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दुखों का निवारण केवल भगवान शिव के माध्यम से संभव : पंडित प्रदीप मिश्रा

Fri, 22 May 2026 12:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल Updated Fri, 22 May 2026 12:38 AM IST
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Relief from suffering is possible only through Lord Shiva: Pandit Pradeep Mishra
 नई अनाज मंडी घरौंडा में चल रही श्री ​शिव पुराण कथा में प्रवचन सुनते श्रद्धालु। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल/घरौंडा। नई अनाज मंडी में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा में वीरवार को कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि जैसे कपड़े सिलवाने के लिए दर्जी और बीमारी में डॉक्टर के पास जाते हैं, उसी प्रकार जीवन के दुखों और कष्टों का निवारण केवल भगवान शिव के माध्यम से संभव है। शिव महापुराण में भगवान शिव को कलयुग का डॉक्टर बताया गया है, जो भक्तों के दुख और रोगों का अंत करते हैं।
वहीं उन्होंने गृहस्थ जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि धर्मपत्नी का सच्चा गुरु उसका पति है, जो हर परिस्थिति में रक्षा करता है और साथ निभाता है। आधुनिक जीवनशैली पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि पति-पत्नी के प्रेम में सबसे बड़ा व्यवधान मोबाइल फोन बन रहा है। मोबाइल के आने से कैलेंडर, पंचांग और टॉर्च जैसी चीजें पीछे छूट गई हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा कोई साधारण प्रदेश नहीं है। हरियाणा का अर्थ है जहां हरि का आगमन हुआ हो, इसलिए यह भूमि विशेष और पवित्र है। उन्होंने संतों के तप और सहनशीलता पर कहा कि गर्मी और सर्दी की तपन को सहन करना ही तपस्या है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अपने बुजुर्गों की बातों को सहन कर लेता है, वह जीवन रूपी भवसागर को पार कर जाता है लेकिन आज के समय में लोग बुजुर्गों की बात सुनने से कतराते हैं। उ
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आज होगी शिवरात्रि की कथा
पंडित मिश्रा ने आयोजन समिति से कहा कि 22 मई को दोपहर 1 बजे से 4 बजे तक शिवरात्रि कथा का आयोजन होगा, जिसमें दूर-दराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। इसलिए सभी व्यवस्था पूरी की जाए। 23 मई को सुबह 8 बजे से 11 बजे तक हवन के पश्चात भंडारे का आयोजन कर इस भव्य कथा को विश्राम दिया जाएगा।
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कहीं छूट न जाएं संग
कथा में दूर दराज से आनी वाली बुजुर्ग महिलाएं गांव से अपनी-अपनी सहेलियों के साथ कथा सुनने के लिए आ रही हैं। गर्मी के बावजूद इन बुजुर्ग महिलाओं की भक्ति में कोई कमी नहीं दिखाई दे रही। जबकि पंडाल के अंतिम छोर पर बैठी इन बुजुर्ग महिलाओं को पंडित प्रवीन मिश्रा की झलक शायद ही दिख पाती हो लेकिन पंडित मिश्रा की आवाज सुन ये बुजुर्ग महिलाएं अपने आप को धन्य महसूस कर रही हैं।
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