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Karnal News: बीमा कंपनी को उपभोक्ता को ब्याज सहित तीन लाख लौटाने के आदेश
Sun, 24 May 2026 01:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Sun, 24 May 2026 01:55 AM IST
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कुरुक्षेत्र। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने स्वास्थ्य बीमा दावे को खारिज करने के मामले में स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी को बड़ा झटका दिया। आयोग ने कंपनी को शिकायतकर्ता को तीन लाख रुपये ब्याज सहित भुगतान करने के आदेश दिए हैं। कंपनी को सेवा में कमी का दोषी माना है।
पिपली निवासी शिकायतकर्ता बृज मोहन ने आयोग में दायर शिकायत में बताया कि उन्होंने वर्ष 2019 में स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस पॉलिसी ली थी, जिसमें उनकी पत्नी अंजू गर्ग सहित परिवार के चार सदस्य शामिल थे। दिसंबर 2019 में उनकी पत्नी को मॉर्बिड ओबेसिटी विद ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया बीमारी होने पर दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 23 दिसंबर 2019 को बैरिएट्रिक सर्जरी की गई। इलाज पर करीब तीन लाख रुपये खर्च हुए।
शिकायतकर्ता का आरोप था कि बीमा कंपनी के एजेंटों ने राशि दिलाने का आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में कंपनी ने यह कहते हुए क्लेम खारिज कर दिया कि बैरिएट्रिक सर्जरी का भुगतान केवल कैशलेस सुविधा के तहत ही संभव है।
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मामले की सुनवाई के बाद आयोग की अध्यक्ष डॉ. नीलिमा शांगला और सदस्य नीलम व रमेश कुमार ने बीमा कंपनी की आपत्तियों को खारिज करते हुए कंपनी को तीन लाख रुपये नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करने के आदेश दिए। साथ ही 11 हजार रुपये मुकदमा खर्च भी देने को कहा गया। आयोग ने आदेश के पालन के लिए 45 दिन की समय सीमा तय की है।
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पिपली निवासी शिकायतकर्ता बृज मोहन ने आयोग में दायर शिकायत में बताया कि उन्होंने वर्ष 2019 में स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस पॉलिसी ली थी, जिसमें उनकी पत्नी अंजू गर्ग सहित परिवार के चार सदस्य शामिल थे। दिसंबर 2019 में उनकी पत्नी को मॉर्बिड ओबेसिटी विद ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया बीमारी होने पर दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 23 दिसंबर 2019 को बैरिएट्रिक सर्जरी की गई। इलाज पर करीब तीन लाख रुपये खर्च हुए।
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शिकायतकर्ता का आरोप था कि बीमा कंपनी के एजेंटों ने राशि दिलाने का आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में कंपनी ने यह कहते हुए क्लेम खारिज कर दिया कि बैरिएट्रिक सर्जरी का भुगतान केवल कैशलेस सुविधा के तहत ही संभव है।
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मामले की सुनवाई के बाद आयोग की अध्यक्ष डॉ. नीलिमा शांगला और सदस्य नीलम व रमेश कुमार ने बीमा कंपनी की आपत्तियों को खारिज करते हुए कंपनी को तीन लाख रुपये नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करने के आदेश दिए। साथ ही 11 हजार रुपये मुकदमा खर्च भी देने को कहा गया। आयोग ने आदेश के पालन के लिए 45 दिन की समय सीमा तय की है।