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Karnal News: शहर में 637 करोड़ से बनेगा प्रदेश का सबसे आधुनिक बस टर्मिनल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Mon, 08 Jun 2026 02:16 AM IST
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बालदी बायपास संवाद
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जितेंद्र नरवाल
करनाल। राष्ट्रीय राजमार्ग-44 से जुड़े बलड़ी बाईपास के पास करीब 31 एकड़ जमीन पर 637 करोड़ रुपये की लागत से प्रदेश का सबसे अत्याधुनिक बस टर्मिनल बनाया जाएगा। निजी कंपनी अपने निवेश से पूरे परिसर का निर्माण करेगी और अगले 33 वर्षों तक संचालन की जिम्मेदारी भी उसकी होगी। निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद परियोजना सरकार को हस्तांतरित कर दिया जाएगा। हरियाणा राज्य परिवहन निदेशालय (डीएसटी) ने परियोजना को मंजूरी दे दी है। निविदा जारी कर दी गई है। तीन साल में बस टर्मिनल बनने की संभावना है।
प्रस्तावित बस टर्मिनल का डिजाइन आधुनिकतम रखी जाएगी। टर्मिनल में यात्रियों को एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। परियोजना शहर में निवेश, रोजगार और व्यापारिक गतिविधियों को भी गति देगी। निर्माण चरण में सैकड़ों लोगों को रोजगार मिलेगा। संचालन शुरू होने के बाद होटल, रिटेल, फूड सर्विस, सुरक्षा, रखरखाव और परिवहन क्षेत्रों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। परियोजना कारोबार मॉडल मानी जा रही है। बस अड्डा उत्तर भारत के सबसे आधुनिक ट्रांसपोर्ट हब में शामिल हो सकता है।
जीएम रोडवेज कुलदीप का कहना है कि परियोजना पीपीपी मोड पर काम करेगी। इसका पूरा काम मुख्यालय की ओर से देखा जा रहा है।
परिसर में मल्टीप्लेक्स भी होगा
बस टर्मिनल कॉमर्शियल हब होगा। परिसर में मॉल, हाई स्ट्रीट शॉपिंग जोन, बजट और कारोबार होटल, मल्टीप्लेक्स, कॉर्पोरेट ऑफिस स्पेस, रेस्तरां, फूड कोर्ट, फार्मेसी, कियोस्क, कैंटीन और जनरल स्टोर विकसित किए जाएंगे। राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित होने के कारण यहां प्रतिदिन हजारों यात्रियों और ग्राहकों की आवाजाही होगी।
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एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं : परिसर में विशाल वातानुकूलित प्रतीक्षालय, डिजिटल सूचना प्रणाली, एलईडी डिस्प्ले बोर्ड, आधुनिक टिकट काउंटर, पूछताछ केंद्र, क्लॉक रूम, पार्सल रूम, पीने के पानी की व्यवस्था और उच्च गुणवत्ता वाली स्टील की कुर्सियां उपलब्ध होगी। यात्रियों के ठहराव के लिए कम से कम 10 बिस्तरों वाली डॉरमेट्री बनाई जाएगी। इसके अलावा बेबी केयर रूम, बच्चों के लिए किड्स एक्टिविटी एरिया, लॉस्ट एंड फाउंड सेंटर, टूरिस्ट इन्फॉर्मेशन सेंटर तथा शिकायत निवारण कक्ष भी विकसित किए जाएंगे।
एक साथ 26 बसों की होगी बोर्डिंग
नए बस टर्मिनल में एक समय में 26 बसों के लिए बोर्डिंग बे बनाए जाएंगे। इसके अलावा 4 अलाइटिंग बे यानी यात्रियों को उतारने के लिए अलग प्लेटफॉर्म और 4 आइडल पार्किंग बे भी विकसित किए जाएंगे। यानी एकसाथ यात्री इतनी बसों में उतर और चढ़ सकेंगे। बसों की आवाजाही को इस प्रकार डिजाइन किया जाएगा कि यात्रियों और वाहनों की आवाजाही में किसी प्रकार का टकराव न हो और पूरा परिसर सुरक्षित एवं सुगम बना रहे।
इलेक्ट्रिक बसों के लिए भी होगी पूरी तैयारी :
परियोजना में ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को अनिवार्य किया गया है। कम से कम 40 प्रतिशत बोर्डिंग बे पर इलेक्ट्रिक बसों के लिए चार्जिंग सुविधा विकसित की जाएगी। संचालन केंद्र, कंट्रोल रूम, ड्राइवर विश्राम कक्ष, स्टाफ सुविधाएं, डिपो और वर्कशॉप भी विकसित किए जाएंगे। आसपास ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए निजी कारों, दोपहिया वाहनों, ऑटो रिक्शा, प्रीपेड ऑटो और ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं के लिए अलग-अलग पार्किंग एवं पिक-अप-ड्रॉप जोन विकसित किए जाएंगे। मल्टीलेवल पार्किंग की भी व्यवस्था होगी।
पर्यावरण संरक्षण : नई परियोजना को पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, सोलर पावर प्लांट, फायर फाइटिंग सिस्टम, इलेक्ट्रिक सब-स्टेशन, आधुनिक कम्युनिकेशन नेटवर्क और व्यापक लैंडस्केपिंग को अनिवार्य रूप से शामिल किया गया है।
ऐसे होगी निजी कंपनी की कमाई :
637 करोड़ रुपये का निवेश करने वाली कंपनी को आय के कई स्रोत उपलब्ध होंगे। सबसे बड़ी कमाई कॉमर्शियल दुकानों, शोरूम और कार्यालयों के किराए से होगी। इसके अलावा होटल, मल्टीप्लेक्स और फूड कोर्ट से भी नियमित राजस्व प्राप्त होगा। पार्किंग शुल्क, बस एंट्री फीस, नाइट पार्किंग चार्ज, विज्ञापन होर्डिंग, डिजिटल एलईडी स्क्रीन, ब्रांड प्रमोशन स्पेस और विभिन्न लाइसेंस फीस भी कंपनी की आय के प्रमुख स्रोत होंगे।
करनाल। राष्ट्रीय राजमार्ग-44 से जुड़े बलड़ी बाईपास के पास करीब 31 एकड़ जमीन पर 637 करोड़ रुपये की लागत से प्रदेश का सबसे अत्याधुनिक बस टर्मिनल बनाया जाएगा। निजी कंपनी अपने निवेश से पूरे परिसर का निर्माण करेगी और अगले 33 वर्षों तक संचालन की जिम्मेदारी भी उसकी होगी। निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद परियोजना सरकार को हस्तांतरित कर दिया जाएगा। हरियाणा राज्य परिवहन निदेशालय (डीएसटी) ने परियोजना को मंजूरी दे दी है। निविदा जारी कर दी गई है। तीन साल में बस टर्मिनल बनने की संभावना है।
प्रस्तावित बस टर्मिनल का डिजाइन आधुनिकतम रखी जाएगी। टर्मिनल में यात्रियों को एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। परियोजना शहर में निवेश, रोजगार और व्यापारिक गतिविधियों को भी गति देगी। निर्माण चरण में सैकड़ों लोगों को रोजगार मिलेगा। संचालन शुरू होने के बाद होटल, रिटेल, फूड सर्विस, सुरक्षा, रखरखाव और परिवहन क्षेत्रों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। परियोजना कारोबार मॉडल मानी जा रही है। बस अड्डा उत्तर भारत के सबसे आधुनिक ट्रांसपोर्ट हब में शामिल हो सकता है।
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जीएम रोडवेज कुलदीप का कहना है कि परियोजना पीपीपी मोड पर काम करेगी। इसका पूरा काम मुख्यालय की ओर से देखा जा रहा है।
परिसर में मल्टीप्लेक्स भी होगा
बस टर्मिनल कॉमर्शियल हब होगा। परिसर में मॉल, हाई स्ट्रीट शॉपिंग जोन, बजट और कारोबार होटल, मल्टीप्लेक्स, कॉर्पोरेट ऑफिस स्पेस, रेस्तरां, फूड कोर्ट, फार्मेसी, कियोस्क, कैंटीन और जनरल स्टोर विकसित किए जाएंगे। राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित होने के कारण यहां प्रतिदिन हजारों यात्रियों और ग्राहकों की आवाजाही होगी।
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एक साथ 26 बसों की होगी बोर्डिंग
नए बस टर्मिनल में एक समय में 26 बसों के लिए बोर्डिंग बे बनाए जाएंगे। इसके अलावा 4 अलाइटिंग बे यानी यात्रियों को उतारने के लिए अलग प्लेटफॉर्म और 4 आइडल पार्किंग बे भी विकसित किए जाएंगे। यानी एकसाथ यात्री इतनी बसों में उतर और चढ़ सकेंगे। बसों की आवाजाही को इस प्रकार डिजाइन किया जाएगा कि यात्रियों और वाहनों की आवाजाही में किसी प्रकार का टकराव न हो और पूरा परिसर सुरक्षित एवं सुगम बना रहे।
इलेक्ट्रिक बसों के लिए भी होगी पूरी तैयारी :
परियोजना में ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को अनिवार्य किया गया है। कम से कम 40 प्रतिशत बोर्डिंग बे पर इलेक्ट्रिक बसों के लिए चार्जिंग सुविधा विकसित की जाएगी। संचालन केंद्र, कंट्रोल रूम, ड्राइवर विश्राम कक्ष, स्टाफ सुविधाएं, डिपो और वर्कशॉप भी विकसित किए जाएंगे। आसपास ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए निजी कारों, दोपहिया वाहनों, ऑटो रिक्शा, प्रीपेड ऑटो और ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं के लिए अलग-अलग पार्किंग एवं पिक-अप-ड्रॉप जोन विकसित किए जाएंगे। मल्टीलेवल पार्किंग की भी व्यवस्था होगी।
पर्यावरण संरक्षण : नई परियोजना को पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, सोलर पावर प्लांट, फायर फाइटिंग सिस्टम, इलेक्ट्रिक सब-स्टेशन, आधुनिक कम्युनिकेशन नेटवर्क और व्यापक लैंडस्केपिंग को अनिवार्य रूप से शामिल किया गया है।
ऐसे होगी निजी कंपनी की कमाई :
637 करोड़ रुपये का निवेश करने वाली कंपनी को आय के कई स्रोत उपलब्ध होंगे। सबसे बड़ी कमाई कॉमर्शियल दुकानों, शोरूम और कार्यालयों के किराए से होगी। इसके अलावा होटल, मल्टीप्लेक्स और फूड कोर्ट से भी नियमित राजस्व प्राप्त होगा। पार्किंग शुल्क, बस एंट्री फीस, नाइट पार्किंग चार्ज, विज्ञापन होर्डिंग, डिजिटल एलईडी स्क्रीन, ब्रांड प्रमोशन स्पेस और विभिन्न लाइसेंस फीस भी कंपनी की आय के प्रमुख स्रोत होंगे।