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Karnal News: सभी मिलों का हुआ था भौतिक सत्यापन, फिर भी धान गायब
Sun, 24 May 2026 01:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Sun, 24 May 2026 01:33 AM IST
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करनाल। तरावड़ी की दो चावल मिलों में भाैतिक सत्यापन में सामने आए 36 हजार क्विंटल धान घोटाले में तत्कालीन डीएफएससी अनिल कुमार की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। दावा किया गया है कि उन्होंने भौतिक सत्यापन किया था, फिर भी धान गायब हो गया। इसी कारण से शनिवार को तरावड़ी थाना पुलिस ने आरोपी डीएफएससी विभाग के सहायक निरीक्षक रामफल (बर्खास्त) को गिरफ्तार किया।
इतनी भारी मात्रा में धान न मिलने से सरकार को 12.60 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इस मामले को मिलाकर जिले में धान घोटाला कुल 32.60 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। पुलिस के अलावा मामले में अब विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।
तरावड़ी के बालाजी राइस मिल में 10 हजार क्विंटल और विश्वकर्मा राइस मिल में 26 हजार क्विंटल धान कम मिलने के बाद खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक मुकेश कुमार ने दोनों मिलों के संचालकों और विभाग के निरीक्षक देवेंद्र (निलंबित) और सहायक निरीक्षक रामफल (बर्खास्त) के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करवाई थी। पुलिस ने खाद्य आपूर्ति विभाग से भाैतिक सत्यापन का रिकाॅर्ड मांगा है। नवंबर माह में धान घोटाला सामने आने पर खाद्य आपूर्ति विभाग मुख्यालय की ओर से सभी मिलों का भाैतिक सत्यापन करवाया गया था।
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अब बड़ा सवाल यह है कि अगर मिलों में धान नहीं था तो पहले हुए सत्यापन की रिपोर्ट में पूरा कैसे दर्शाया गया था। वहीं पहले हुए भाैतिक सत्यापन की विभागीय जांच सोमवार से शुरू होगी। दोनों रिपोर्टों के अवलोकन में सामने आएगा कि उस समय मिलों में कितना धान दर्शाया गया है। अब डीसी डाॅ. आनंद शर्मा के आदेश पर जिले के अन्य राइस मिलों में भी भाैतिक सत्यापन करवाया जाएगा।
अब तक 15 अधिकारी और कर्मचारी गिरफ्तार
विदित्त हो कि जिले में इससे पहले हुए 20 करोड़ रुपये धान घोटाले में अलग-अलग थानों में छह प्राथमिकी दर्ज हैं। इसके अलावा करीब 15 अधिकारियों और कर्मचारियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। वहीं मामले में पुलिस ने दो मिलर्स और पांच आढ़तियों को गिरफ्तार किया था। तत्कालीन डीएफएससी अनिल कुमार पिछले दिनों धान घोटाले में भी गिरफ्तार हो चुके हैं।
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दोनों मिलों को दिया था 40-40 हजार क्विंटल धान
डीएफएससी मुकेश कुमार ने बताया कि विभाग की ओर से बालाजी राइस मिल और विश्वकर्मा राइस मिल को 40-40 हजार क्विंटल धान अलाॅट किया गया था। भाैतिक सत्यापन में बालाजी राइस मिल में 10 हजार क्विंटल और विश्वकर्मा राइस मिल में 26 हजार क्विंटल धान कम पाया था। वहीं बड़ी बात है कि दोनों में चावल तैयार करने के लिए लगाई मशीन भी चालू हालत में नहीं थी। दूसरी ओर विश्वकर्मा राइस मिल ने तो अभी तक चावल का एक भी दाना सरकार को नहीं दिया है। अब खाद्य आपूर्ति विभाग और पुलिस जांच में पता लगाएगी कि बालाजी राइस मिल ने मशीन चालू न होने के बाद भी सरकार को जो चावल दिया है, वह कहां से लाकर दिया है। उसकी एवज में जो धान था उसे बेचा गया है या फिर धान के सिर्फ फर्जी गेटपास कटवाए गए हैं।
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आरोपी ऑक्शन रिकाॅर्डर को जांच में शामिल किया
पुलिस की एसआईटी ने कार्रवाई करते हुए करनाल मंडी के ऑक्शन रिकाॅर्डर यशपाल को जांच में शामिल किया है। उसका नाम थाना शहर में दर्ज करनाल अनाज मंडी में हुए गेटपास फर्जीवाड़े की प्राथमिकी और सदर थाना में दर्ज बतान फूड में हुए 12,500 क्विंटल धान फर्जीवाड़े में शामिल है। एसआईटी इन दोनों मामलों में आरोपी से पूछताछ कर रही है। यशपाल से पुलिस को अहम सुराग मिलने की संभावना है। इसके बाद धान घोटाले में अन्य के नाम भी सामने आ सकते हैं।
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इतनी भारी मात्रा में धान न मिलने से सरकार को 12.60 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इस मामले को मिलाकर जिले में धान घोटाला कुल 32.60 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। पुलिस के अलावा मामले में अब विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।
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तरावड़ी के बालाजी राइस मिल में 10 हजार क्विंटल और विश्वकर्मा राइस मिल में 26 हजार क्विंटल धान कम मिलने के बाद खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक मुकेश कुमार ने दोनों मिलों के संचालकों और विभाग के निरीक्षक देवेंद्र (निलंबित) और सहायक निरीक्षक रामफल (बर्खास्त) के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करवाई थी। पुलिस ने खाद्य आपूर्ति विभाग से भाैतिक सत्यापन का रिकाॅर्ड मांगा है। नवंबर माह में धान घोटाला सामने आने पर खाद्य आपूर्ति विभाग मुख्यालय की ओर से सभी मिलों का भाैतिक सत्यापन करवाया गया था।
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अब बड़ा सवाल यह है कि अगर मिलों में धान नहीं था तो पहले हुए सत्यापन की रिपोर्ट में पूरा कैसे दर्शाया गया था। वहीं पहले हुए भाैतिक सत्यापन की विभागीय जांच सोमवार से शुरू होगी। दोनों रिपोर्टों के अवलोकन में सामने आएगा कि उस समय मिलों में कितना धान दर्शाया गया है। अब डीसी डाॅ. आनंद शर्मा के आदेश पर जिले के अन्य राइस मिलों में भी भाैतिक सत्यापन करवाया जाएगा।
अब तक 15 अधिकारी और कर्मचारी गिरफ्तार
विदित्त हो कि जिले में इससे पहले हुए 20 करोड़ रुपये धान घोटाले में अलग-अलग थानों में छह प्राथमिकी दर्ज हैं। इसके अलावा करीब 15 अधिकारियों और कर्मचारियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। वहीं मामले में पुलिस ने दो मिलर्स और पांच आढ़तियों को गिरफ्तार किया था। तत्कालीन डीएफएससी अनिल कुमार पिछले दिनों धान घोटाले में भी गिरफ्तार हो चुके हैं।
दोनों मिलों को दिया था 40-40 हजार क्विंटल धान
डीएफएससी मुकेश कुमार ने बताया कि विभाग की ओर से बालाजी राइस मिल और विश्वकर्मा राइस मिल को 40-40 हजार क्विंटल धान अलाॅट किया गया था। भाैतिक सत्यापन में बालाजी राइस मिल में 10 हजार क्विंटल और विश्वकर्मा राइस मिल में 26 हजार क्विंटल धान कम पाया था। वहीं बड़ी बात है कि दोनों में चावल तैयार करने के लिए लगाई मशीन भी चालू हालत में नहीं थी। दूसरी ओर विश्वकर्मा राइस मिल ने तो अभी तक चावल का एक भी दाना सरकार को नहीं दिया है। अब खाद्य आपूर्ति विभाग और पुलिस जांच में पता लगाएगी कि बालाजी राइस मिल ने मशीन चालू न होने के बाद भी सरकार को जो चावल दिया है, वह कहां से लाकर दिया है। उसकी एवज में जो धान था उसे बेचा गया है या फिर धान के सिर्फ फर्जी गेटपास कटवाए गए हैं।
आरोपी ऑक्शन रिकाॅर्डर को जांच में शामिल किया
पुलिस की एसआईटी ने कार्रवाई करते हुए करनाल मंडी के ऑक्शन रिकाॅर्डर यशपाल को जांच में शामिल किया है। उसका नाम थाना शहर में दर्ज करनाल अनाज मंडी में हुए गेटपास फर्जीवाड़े की प्राथमिकी और सदर थाना में दर्ज बतान फूड में हुए 12,500 क्विंटल धान फर्जीवाड़े में शामिल है। एसआईटी इन दोनों मामलों में आरोपी से पूछताछ कर रही है। यशपाल से पुलिस को अहम सुराग मिलने की संभावना है। इसके बाद धान घोटाले में अन्य के नाम भी सामने आ सकते हैं।