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Karnal News: खेल परिसर खंडहर, दीवारें टूटीं...छत दरक रही और मैदान में उगी हैं झाड़ियां
Mon, 25 May 2026 01:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Mon, 25 May 2026 01:51 AM IST
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निगदू। गांव निगदू का राजीव गांधी खेल परिसर बदहाली की कहानी बयां कर रहा है। करोड़ों रुपये खर्च कर ग्रामीण प्रतिभाओं को तराशने के लिए बनाए गए खेल स्टेडियम की हालत बेहद खराब है। दीवारें टूट रही हैं, छतें दरक रही हैं। खेल मैदान पर झाड़ियां उगी हुई हैं।
निगदू में पंचायत की छह एकड़ जमीन पर 17 अगस्त 2009 को तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कार्यकाल में करीब 35 लाख रुपये की लागत से राजीव गांधी खेल परिसर का निर्माण कराया गया था। उद्देश्य था कि ग्रामीण क्षेत्र के खिलाड़ियों को गांव में ही बेहतर प्रशिक्षण और सुविधाएं मिल सकें। मगर विभागीय अनदेखी ने पूरे परिसर को जर्जर बना दिया। 16 साल पहले खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के उद्देश्य से बनाए गए इस खेल परिसर में आज न कोच हैं, न खेल सामग्री और न ही मूलभूत सुविधाएं। परिसर में नशा करने वालों और लावारिस पशुओं का जमावड़ा रहता है।
खेल भवन की खिड़कियां और दरवाजे टूटे
खेल भवन की खिड़कियां और दरवाजे टूट चुके हैं। बिजली-पानी की व्यवस्था नहीं है। शौचालय बदहाल है। मैदानों में कई फीट ऊंची घास उग आई है। दीवारें इतनी जर्जर हैं कि बारिश और आंधी के दौरान इनके गिरने का खतरा रहता है। भवन से पेंट उतर चुका है। जगह-जगह दरारें हैं।
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दीवार तोड़ बनाया रास्ता
स्टेडियम की चहारदीवारी कई जगह से टूटी हुई है। कुछ लोगों ने तो दीवार तोड़कर आने-जाने का रास्ता तक बना लिया है। परिसर में कोई कर्मचारी तैनात नहीं होने से चोरी की घटनाएं भी बढ़ीं। शौचालयों की टोंटियां तक गायब हो चुकी हैं। -रवि
नर्सरी शुरू हुई, कोच नहीं
प्रदेश सरकार की खेल नर्सरी योजना के तहत अप्रैल माह में यहां जूडो नर्सरी शुरू की गई थी। खिलाड़ियों में उत्साह भी दिखा और बच्चे दस्तावेज लेकर पहुंचने लगे, लेकिन कुछ दिन बाद ही कोच गायब हो गया। इसके बाद नर्सरी योजना भी कागजों तक सीमित होकर रह गई। -राज धीमान
खेल परिसर के नवीनीकरण, कोच और सुविधाओं के लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को जनसंवाद कार्यक्रम में पत्र सौंपा गया था। विभाग की ओर से करीब 28 लाख रुपये की मंजूरी भी दी गई, लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं हुआ।
-जितेंद्र अरोड़ा, सरपंच ग्राम पंचायत निगदू
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निगदू में पंचायत की छह एकड़ जमीन पर 17 अगस्त 2009 को तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कार्यकाल में करीब 35 लाख रुपये की लागत से राजीव गांधी खेल परिसर का निर्माण कराया गया था। उद्देश्य था कि ग्रामीण क्षेत्र के खिलाड़ियों को गांव में ही बेहतर प्रशिक्षण और सुविधाएं मिल सकें। मगर विभागीय अनदेखी ने पूरे परिसर को जर्जर बना दिया। 16 साल पहले खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के उद्देश्य से बनाए गए इस खेल परिसर में आज न कोच हैं, न खेल सामग्री और न ही मूलभूत सुविधाएं। परिसर में नशा करने वालों और लावारिस पशुओं का जमावड़ा रहता है।
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खेल भवन की खिड़कियां और दरवाजे टूटे
खेल भवन की खिड़कियां और दरवाजे टूट चुके हैं। बिजली-पानी की व्यवस्था नहीं है। शौचालय बदहाल है। मैदानों में कई फीट ऊंची घास उग आई है। दीवारें इतनी जर्जर हैं कि बारिश और आंधी के दौरान इनके गिरने का खतरा रहता है। भवन से पेंट उतर चुका है। जगह-जगह दरारें हैं।
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दीवार तोड़ बनाया रास्ता
स्टेडियम की चहारदीवारी कई जगह से टूटी हुई है। कुछ लोगों ने तो दीवार तोड़कर आने-जाने का रास्ता तक बना लिया है। परिसर में कोई कर्मचारी तैनात नहीं होने से चोरी की घटनाएं भी बढ़ीं। शौचालयों की टोंटियां तक गायब हो चुकी हैं। -रवि
नर्सरी शुरू हुई, कोच नहीं
प्रदेश सरकार की खेल नर्सरी योजना के तहत अप्रैल माह में यहां जूडो नर्सरी शुरू की गई थी। खिलाड़ियों में उत्साह भी दिखा और बच्चे दस्तावेज लेकर पहुंचने लगे, लेकिन कुछ दिन बाद ही कोच गायब हो गया। इसके बाद नर्सरी योजना भी कागजों तक सीमित होकर रह गई। -राज धीमान
खेल परिसर के नवीनीकरण, कोच और सुविधाओं के लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को जनसंवाद कार्यक्रम में पत्र सौंपा गया था। विभाग की ओर से करीब 28 लाख रुपये की मंजूरी भी दी गई, लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं हुआ।
-जितेंद्र अरोड़ा, सरपंच ग्राम पंचायत निगदू