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Karnal News: काछवा स्कूल में नहीं बदले हालात, मच्छरों के बीच बरामदे में पढ़ने को मजबूर बच्चे
Thu, 06 Aug 2026 01:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Thu, 06 Aug 2026 01:43 AM IST
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स्कूल में जमा काई संवाद
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करनाल/काछवा। पीएमश्री राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय काछवा में मच्छरों और गंदगी का संकट अभी तक जस का तस बना हुआ है। स्कूल प्रबंधन, स्वास्थ्य विभाग डीईओ के नोटिस के बाद भी नहीं जागा। स्कूल में करीब 700 विद्यार्थी अब भी कक्षाओं के बजाय बरामदे में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
करीब एक सप्ताह बीतने के बाद भी फॉगिंग नहीं हो पाई है। मच्छरों के बढ़ते प्रकोप के कारण कक्षाओं में पढ़ाई कराना मुश्किल बना हुआ है। स्कूल परिसर में गंदगी, शौचालयों की खराब स्थिति और मुख्य द्वार पर पसरी गंदगी समस्या को और गंभीर बना रही है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चे घर लौटते समय एलर्जी और लाल दानों की शिकायत कर रहे हैं, जिससे उनकी चिंता लगातार बढ़ रही है।
शिक्षा विभाग ने 29 जुलाई को इस मामले में सख्ती दिखाते हुए स्कूल प्रबंधन को नोटिस जारी किया था और जिले के सभी सरकारी स्कूलों को साफ-सफाई व मच्छर नियंत्रण के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद काछवा स्कूल में अभी तक जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं दिख रही। विभागीय स्तर पर दवा उपलब्ध न होने और कर्मचारियों की ड्यूटी/अवकाश जैसी वजहें सामने आ रही हैं, जिससे समस्या के समाधान में देरी हो रही है।
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एडवोकेट संदीप राणा और राजकुमार का कहना है कि सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब बच्चों के स्वास्थ्य पर सीधा असर पड़ रहा है, तब जिम्मेदार कब सक्रिय होंगे। क्या फॉगिंग और सफाई जैसी बुनियादी व्यवस्था भी कागजी निर्देशों तक ही सीमित रहेगी, या फिर बच्चों को सुरक्षित वातावरण देने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाए जाएंगे।
दवा नहीं मिली तो अपने खर्च पर कराएंगे : सरपंच
सरपंच सुशीला का कहना है कि फॉगिंग की दवाई के लिए पीएचसी की एसएमओ को मांग भेजी गई है। यदि एक-दो दिन में दवाई नहीं मिलती तो पंचायत अपने खर्च पर फॉगिंग करवाएगी।
अध्यापक बोले, अधिकारियों से कई बार की बात
अध्यापक जगतार सिंह ने बताया कि अधिकारियों से कई बार संपर्क किया गया, लेकिन अभी तक दवाई उपलब्ध नहीं हो सकी है। एसएमओ डॉ. गरिमा से बात की गई। उन्होंने पांच मिनट बाद जानकारी देने की बात कही लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला।
हेल्थ निरीक्षक के आते ही होगी फॉगिंग : एसएमओ
एसएमओ डॉ. गरिमा के अनुसार, हेल्थ इंस्पेक्टर सतीश की पहले एसआईआर ड्यूटी लगी हुई थी और बाद में वह अवकाश पर चले गए थे। उनके ड्यूटी पर लौटते ही एसएमओ कार्यालय से दवाई मंगवाकर स्कूल में फॉगिंग करवा दी जाएगी।
ड्यूटी पर आते ही ले आऊंगा दवा : निरीक्षक
हेल्थ इंस्पेक्टर सतीश का कहना है कि उनकी पहले एसआईआर में ड्यूटी लगी हुई थी और बाद में बुखार होने के कारण वह छुट्टी पर हैं। फॉगिंग की दवाई पीएचसी में उपलब्ध नहीं रहती, बल्कि एसएमओ कार्यालय से मांग के आधार पर प्राप्त होती है। आश्वासन दिया कि ड्यूटी पर लौटते ही दवाई की मांग भेज दी जाएगी।
मेरा बेटा बीमार हो चुका : राजेश
अभिभावक राजेश ने बताया कि उनका बेटा बारहवीं कक्षा में पढ़ता है। उसके अनुसार स्कूल में साफ-सफाई की स्थिति बेहद खराब है। शौचालयों की हालत भी ठीक नहीं है और वहां से लगातार दुर्गंध आती है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूल प्रशासन इस गंभीर समस्या की ओर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रहा।
स्कूल प्रबंधन के पास अपना फंड भी होता है, सफाई जैसा कार्य तो वे स्वयं भी करा सकते हैं। लापरवाही मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। - रोहताश वर्मा, डीईओ करनाल
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करीब एक सप्ताह बीतने के बाद भी फॉगिंग नहीं हो पाई है। मच्छरों के बढ़ते प्रकोप के कारण कक्षाओं में पढ़ाई कराना मुश्किल बना हुआ है। स्कूल परिसर में गंदगी, शौचालयों की खराब स्थिति और मुख्य द्वार पर पसरी गंदगी समस्या को और गंभीर बना रही है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चे घर लौटते समय एलर्जी और लाल दानों की शिकायत कर रहे हैं, जिससे उनकी चिंता लगातार बढ़ रही है।
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शिक्षा विभाग ने 29 जुलाई को इस मामले में सख्ती दिखाते हुए स्कूल प्रबंधन को नोटिस जारी किया था और जिले के सभी सरकारी स्कूलों को साफ-सफाई व मच्छर नियंत्रण के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद काछवा स्कूल में अभी तक जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं दिख रही। विभागीय स्तर पर दवा उपलब्ध न होने और कर्मचारियों की ड्यूटी/अवकाश जैसी वजहें सामने आ रही हैं, जिससे समस्या के समाधान में देरी हो रही है।
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एडवोकेट संदीप राणा और राजकुमार का कहना है कि सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब बच्चों के स्वास्थ्य पर सीधा असर पड़ रहा है, तब जिम्मेदार कब सक्रिय होंगे। क्या फॉगिंग और सफाई जैसी बुनियादी व्यवस्था भी कागजी निर्देशों तक ही सीमित रहेगी, या फिर बच्चों को सुरक्षित वातावरण देने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाए जाएंगे।
दवा नहीं मिली तो अपने खर्च पर कराएंगे : सरपंच
सरपंच सुशीला का कहना है कि फॉगिंग की दवाई के लिए पीएचसी की एसएमओ को मांग भेजी गई है। यदि एक-दो दिन में दवाई नहीं मिलती तो पंचायत अपने खर्च पर फॉगिंग करवाएगी।
अध्यापक बोले, अधिकारियों से कई बार की बात
अध्यापक जगतार सिंह ने बताया कि अधिकारियों से कई बार संपर्क किया गया, लेकिन अभी तक दवाई उपलब्ध नहीं हो सकी है। एसएमओ डॉ. गरिमा से बात की गई। उन्होंने पांच मिनट बाद जानकारी देने की बात कही लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला।
हेल्थ निरीक्षक के आते ही होगी फॉगिंग : एसएमओ
एसएमओ डॉ. गरिमा के अनुसार, हेल्थ इंस्पेक्टर सतीश की पहले एसआईआर ड्यूटी लगी हुई थी और बाद में वह अवकाश पर चले गए थे। उनके ड्यूटी पर लौटते ही एसएमओ कार्यालय से दवाई मंगवाकर स्कूल में फॉगिंग करवा दी जाएगी।
ड्यूटी पर आते ही ले आऊंगा दवा : निरीक्षक
हेल्थ इंस्पेक्टर सतीश का कहना है कि उनकी पहले एसआईआर में ड्यूटी लगी हुई थी और बाद में बुखार होने के कारण वह छुट्टी पर हैं। फॉगिंग की दवाई पीएचसी में उपलब्ध नहीं रहती, बल्कि एसएमओ कार्यालय से मांग के आधार पर प्राप्त होती है। आश्वासन दिया कि ड्यूटी पर लौटते ही दवाई की मांग भेज दी जाएगी।
मेरा बेटा बीमार हो चुका : राजेश
अभिभावक राजेश ने बताया कि उनका बेटा बारहवीं कक्षा में पढ़ता है। उसके अनुसार स्कूल में साफ-सफाई की स्थिति बेहद खराब है। शौचालयों की हालत भी ठीक नहीं है और वहां से लगातार दुर्गंध आती है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूल प्रशासन इस गंभीर समस्या की ओर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रहा।
स्कूल प्रबंधन के पास अपना फंड भी होता है, सफाई जैसा कार्य तो वे स्वयं भी करा सकते हैं। लापरवाही मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। - रोहताश वर्मा, डीईओ करनाल

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