ट्रक, सिस्टम में दिखी शून्य किलोमीटर दूरी
जांच में धान परिवहन व्यवस्था भी संदेह के घेरे में आ गई। रिकॉर्ड के मुताबिक जुंडला मंडी से बतान फूड्स राइस मिल तक 66 ट्रकों से धान पहुंचाया गया था लेकिन जांच में 24 ट्रकों की दूरी शून्य किलोमीटर दर्ज मिली। अधिकारियों ने इसे तकनीकी रूप से असंभव बताते हुए रिकॉर्ड में हेराफेरी की आशंका जताई। जांच टीम के अनुसार ट्रकों की ऑनलाइन एंट्री, जीपीएस लोकेशन और वास्तविक परिवहन दूरी में भारी अंतर मिला। कई मामलों में बिना सक्षम अनुमति के गेट पास जारी कर दिए गए। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि कहीं फर्जी गेट पास और कागजी परिवहन के जरिए सरकारी धान को निजी बाजार में तो नहीं खपाया गया।
सुखाने के नाम पर बाहर रखा गया 855 एमटी धान
तरावड़ी स्थित बीआरसी ओवरसीज राइस मिल की जांच में भी बड़ा खुलासा हुआ। विभागीय रिकॉर्ड के मुकाबले मिल परिसर में 855 एमटी धान कम मिला। जांच में सामने आया कि यह धान बिना अनुमति सग्गा मंडी फड़ में रखा गया था। मामले में तत्कालीन उप-निरीक्षक रामफल को जिम्मेदार ठहराया गया। जांच रिपोर्ट में कहा गया कि उन्होंने न तो समय पर भौतिक सत्यापन किया और न ही राइस मिल की एग्रीमेंट फाइल की कमियों को दूर कराया। विभाग ने इसे खरीद नीति 2025-26 का गंभीर उल्लंघन माना।
अधिकारियों ने दी सफाई, जांच टीम ने खारिज किए तर्क
कार्रवाई से पहले संबंधित अधिकारियों से जवाब भी मांगे गए थे। कई अधिकारियों ने दावा किया कि पूरी खरीद प्रक्रिया ऑनलाइन होती है और निरीक्षक अकेले कोई गड़बड़ी नहीं कर सकता। कुछ ने जीपीएस खराबी और तकनीकी खामी का हवाला दिया, जबकि कुछ ने मिल मालिकों और ट्रांसपोर्ट एजेंसियों को जिम्मेदार बताया। हालांकि विभागीय जांच अधिकारी अपार तिवारी और अन्य अधिकारियों ने इन जवाबों को असंतोषजनक माना। रिपोर्ट में साफ कहा गया कि अगर समय-समय पर स्टॉक का भौतिक सत्यापन और निगरानी होती तो इतनी बड़ी धान कमी संभव ही नहीं थी।
पहले एफआईआर, फिर निलंबन और अब सीधी बर्खास्तगी
मामले की गंभीरता को देखते हुए करनाल सदर थाना में एफआईआर नंबर 836 और तरावड़ी थाना में एफआईआर नंबर 419 पहले ही दर्ज की जा चुकी हैं। कई अधिकारी पहले निलंबित किए गए थे, जबकि कुछ का तबादला कर दिया गया था। अब विभाग ने हरियाणा सिविल सेवा (दंड एवं अपील) नियमावली 2016 के तहत पांचों अधिकारियों को सेवा से बाहर कर दिया है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के महानिदेशक अंशज सिंह ने आदेशों में कहा है कि सरकारी खरीद प्रणाली में भ्रष्टाचार, रिकॉर्ड में हेराफेरी और सरकारी धन के दुरुपयोग को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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- नुकसान पर खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने की कार्रवाई, अब मिलर्स और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क भी जांच के घेरे में
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। जिले की मंडियों से सामने आए धान घोटाले में पांच अधिकारियों की बर्खास्तगी के साथ बड़ा खुलासा हुआ है। अधिकारियों ने मिलीभगत से फर्जी गेट पास काटे, सरकारी रिकॉर्ड में ट्रक चलते रहे और सरकारी कागजों में धान इधर से उधर होता रहा लेकिन जब भौतिक सत्यापन हुआ तो 3.54 करोड़ रुपये का 12500 क्विंटल से ज्यादा धान गायब मिला। करोड़ों रुपये के इस खेल में खाद्य एवं पूर्ति विभाग के चार निरीक्षक और एक उप निरीक्षक पर सरकार की गाज गिर गई है।
हरियाणा सरकार ने विभागीय जांच में गंभीर अनियमितताएं, फर्जी रिकॉर्ड, धान स्टॉक में भारी कमी और सरकारी खरीद नीति की अनदेखी पाए जाने के बाद तत्कालीन खाद्य एवं पूर्ति निरीक्षक समीर वशिष्ठ, संदीप शर्मा, लोकेश, यशवीर सिंह तथा निलंबित उप-निरीक्षक रामफल को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया है। अब जांच और कार्रवाई अब केवल निरीक्षकों तक सीमित नहीं रहेगी। विभाग पूरे नेटवर्क की भूमिका खंगाल रहा है। राइस मिल संचालकों, ट्रांसपोर्ट एजेंसियों, मंडी कर्मचारियों और अन्य विभागीय अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ चुकी है।
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अलग-अलग जांच रिपोर्ट के अनुसार, करनाल की बतान फूड्स राइस मिल में विभागीय रिकॉर्ड में 67,013 बैग पीआर धान आवंटित दिखाया गया था लेकिन मौके पर जांच में 2,906 बैग कम मिले। यह कमी करीब 1032 क्विंटल धान की निकली। दूसरा बड़ा खुलासा जुंडला स्थित ओपन प्लिंथ में हुआ, जहां सरकारी रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में भारी अंतर मिला। विभागीय टीम और मार्केट कमेटी की संयुक्त जांच में यहां 32354 बैग धान कम पाया। दोनों जगह का कुल 33759 बैग यानीकरीब 12,500 क्विंटल धान कम पाया गया। अधिकारियों के अनुसार इतनी बड़ी मात्रा में धान का गायब होना केवल लापरवाही नहीं बल्कि संगठित स्तर पर हुई गंभीर अनियमितता है।
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कागजों में चले ट्रक, सिस्टम में दिखी शून्य किलोमीटर दूरी
जांच में धान परिवहन व्यवस्था भी संदेह के घेरे में आ गई। रिकॉर्ड के मुताबिक जुंडला मंडी से बतान फूड्स राइस मिल तक 66 ट्रकों से धान पहुंचाया गया था लेकिन जांच में 24 ट्रकों की दूरी शून्य किलोमीटर दर्ज मिली। अधिकारियों ने इसे तकनीकी रूप से असंभव बताते हुए रिकॉर्ड में हेराफेरी की आशंका जताई। जांच टीम के अनुसार ट्रकों की ऑनलाइन एंट्री, जीपीएस लोकेशन और वास्तविक परिवहन दूरी में भारी अंतर मिला। कई मामलों में बिना सक्षम अनुमति के गेट पास जारी कर दिए गए। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि कहीं फर्जी गेट पास और कागजी परिवहन के जरिए सरकारी धान को निजी बाजार में तो नहीं खपाया गया।
सुखाने के नाम पर बाहर रखा गया 855 एमटी धान
तरावड़ी स्थित बीआरसी ओवरसीज राइस मिल की जांच में भी बड़ा खुलासा हुआ। विभागीय रिकॉर्ड के मुकाबले मिल परिसर में 855 एमटी धान कम मिला। जांच में सामने आया कि यह धान बिना अनुमति सग्गा मंडी फड़ में रखा गया था। मामले में तत्कालीन उप-निरीक्षक रामफल को जिम्मेदार ठहराया गया। जांच रिपोर्ट में कहा गया कि उन्होंने न तो समय पर भौतिक सत्यापन किया और न ही राइस मिल की एग्रीमेंट फाइल की कमियों को दूर कराया। विभाग ने इसे खरीद नीति 2025-26 का गंभीर उल्लंघन माना।
अधिकारियों ने दी सफाई, जांच टीम ने खारिज किए तर्क
कार्रवाई से पहले संबंधित अधिकारियों से जवाब भी मांगे गए थे। कई अधिकारियों ने दावा किया कि पूरी खरीद प्रक्रिया ऑनलाइन होती है और निरीक्षक अकेले कोई गड़बड़ी नहीं कर सकता। कुछ ने जीपीएस खराबी और तकनीकी खामी का हवाला दिया, जबकि कुछ ने मिल मालिकों और ट्रांसपोर्ट एजेंसियों को जिम्मेदार बताया। हालांकि विभागीय जांच अधिकारी अपार तिवारी और अन्य अधिकारियों ने इन जवाबों को असंतोषजनक माना। रिपोर्ट में साफ कहा गया कि अगर समय-समय पर स्टॉक का भौतिक सत्यापन और निगरानी होती तो इतनी बड़ी धान कमी संभव ही नहीं थी।
पहले एफआईआर, फिर निलंबन और अब सीधी बर्खास्तगी
मामले की गंभीरता को देखते हुए करनाल सदर थाना में एफआईआर नंबर 836 और तरावड़ी थाना में एफआईआर नंबर 419 पहले ही दर्ज की जा चुकी हैं। कई अधिकारी पहले निलंबित किए गए थे, जबकि कुछ का तबादला कर दिया गया था। अब विभाग ने हरियाणा सिविल सेवा (दंड एवं अपील) नियमावली 2016 के तहत पांचों अधिकारियों को सेवा से बाहर कर दिया है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के महानिदेशक अंशज सिंह ने आदेशों में कहा है कि सरकारी खरीद प्रणाली में भ्रष्टाचार, रिकॉर्ड में हेराफेरी और सरकारी धन के दुरुपयोग को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।