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बजट : नारी शक्ति को नई उड़ान, शिक्षा और उद्यमिता के जरिये महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा
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कुरुक्षेत्र। सेक्टर-13 स्थित दुकान में महिला को उपहार दिखाती संचालक सुमन। संवाद
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कुरुक्षेत्र। केंद्र सरकार के बजट 2026-27 में महिलाओं को केवल लाभार्थी नहीं बल्कि शिक्षा, रोजगार और उद्यमिता की साझेदार बनाने का प्रयास दिखता है। नारी शक्ति को केंद्र में रखते हुए गर्ल्स हॉस्टल, शी-मार्ट्स, लखपति दीदी योजना का विस्तार, क्रेच सुविधा, कौशल विकास और टैक्स राहत जैसे प्रावधान किए गए हैं।
बजट महिलाओं के लिए अवसरों का नया रास्ता खोलता है। शिक्षा में सुरक्षा, उद्यमिता में प्लेटफॉर्म, स्वास्थ्य में निवेश और कामकाजी जीवन में सहूलियत। महिलाओं का कहना है कि यदि योजनाओं पर समय और सही तरीके से कार्य किया गया, तो यह बजट सचमुच नारी शक्ति को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा।
हॉस्टल से मिलेगी सुविधा
छात्रा दीक्षा ने बताया कि मैं छोटे शहर से हूं और पढ़ाई के लिए बाहर आई हूं। सबसे बड़ी परेशानी सुरक्षित रहने की जगह ढूंढने की होती है। हर जिले में सरकारी गर्ल्स हॉस्टल बनने से माता-पिता निश्चिंत होंगे। देर तक लाइब्रेरी में रुकने की चिंता भी कम होगी। उम्मीद है कि हॉस्टल समय पर बनें और उनकी गुणवत्ता अच्छी हो।
कारोबार का सपना अब पास लगा
गृहणी कुलवंत कौर ने बताया कि मैं घर पर अचार और मसाले बनाती हूं लेकिन बेचने के लिए स्थायी जगह नहीं थी। शी-मार्ट्स की घोषणा सुनकर पहली बार लगा कि सरकार हमें सिर्फ मदद नहीं पहचान भी देना चाहती है। अगर हमारे जैसे छोटे उत्पादों को एक ब्रांडेड प्लेटफॉर्म मिला तो आमदनी बढ़ेगी। नुकसान बस यही है कि जानकारी और ट्रेनिंग समय पर मिले, नहीं तो योजनाएं कागजों तक सीमित रह जाती हैं।
संसाधन बढ़ेंगे तो सेवा की गुणवत्ता भी बेहतर होगी
नर्सिंग ऑफिसर मोनिका जोहर ने बताया कि मिशन इंद्रधनुष और पोषण कार्यक्रमों के लिए बजट बढ़ना बेहद जरूरी था। इससे मां और बच्चे दोनों की सेहत सुधरेगी। जमीनी स्तर पर काम करने वालों के लिए संसाधन बढ़ेंगे तो सेवा की गुणवत्ता भी बेहतर होगी। हालांकि स्टाफ की कमी और कार्यभार चुनौतियां हैं। उम्मीद है कि बजट के साथ-साथ नियुक्तियों पर भी ध्यान दिया जाएगा।
लखपति दीदी अब एंटरप्राइज की ओर
स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिला पिंकी ने बताया कि लखपति दीदी योजना से मेरी आय बढ़ी है लेकिन अब सरकार का फोकस एंटरप्राइज पर है, यह सबसे अच्छी बात है। सिर्फ लोन देने से आगे बढ़कर तकनीकी और वित्तीय मदद मिलेगी तो हम छोटा कारखाना भी शुरू कर सकते हैं। डर है कि कागजी प्रक्रिया जटिल न हो। अगर प्रशिक्षण सरल भाषा में और स्थानीय स्तर पर मिला, तो गांव की महिलाएं आत्मनिर्भर बनने में तेजी से आगे बढ़ेंगी।
काम और परिवार में संतुलन बनाना होगा आसान
सीमा शर्मा ने बताया कि 12 लाख तक टैक्स छूट से मेरी बचत बढ़ेगी और भविष्य के लिए निवेश आसान होगा। औद्योगिक क्षेत्रों के पास क्रेच सुविधा बढ़ना भी राहत की बात है। काम और परिवार में संतुलन बनाना आसान होगा। कौशल विकास में एआई और डिजिटल मार्केटिंग जैसे कोर्स समय की मांग हैं। ये कोर्स किफायती और आसानी से उपलब्ध हों, ताकि ज्यादा महिलाएं इसका लाभ ले सकें। कर की दर में कोई बदलाव न होने से रसोई की रोजमर्रा की वस्तुओं के लिए वही जद्दोजहद करनी होगी।
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हॉस्टल से मिलेगी सुविधा
छात्रा दीक्षा ने बताया कि मैं छोटे शहर से हूं और पढ़ाई के लिए बाहर आई हूं। सबसे बड़ी परेशानी सुरक्षित रहने की जगह ढूंढने की होती है। हर जिले में सरकारी गर्ल्स हॉस्टल बनने से माता-पिता निश्चिंत होंगे। देर तक लाइब्रेरी में रुकने की चिंता भी कम होगी। उम्मीद है कि हॉस्टल समय पर बनें और उनकी गुणवत्ता अच्छी हो।
कारोबार का सपना अब पास लगा
गृहणी कुलवंत कौर ने बताया कि मैं घर पर अचार और मसाले बनाती हूं लेकिन बेचने के लिए स्थायी जगह नहीं थी। शी-मार्ट्स की घोषणा सुनकर पहली बार लगा कि सरकार हमें सिर्फ मदद नहीं पहचान भी देना चाहती है। अगर हमारे जैसे छोटे उत्पादों को एक ब्रांडेड प्लेटफॉर्म मिला तो आमदनी बढ़ेगी। नुकसान बस यही है कि जानकारी और ट्रेनिंग समय पर मिले, नहीं तो योजनाएं कागजों तक सीमित रह जाती हैं।
संसाधन बढ़ेंगे तो सेवा की गुणवत्ता भी बेहतर होगी
नर्सिंग ऑफिसर मोनिका जोहर ने बताया कि मिशन इंद्रधनुष और पोषण कार्यक्रमों के लिए बजट बढ़ना बेहद जरूरी था। इससे मां और बच्चे दोनों की सेहत सुधरेगी। जमीनी स्तर पर काम करने वालों के लिए संसाधन बढ़ेंगे तो सेवा की गुणवत्ता भी बेहतर होगी। हालांकि स्टाफ की कमी और कार्यभार चुनौतियां हैं। उम्मीद है कि बजट के साथ-साथ नियुक्तियों पर भी ध्यान दिया जाएगा।
लखपति दीदी अब एंटरप्राइज की ओर
स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिला पिंकी ने बताया कि लखपति दीदी योजना से मेरी आय बढ़ी है लेकिन अब सरकार का फोकस एंटरप्राइज पर है, यह सबसे अच्छी बात है। सिर्फ लोन देने से आगे बढ़कर तकनीकी और वित्तीय मदद मिलेगी तो हम छोटा कारखाना भी शुरू कर सकते हैं। डर है कि कागजी प्रक्रिया जटिल न हो। अगर प्रशिक्षण सरल भाषा में और स्थानीय स्तर पर मिला, तो गांव की महिलाएं आत्मनिर्भर बनने में तेजी से आगे बढ़ेंगी।
काम और परिवार में संतुलन बनाना होगा आसान
सीमा शर्मा ने बताया कि 12 लाख तक टैक्स छूट से मेरी बचत बढ़ेगी और भविष्य के लिए निवेश आसान होगा। औद्योगिक क्षेत्रों के पास क्रेच सुविधा बढ़ना भी राहत की बात है। काम और परिवार में संतुलन बनाना आसान होगा। कौशल विकास में एआई और डिजिटल मार्केटिंग जैसे कोर्स समय की मांग हैं। ये कोर्स किफायती और आसानी से उपलब्ध हों, ताकि ज्यादा महिलाएं इसका लाभ ले सकें। कर की दर में कोई बदलाव न होने से रसोई की रोजमर्रा की वस्तुओं के लिए वही जद्दोजहद करनी होगी।

कुरुक्षेत्र। सेक्टर-13 स्थित दुकान में महिला को उपहार दिखाती संचालक सुमन। संवाद

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