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Karnal News: जलघर बना बीमारी का घर, गंदगी-काई निथार कर पिला रहे पानी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 11 Jan 2026 03:04 AM IST
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The water tank has become a breeding ground for disease, and people are drinking water after removing the dirt and algae.
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- विभाग का दावा- साल में दो बार कराई जाती है सफाई, पानी की गुणवत्ता में कम नहीं
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नंबर गेम
- 803 ट्यूबवेल से जिले में हो रही पानी की आपूर्ति।
- 180 ट्यूबवेल करनाल शहर में लगाए गए हैं।
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। असंध क्षेत्र में पीने के पानी की आपूर्ति को लेकर चौंकाने वाली स्थिति सामने आई है। माइनर से भरने वाले इस पांच एमएलडी जलघर में लंबे समय से गंदगी और काई जमी है। इसके बावजूद इसी जलघर के पानी को निथार कर क्षेत्र के करीब आठ हजार घरों को पिलाया जा रहा है। जलघर की सफाई और नियमित रखरखाव न होने से पानी की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जलघर का पानी देखने में ही दूषित नजर आता है लेकिन मजबूरी में वही पानी इस्तेमाल करना पड़ रहा है। जबकि जनस्वास्थ्य विभाग का दावा है कि पानी को बिल्कुल साफ और बैक्टीरिया मुक्त करने के बाद घरों में सप्लाई किया जाता है। पानी को सप्लाई करने से पहले चेक किया जाता है। इसके नमूने लिए जाते हैं। बिल्कुल शुद्ध और गुणवत्ता के पैमाने पर खरा उतरने के बाद ही पानी को सप्लाई किया जाता है।
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असंध के दलबीर, कुलविंद्र, बबलू, रविंद्र, पंकज का आरोप है कि जलघर की समय पर सफाई नहीं की जाती। काई और गंदगी हटाने के नाम पर केवल ऊपर ही निथारने की कार्रवाई कर दी जाती है, जबकि अंदर जमा गंदा पानी पूरी तरह साफ नहीं किया जाता। इससे बैक्टीरिया और अन्य हानिकारक तत्व पानी में बने रहते हैं, जो सीधे लोगों की सेहत से खिलवाड़ है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक दूषित पानी से डायरिया, पीलिया, टाइफाइड और पेट के संक्रमण जैसी बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। लोगों ने मांग की है कि जलघर की नियमित सफाई, पानी की लैब में जांच, और जर्जर पाइपलाइनों को तत्काल बदलने की ठोस योजना बनाई जाए।
पानी में मिलाया जाता है क्लोरीन

विभाग जेई रविंद्र धीमान बताते हैं कि इस जलघर में कैनाल से पानी आता है। यहां पांच एमएलडी का स्टोरेज टैंक है। यहां कई प्रकार से पानी को निथारने का काम किया जाता है। इससे रोजाना चार एमएलडी पानी सप्लाई होता है। सबसे पहले पानी को साफ किया जाता है। इसमें क्लोरीन मिलाया जाता है। इसके बाद पानी के सेंपल लेकर चेक कराए जाते हैं। साल में एक बार इस टैंक की सफाई कराई जाती है जबकि दो बार स्टोरेज टैंक की सफाई होती है। नदी से आने वाले इस पानी की सभी अशुद्धियां निकाली जाती हैं। इसके बाद ही पानी सप्लाई किया जाता है। जिले के ग्रामीण क्षेत्र में पीने के पानी की आपूर्ति का बड़ा बोझ ट्यूबवेलों पर है। करीब 803 ट्यूबवेलों से गांवों में पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। शहरी क्षेत्र की बात करें तो करीब 180 ट्यूबवेल शहर की आबादी को पीने का पानी सप्लाई कर रहे हैं। अधिकारियों का दावा है कि जिले का भूजल गुणवत्ता के लिहाज से ठीक है लेकिन असली समस्या सप्लाई सिस्टम में सामने आ रही है।
करनाल में जर्जर लाइन बनी परेशानी
अगर करनाल शहर की बात करें तो यहां सबसे गंभीर चिंता पुरानी और जर्जर पाइपलाइनों को लेकर है। कई इलाकों में चार दशक पुरानी पाइपलाइनें जमीन के नीचे बिछी हैं, जिनके पास से सीवर लाइनें गुजरती हैं। जगह-जगह लीकेज होने के कारण सीवर का गंदा पानी पीने के पानी में मिक्स हो रहा है। यही वजह है कि कई कॉलोनियों और गांवों में पानी से बदबू आने, रंग बदलने और पेट संबंधी बीमारियों की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।
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