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Karnal News: 50 लाख रुपये खर्च करके भेजा था अमेरिका, अब 25 लाख में घर पहुंचा शव
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विलाप करते गाैरव के पिता। संवाद
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संवाद न्यूज़ एजेंसी
करनाल। अमेरिका के कैलिफोर्निया में सड़क हादसे में जान गंवाने वाले बाल राजपूतान गांव के गौरव कुमार (22) का शव 14 दिन बाद मंगलवार को गांव पहुंचा। बेटे को अमेरिका में भेजने के लिए परिवार ने दो साल पहले 50 लाख रुपये की राशि खर्च की थी, वहीं अब 25 लाख रुपये खर्च करने के बाद गांव में शव पहुंच पाया है।
मंगलवार सुबह साढ़े सात बजे जैसे ही गौरव का शव गांव पहुंचा तो देखकर पूरा गांव फफक पड़ा। वहीं जैसे ही घर से अंतिम यात्रा शुरू हुई तो बेटे को देखकर मां बेसुध होकर गिर गई। वहीं पिता की आंखों से आंसू छलक आए। गमगीन माहौल में शव का संस्कार किया गया। हर किसी की जुबां पर यही बात थी कि परिवार को क्या पता था जिस बेटे को परिवार के बेहतर भविष्य के लिए 50 लाख रुपये खर्च करके अमेरिका भेजा जा रहा है, उसके शव को मंगवाने के लिए भी 25 लाख रुपये देने पड़ेंगे।
मृतक के पिता रामफल ने बताया कि गौरव को 2 साल पहले अमेरिका भेजने में 50 लाख रुपये का खर्च आया था। इसके लिए उन्हें एक प्लॉट भी बेचना पड़ा। इसके बाद छह माह तक विभिन्न देशों और पनामा के जंगलों के दुर्गम रास्तों से होता हुआ बेटा अमेरिका पहुंचा था। रामफल ने बताया कि 26 मई को उनका बेटा गौरव अमेरिका के कैलिफोर्निया से ट्रक लेकर निकला था। उसे कैलिफोर्निया में किसी दूसरी जगह ट्रक से डिलीवरी करनी थी।
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इस दौरान जब गौरव एक रेस्तरां पर रुका तो उसकी कॉल आई। कुछ देर बातचीत में बताया किअभी चाय पीने के लिए रुका है, इसके बाद बात करेगा। पिता रामफल के अनुसार, अमेरिकी पुलिस से उन्हें जानकारी मिली कि रेस्तरां से निकलने के बाद कुछ ही दूर चलने पर गौरव के ट्रक का एक्सीडेंट हो गया। ट्रक अनियंत्रित होकर खाई में गिर गया। इस हादसे में गौरव की मौके पर ही मौत हो गई। 27 मई को दोपहर करीब ढाई बजे उन्हें अमेरिका पुलिस अधिकारी का फोन आया, उसने ही हादसे की जानकारी दी थी। वहीं गांव बाल राजपूतान में शव का अंतिम संस्कार किया गया। पिता ने बेटे के शव को मुखाग्नि दी।
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नहीं मिला सरकार का सहयोग
मृतक के पिता रामफल ने बताया कि बेटे की मौत की सूचना पर पूरा परिवार बिखर गया। गौरव के शव लाने में भी काफी अड़चन आई। प्रशासनिक अधिकारियों और सरकार से भी इस बारे में मदद मांगी, लेकिन कहीं से कोई मदद नहीं मिली। इसके बाद अमेरिका में रह रहे कुछ परिचितों ने गौरव के शव को भारत पहुंचाने में मदद की। इसमें उनके करीब 25 लाख रुपये भी खर्च हो गए। उन्होंने बताया कि उनके पास करीब 2 एकड़ जमीन है, इससे ही घर का खर्च चलता है।
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शव आने की प्रक्रिया में लगते हैं 12 से 15 दिन
अमेरिका के कैलिफोर्निया के इमीग्रेशन अधिवक्ता जसप्रीत सिंह ने बताया कि अमेरिका से भारत शव लाने में इतना समय लगने के पीछे कई कानूनी, प्रशासनिक और लॉजिस्टिक कारण होते हैं। सबसे पहला चरण मृत्यु की आधिकारिक जांच और दस्तावेज़ीकरण होता है, वहां के स्थानीय अधिकारियों को मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करना होता है। यदि मृत्यु दुर्घटना, आत्महत्या, हत्या या संदिग्ध परिस्थितियों में हुई हो, तो पोस्टमॉर्टम और जांच पूरी होने तक शव नहीं सौंपा जाता। इसके बाद शव को अंतरराष्ट्रीय परिवहन के लिए तैयार करना होता है।
शव का एम्बामिंग (रासायनिक संरक्षण) किया जाता है। वहीं बाद में एयरलाइन और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य नियमों के अनुसार विशेष ताबूत (कास्केट /कोफिन) की व्यवस्था करनी पड़ती है। वहीं इसके बाद भारतीय दूतावास या संबंधित भारतीय वाणिज्य दूतावास से आवश्यक अनुमति और दस्तावेज़ सत्यापित करवाने पड़ते हैं। परिवार के पहचान संबंधी दस्तावेज़, पासपोर्ट की प्रतियां और अन्य कागज़ात जमा करने होते हैं। एयर कार्गो यानि शव सामान्य यात्री सामान की तरह नहीं भेजा जाता। इसे विशेष कार्गो के रूप में भेजा जाता है। उपयुक्त उड़ान, कार्गो स्पेस और ट्रांजिट अनुमतियां उपलब्ध होने में समय लग सकता है। इसके बाद भारत आने पर एयरपोर्ट पर कस्टम और स्वास्थ्य संबंधी दस्तावेज़ की जांच होती है। इसके बाद शव परिवार को सौंपा जाता है।
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शव लाने में खर्च
- फ्यूनरल होम व बॉडी प्रिपरेशन (रसायनिक प्रक्रिया) : 10-15 लाख रुपये
- एयरकार्गो/ फ्लाइट चार्ज : 5 लाख रुपये
- दस्तावेज़, परमिट, डेथ सर्टिफिकेट : 2 से 3 लाख रुपये
- भारत में एयरपोर्ट से घर तक लाने वाला खर्च सहित अन्य खर्च
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5 महीने में करनाल के 6 लोगों की मौत
- दो महीने पहले बसंत विहार निवासी युवक की रूस में मौत हो गई। युवक टूरिस्ट वीजा पर 16 मार्च को विदेश गया था।
- टेक्सास शहर में फूड स्टोर में लगी आग में जिंदा जलकर करनाल के ही गंगाटेहड़ी गांव निवासी सुखविंद्र सिंह (22) की मौत हो गई थी।
- दो महीने पहले ही घोघगड़ीपुर गांव के एक 20 वर्षीय युवक की अमेरिका में सड़क हादसे में मौत हो गई।
- पांच माह पहले कैमला गांव के युवक मुकेश कुमार की स्पेन में हार्ट अटैक से मौत हो गई।
- डेढ़ माह पहले इंद्री के गांव समौरा के चेतक शर्मा की भी अमेरिका के जॉर्जिया में गोली मारकर हत्या कर दी गई।
करनाल। अमेरिका के कैलिफोर्निया में सड़क हादसे में जान गंवाने वाले बाल राजपूतान गांव के गौरव कुमार (22) का शव 14 दिन बाद मंगलवार को गांव पहुंचा। बेटे को अमेरिका में भेजने के लिए परिवार ने दो साल पहले 50 लाख रुपये की राशि खर्च की थी, वहीं अब 25 लाख रुपये खर्च करने के बाद गांव में शव पहुंच पाया है।
मंगलवार सुबह साढ़े सात बजे जैसे ही गौरव का शव गांव पहुंचा तो देखकर पूरा गांव फफक पड़ा। वहीं जैसे ही घर से अंतिम यात्रा शुरू हुई तो बेटे को देखकर मां बेसुध होकर गिर गई। वहीं पिता की आंखों से आंसू छलक आए। गमगीन माहौल में शव का संस्कार किया गया। हर किसी की जुबां पर यही बात थी कि परिवार को क्या पता था जिस बेटे को परिवार के बेहतर भविष्य के लिए 50 लाख रुपये खर्च करके अमेरिका भेजा जा रहा है, उसके शव को मंगवाने के लिए भी 25 लाख रुपये देने पड़ेंगे।
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मृतक के पिता रामफल ने बताया कि गौरव को 2 साल पहले अमेरिका भेजने में 50 लाख रुपये का खर्च आया था। इसके लिए उन्हें एक प्लॉट भी बेचना पड़ा। इसके बाद छह माह तक विभिन्न देशों और पनामा के जंगलों के दुर्गम रास्तों से होता हुआ बेटा अमेरिका पहुंचा था। रामफल ने बताया कि 26 मई को उनका बेटा गौरव अमेरिका के कैलिफोर्निया से ट्रक लेकर निकला था। उसे कैलिफोर्निया में किसी दूसरी जगह ट्रक से डिलीवरी करनी थी।
इस दौरान जब गौरव एक रेस्तरां पर रुका तो उसकी कॉल आई। कुछ देर बातचीत में बताया किअभी चाय पीने के लिए रुका है, इसके बाद बात करेगा। पिता रामफल के अनुसार, अमेरिकी पुलिस से उन्हें जानकारी मिली कि रेस्तरां से निकलने के बाद कुछ ही दूर चलने पर गौरव के ट्रक का एक्सीडेंट हो गया। ट्रक अनियंत्रित होकर खाई में गिर गया। इस हादसे में गौरव की मौके पर ही मौत हो गई। 27 मई को दोपहर करीब ढाई बजे उन्हें अमेरिका पुलिस अधिकारी का फोन आया, उसने ही हादसे की जानकारी दी थी। वहीं गांव बाल राजपूतान में शव का अंतिम संस्कार किया गया। पिता ने बेटे के शव को मुखाग्नि दी।
नहीं मिला सरकार का सहयोग
मृतक के पिता रामफल ने बताया कि बेटे की मौत की सूचना पर पूरा परिवार बिखर गया। गौरव के शव लाने में भी काफी अड़चन आई। प्रशासनिक अधिकारियों और सरकार से भी इस बारे में मदद मांगी, लेकिन कहीं से कोई मदद नहीं मिली। इसके बाद अमेरिका में रह रहे कुछ परिचितों ने गौरव के शव को भारत पहुंचाने में मदद की। इसमें उनके करीब 25 लाख रुपये भी खर्च हो गए। उन्होंने बताया कि उनके पास करीब 2 एकड़ जमीन है, इससे ही घर का खर्च चलता है।
शव आने की प्रक्रिया में लगते हैं 12 से 15 दिन
अमेरिका के कैलिफोर्निया के इमीग्रेशन अधिवक्ता जसप्रीत सिंह ने बताया कि अमेरिका से भारत शव लाने में इतना समय लगने के पीछे कई कानूनी, प्रशासनिक और लॉजिस्टिक कारण होते हैं। सबसे पहला चरण मृत्यु की आधिकारिक जांच और दस्तावेज़ीकरण होता है, वहां के स्थानीय अधिकारियों को मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करना होता है। यदि मृत्यु दुर्घटना, आत्महत्या, हत्या या संदिग्ध परिस्थितियों में हुई हो, तो पोस्टमॉर्टम और जांच पूरी होने तक शव नहीं सौंपा जाता। इसके बाद शव को अंतरराष्ट्रीय परिवहन के लिए तैयार करना होता है।
शव का एम्बामिंग (रासायनिक संरक्षण) किया जाता है। वहीं बाद में एयरलाइन और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य नियमों के अनुसार विशेष ताबूत (कास्केट /कोफिन) की व्यवस्था करनी पड़ती है। वहीं इसके बाद भारतीय दूतावास या संबंधित भारतीय वाणिज्य दूतावास से आवश्यक अनुमति और दस्तावेज़ सत्यापित करवाने पड़ते हैं। परिवार के पहचान संबंधी दस्तावेज़, पासपोर्ट की प्रतियां और अन्य कागज़ात जमा करने होते हैं। एयर कार्गो यानि शव सामान्य यात्री सामान की तरह नहीं भेजा जाता। इसे विशेष कार्गो के रूप में भेजा जाता है। उपयुक्त उड़ान, कार्गो स्पेस और ट्रांजिट अनुमतियां उपलब्ध होने में समय लग सकता है। इसके बाद भारत आने पर एयरपोर्ट पर कस्टम और स्वास्थ्य संबंधी दस्तावेज़ की जांच होती है। इसके बाद शव परिवार को सौंपा जाता है।
शव लाने में खर्च
- फ्यूनरल होम व बॉडी प्रिपरेशन (रसायनिक प्रक्रिया) : 10-15 लाख रुपये
- एयरकार्गो/ फ्लाइट चार्ज : 5 लाख रुपये
- दस्तावेज़, परमिट, डेथ सर्टिफिकेट : 2 से 3 लाख रुपये
- भारत में एयरपोर्ट से घर तक लाने वाला खर्च सहित अन्य खर्च
5 महीने में करनाल के 6 लोगों की मौत
- दो महीने पहले बसंत विहार निवासी युवक की रूस में मौत हो गई। युवक टूरिस्ट वीजा पर 16 मार्च को विदेश गया था।
- टेक्सास शहर में फूड स्टोर में लगी आग में जिंदा जलकर करनाल के ही गंगाटेहड़ी गांव निवासी सुखविंद्र सिंह (22) की मौत हो गई थी।
- दो महीने पहले ही घोघगड़ीपुर गांव के एक 20 वर्षीय युवक की अमेरिका में सड़क हादसे में मौत हो गई।
- पांच माह पहले कैमला गांव के युवक मुकेश कुमार की स्पेन में हार्ट अटैक से मौत हो गई।
- डेढ़ माह पहले इंद्री के गांव समौरा के चेतक शर्मा की भी अमेरिका के जॉर्जिया में गोली मारकर हत्या कर दी गई।