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Karnal News: राधा कृष्ण मंदिर में शुरू हुई श्रीमद्भागवत कथा, महिलाओं ने निकाली कलशयात्रा
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Tue, 02 Jun 2026 01:56 AM IST
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कुरुक्षेत्र। राधा कृष्ण मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का पूजन करते आयोजक व अन्य। स्वयं
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। पुरुषोत्तम मास के अवसर पर श्री गो गीता गायत्री सत्संग सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ राधा कृष्ण मंदिर में मंगल कलशयात्रा के साथ हुआ। कलशयात्रा से पूर्व भागवत कथा के मुख्य आयोजक सतीश बांम्बा, किरण बांम्बा ने परिवार सहित कलश पूजन किया। इसके बाद महिलाओं ने कलशयात्रा निकाली।
कथावाचक अनिल शास्त्री ने कलशयात्रा की महिमा को बताते हुए कहा की सनातन धर्म में भागवत कथा का विशेष महत्व होता है। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आध्यात्मिक जागरण और भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का सार भी है। किसी भी भागवत कथा के शुभारंभ से पहले कलशयात्रा निकालने की परंपरा होती है, जो पूरे आयोजन को शुभता प्रदान करती है।
शास्त्री ने कहा कि कलशयात्रा को पवित्रता, सकारात्मक ऊर्जा और शुभ संकेत का प्रतीक माना जाता है। यह यात्रा देवी-देवताओं का आह्वान करने के साथ-साथ आसपास के वातावरण की शुद्धि के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। शास्त्रों की मानें तो कलश का पानी जल तत्व का प्रतिनिधित्व करता है, जो जीवन का आधार है। आचार्य रंगनाथ शास्त्री ने पूजन संपन्न करवाया।
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कुरुक्षेत्र। पुरुषोत्तम मास के अवसर पर श्री गो गीता गायत्री सत्संग सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ राधा कृष्ण मंदिर में मंगल कलशयात्रा के साथ हुआ। कलशयात्रा से पूर्व भागवत कथा के मुख्य आयोजक सतीश बांम्बा, किरण बांम्बा ने परिवार सहित कलश पूजन किया। इसके बाद महिलाओं ने कलशयात्रा निकाली।
कथावाचक अनिल शास्त्री ने कलशयात्रा की महिमा को बताते हुए कहा की सनातन धर्म में भागवत कथा का विशेष महत्व होता है। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आध्यात्मिक जागरण और भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का सार भी है। किसी भी भागवत कथा के शुभारंभ से पहले कलशयात्रा निकालने की परंपरा होती है, जो पूरे आयोजन को शुभता प्रदान करती है।
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शास्त्री ने कहा कि कलशयात्रा को पवित्रता, सकारात्मक ऊर्जा और शुभ संकेत का प्रतीक माना जाता है। यह यात्रा देवी-देवताओं का आह्वान करने के साथ-साथ आसपास के वातावरण की शुद्धि के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। शास्त्रों की मानें तो कलश का पानी जल तत्व का प्रतिनिधित्व करता है, जो जीवन का आधार है। आचार्य रंगनाथ शास्त्री ने पूजन संपन्न करवाया।