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Karnal News: मेहनत और हुनर से महक रहा साझा बाजार
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Mon, 30 Mar 2026 01:46 AM IST
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त्पाद तैयार करती स्वयं सहायता समूह की महिलाएं संवाद
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करनाल।
साझा बाजार ग्रामीण महिलाओं के हाथों के हुनर और श्रम से महक बिखेर रहा है। महिलाओं के जूट से तैयार किए गए विभिन्न उत्पाद जैसे बैग, गुड़िया, दरियां और कान्हा से जुड़े सजावटी सामान ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं। हर शनिवार और रविवार को बाजार में भीड़ लगती है। लोगों को अच्छे दाम पर उम्दा सामान मिलता है और ग्रामीण महिलाओं को बिक्री से आध धन से आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास मिलता है।
स्वयं सहायता समूह योजना के जिला परियोजना प्रबंधक गुरमीत ने बताया कि ग्रामीण महिलाएं अपने ही घरेलू हुनर से आत्मनिर्भर व आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं। साझा बाजार में लगी इन दुकानों पर जूट से बने उत्पादों में पारंपरिक कला के साथ-साथ आधुनिक डिजाइन का अनूठा मेल देखने को मिल रहा है। महिलाएं जूट से सुंदर हैंडबैग, आकर्षक गुड़िया, घर सजाने के लिए दरियां और कान्हा से जुड़े धार्मिक उत्पाद तैयार कर रही हैं।
नीलोखेड़ी से सुनीता ने बताया कि उत्पाद पूरी तरह से हस्तशिल्प होते हैं जिसमें महिलाएं पहले पांच दिन अपने घर पर ही इन्हें तैयार करती हैं और फिर शनिवार व रविवार इन्हें बाजार में बेचती हैं।
आर्थिक स्थिति अच्छी हो रही हैसंगोही से रीना देवी ने बताया कि पहले घर तक ही सीमित थीं। अब साझा बाजार ने उनकी एक पहचान है। समूह से जुड़ने के बाद जूट से बैग, गुड़िया और सजावटी सामान बना रही हैं। लोग इन सामानों को काफी पसंद कर रहे हैं। हर शनिवार व रविवार आकर सामान को बेचते हैं। दिनोंदिन आर्थिक स्थिति बेहतर होती जा रही है।
11 महिलाओं का बनाया है समूह
नीलोखेड़ी से सुनीता बताया कि उन्होंने समूह से जुड़ने के बाद जूट उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण लिया। वर्तमान में 11 महिलाओं का समूह के साथ काम कर रही हैं। समूह की महिलाएं अपने हुनर व काैशल से अलग-अलग उत्पाद तैयार करती हैं। हर माह एक बार साझा बाजार में इनको बेचती हैं। इससे समूह की महिलााएं आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं।
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साझा बाजार ग्रामीण महिलाओं के हाथों के हुनर और श्रम से महक बिखेर रहा है। महिलाओं के जूट से तैयार किए गए विभिन्न उत्पाद जैसे बैग, गुड़िया, दरियां और कान्हा से जुड़े सजावटी सामान ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं। हर शनिवार और रविवार को बाजार में भीड़ लगती है। लोगों को अच्छे दाम पर उम्दा सामान मिलता है और ग्रामीण महिलाओं को बिक्री से आध धन से आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास मिलता है।
स्वयं सहायता समूह योजना के जिला परियोजना प्रबंधक गुरमीत ने बताया कि ग्रामीण महिलाएं अपने ही घरेलू हुनर से आत्मनिर्भर व आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं। साझा बाजार में लगी इन दुकानों पर जूट से बने उत्पादों में पारंपरिक कला के साथ-साथ आधुनिक डिजाइन का अनूठा मेल देखने को मिल रहा है। महिलाएं जूट से सुंदर हैंडबैग, आकर्षक गुड़िया, घर सजाने के लिए दरियां और कान्हा से जुड़े धार्मिक उत्पाद तैयार कर रही हैं।
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नीलोखेड़ी से सुनीता ने बताया कि उत्पाद पूरी तरह से हस्तशिल्प होते हैं जिसमें महिलाएं पहले पांच दिन अपने घर पर ही इन्हें तैयार करती हैं और फिर शनिवार व रविवार इन्हें बाजार में बेचती हैं।
आर्थिक स्थिति अच्छी हो रही हैसंगोही से रीना देवी ने बताया कि पहले घर तक ही सीमित थीं। अब साझा बाजार ने उनकी एक पहचान है। समूह से जुड़ने के बाद जूट से बैग, गुड़िया और सजावटी सामान बना रही हैं। लोग इन सामानों को काफी पसंद कर रहे हैं। हर शनिवार व रविवार आकर सामान को बेचते हैं। दिनोंदिन आर्थिक स्थिति बेहतर होती जा रही है।
11 महिलाओं का बनाया है समूह
नीलोखेड़ी से सुनीता बताया कि उन्होंने समूह से जुड़ने के बाद जूट उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण लिया। वर्तमान में 11 महिलाओं का समूह के साथ काम कर रही हैं। समूह की महिलाएं अपने हुनर व काैशल से अलग-अलग उत्पाद तैयार करती हैं। हर माह एक बार साझा बाजार में इनको बेचती हैं। इससे समूह की महिलााएं आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं।