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Karnal News: दर्द में खड़े रहे मरीज... लंबे इंतजार के बाद मिली दवा
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पंजीकरण कराने के लिए लगी लोगों की लाइन संवाद
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। सेक्टर-16 के साहिल, सेक्टर-4 के पवन कुमार बुधवार को सुबह ठीक 9:30 बजे अस्पताल आ गए थे। सोचा था कि जल्दी दवा लेकर अपने घर पहुंचेंगे लेकिन दोनों 12:30 बजे के बाद ही जिला नागरिक अस्पताल से जा सके। दवा के काउंटर पर कतार इतनी लंबी थी कि उन्हें एक घंटा बाद दवा मिल सकी। मोदीपुर गांव की मंजु के अनुसार डॉक्टर ने कहा कि 5 दवाएं ही मिल पाएंगी, एक दवा बाहर से लेनी पड़ेगी।
बुधवार को नागरिक अस्पताल की ओपीडी 1,775 की थी। पहले पर्चे की कतार में खड़े-खड़े लोग थक गए। जब पैरों ने जवाब दे दिया तो ओमप्रकाश जो सेक्टर-16 से आए थे वह बैठ गए। बोले, आधा घंटे से खड़ा हूं। अब हिम्मत नहीं।
अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को सबसे पहले पंजीकरण काउंटर पर कतार में लगना पड़ा। मरीजों ने बताया कि उन्हें 2 घंटे तक पर्ची बनवाने के लिए इंतजार करना पड़ा। बुजुर्ग, महिलाएं और गंभीर रोगों से पीड़ित मरीज थककर बैठ गए। समय पर रजिस्ट्रेशन न होने के कारण ओपीडी में भीड़ बढ़ती गई।
मरीजों की सुविधा के लिए बनाया गया हेल्प डेस्क पूरी तरह खाली नजर आया। किसी भी प्रकार की जानकारी न मिलने के कारण मरीज और उनके परिजन इधर-उधर भटकते रहे।
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डॉक्टरों की छुट्टी से बढ़ी परेशानी
अस्पताल में डॉक्टरों के छुट्टी पर होने के कारण ओपीडी व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। मरीज एक कक्ष से दूसरे कक्ष तक भटकते रहे लेकिन कई जगहों पर डॉक्टर मौजूद नहीं मिले। सरोजबाला ने बताया कि उनको आयुष ओपीडी में दिखाना था लेकिन डॉक्टरों के न होने के चलते आज उन्हें वापस जाना पड़ा है।
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टीबी और आयुष ओपीडी में डॉक्टर नहीं मिले
टीबी के मरीजों को संबंधित डॉक्टर अपने कक्ष में नहीं मिले। पूछने पर पता चला कि डॉक्टर प्रशिक्षण के लिए गए हुए हैं। एक मरीज की सांस फूल रही थी, लेकिन डॉक्टर के न होने के कारण उन्हें तत्काल इलाज नहीं मिल सका।
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इतना समय लगा –
- पंजीकरण काउंटर –1 घंटे
- डॉक्टर रूम – 30 मिनट
- सैंपल कलेक्शन – 20 मिनट
- दवा कक्ष - 1 घंटा
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लोगों का दर्द
आयुष ओपीडी में दिखाने आए थे लेकिन डॉक्टर नहीं मिले। अब जो पुरानी दावा लिखी हुई है उसको दोबारा लेकर जाएंगे। - सरोज बाला
मुझे सांस की दिक्कत है। आधा घंटे से अधिक समय पर्ची बनवाने में लगा। अस्पताल में अव्यवस्था का माहौल है। - ओम प्रकाश
दो घंटे से कतार में खड़े हैं। अभी तक रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाया है। जुगाड़ वाले लोग आकर आगे से रजिस्ट्रेशन करा ले जाते हैं। - विनोद
मुझे सांस की दिक्कत है। डॉक्टर कक्ष में नहीं थे। बाद में पता चला है कि डॉक्टर तो प्रशिक्षण पर गए हैं। सूचना देनी चाहिए थी। - मेजर सिंह
मैं डॉक्टर को दिखाने आई थी। उन्होंने 6 दवाएं लिखीं। कहा कि 5 तो यहीं से मिल जाएगी एक दवा बाहर से लेनी होगी। - मंजु
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अस्पताल में फिलहाल काउंटर और कर्मचारियों की कमी है। मरीजों की संख्या अधिक है। जिस वजह से कतारें लंबी लग रही हैं। अगर कोई बाहर की दवा लिख रहा है तो उसके विरुद्ध जांच कर कार्रवाई कराई जाएगी। - डॉ. दीपक गोयल, प्रवक्ता नागरिक अस्पताल
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करनाल। सेक्टर-16 के साहिल, सेक्टर-4 के पवन कुमार बुधवार को सुबह ठीक 9:30 बजे अस्पताल आ गए थे। सोचा था कि जल्दी दवा लेकर अपने घर पहुंचेंगे लेकिन दोनों 12:30 बजे के बाद ही जिला नागरिक अस्पताल से जा सके। दवा के काउंटर पर कतार इतनी लंबी थी कि उन्हें एक घंटा बाद दवा मिल सकी। मोदीपुर गांव की मंजु के अनुसार डॉक्टर ने कहा कि 5 दवाएं ही मिल पाएंगी, एक दवा बाहर से लेनी पड़ेगी।
बुधवार को नागरिक अस्पताल की ओपीडी 1,775 की थी। पहले पर्चे की कतार में खड़े-खड़े लोग थक गए। जब पैरों ने जवाब दे दिया तो ओमप्रकाश जो सेक्टर-16 से आए थे वह बैठ गए। बोले, आधा घंटे से खड़ा हूं। अब हिम्मत नहीं।
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अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को सबसे पहले पंजीकरण काउंटर पर कतार में लगना पड़ा। मरीजों ने बताया कि उन्हें 2 घंटे तक पर्ची बनवाने के लिए इंतजार करना पड़ा। बुजुर्ग, महिलाएं और गंभीर रोगों से पीड़ित मरीज थककर बैठ गए। समय पर रजिस्ट्रेशन न होने के कारण ओपीडी में भीड़ बढ़ती गई।
मरीजों की सुविधा के लिए बनाया गया हेल्प डेस्क पूरी तरह खाली नजर आया। किसी भी प्रकार की जानकारी न मिलने के कारण मरीज और उनके परिजन इधर-उधर भटकते रहे।
डॉक्टरों की छुट्टी से बढ़ी परेशानी
अस्पताल में डॉक्टरों के छुट्टी पर होने के कारण ओपीडी व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। मरीज एक कक्ष से दूसरे कक्ष तक भटकते रहे लेकिन कई जगहों पर डॉक्टर मौजूद नहीं मिले। सरोजबाला ने बताया कि उनको आयुष ओपीडी में दिखाना था लेकिन डॉक्टरों के न होने के चलते आज उन्हें वापस जाना पड़ा है।
टीबी और आयुष ओपीडी में डॉक्टर नहीं मिले
टीबी के मरीजों को संबंधित डॉक्टर अपने कक्ष में नहीं मिले। पूछने पर पता चला कि डॉक्टर प्रशिक्षण के लिए गए हुए हैं। एक मरीज की सांस फूल रही थी, लेकिन डॉक्टर के न होने के कारण उन्हें तत्काल इलाज नहीं मिल सका।
इतना समय लगा –
- पंजीकरण काउंटर –1 घंटे
- डॉक्टर रूम – 30 मिनट
- सैंपल कलेक्शन – 20 मिनट
- दवा कक्ष - 1 घंटा
लोगों का दर्द
आयुष ओपीडी में दिखाने आए थे लेकिन डॉक्टर नहीं मिले। अब जो पुरानी दावा लिखी हुई है उसको दोबारा लेकर जाएंगे। - सरोज बाला
मुझे सांस की दिक्कत है। आधा घंटे से अधिक समय पर्ची बनवाने में लगा। अस्पताल में अव्यवस्था का माहौल है। - ओम प्रकाश
दो घंटे से कतार में खड़े हैं। अभी तक रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाया है। जुगाड़ वाले लोग आकर आगे से रजिस्ट्रेशन करा ले जाते हैं। - विनोद
मुझे सांस की दिक्कत है। डॉक्टर कक्ष में नहीं थे। बाद में पता चला है कि डॉक्टर तो प्रशिक्षण पर गए हैं। सूचना देनी चाहिए थी। - मेजर सिंह
मैं डॉक्टर को दिखाने आई थी। उन्होंने 6 दवाएं लिखीं। कहा कि 5 तो यहीं से मिल जाएगी एक दवा बाहर से लेनी होगी। - मंजु
अस्पताल में फिलहाल काउंटर और कर्मचारियों की कमी है। मरीजों की संख्या अधिक है। जिस वजह से कतारें लंबी लग रही हैं। अगर कोई बाहर की दवा लिख रहा है तो उसके विरुद्ध जांच कर कार्रवाई कराई जाएगी। - डॉ. दीपक गोयल, प्रवक्ता नागरिक अस्पताल