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Kurukshetra News: आयुष विवि के कौमारभृत्य विभाग के अध्यक्ष निलंबित
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कुरुक्षेत्र। श्री कृष्ण आयुष विवि की कार्यकारी परिषद की 20वीं बैठक हुई, जिसमें आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान के कौमारभृत्य (बाल रोग) विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. शंभू दयाल शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का निर्णय लिया गया। क्रिया शरीर विभाग के प्रोफेसर डॉ. पीसी मंगल के विरुद्ध जांच रिपोर्ट के आधार पर उनके व्यक्तिगत सेवा अभिलेख में प्रविष्टि सहित चेतावनी जारी करने का निर्णय लिया गया।
विश्वविद्यालय की ओर से जारी की गई जानकारी के मुताबिक बैठक में डॉ. शंभू दयाल शर्मा के विरुद्ध गठित अनुशासनात्मक जांच समिति की रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा की गई। कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने परिषद को बताया कि गत वर्ष आठ मार्च को आयोजित क्षमता निर्माण (कैपेसिटी बिल्डिंग) कार्यक्रम के लिए सभी विभागाध्यक्षों एवं संबंधित शिक्षकों को पूर्व में जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं, इसके साथ ही स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि कोई भी अधिकारी या शिक्षक पूर्व अनुमति के बिना मुख्यालय नहीं छोड़ेगा। इसके बावजूद डॉ. शर्मा ने अवहेलना करते हुए कार्यक्रम में भाग नहीं लिया और बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ दिया।
डॉ. शंभू दयाल शर्मा को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया गया था लेकिन उनके स्पष्टीकरण के बाद भी मामले की विभागीय जांच कराई गई। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त एक प्रोफेसर को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया। जांच रिपोर्ट में पाया गया कि डॉ. शंभू दयाल ने जानबूझकर वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश की अवहेलना की, जो हरियाणा सिविल सेवा नियम, 2016 के प्रावधानों का उल्लंघन है।
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जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि डॉ. शंभू दयाल ने बिना पूर्व अनुमति अवकाश लेकर अनिवार्य सरकारी कार्यक्रम से अनुपस्थित रहकर कर्तव्य का उल्लंघन किया। साथ ही उनके द्वारा कुलपति के विरुद्ध लगाए गए निराधार आरोपों को भी विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को प्रभावित करने वाला आचरण माना गया।
समिति ने इसे भी हरियाणा सिविल सेवा नियम, 2016 के नियम-5 के अंतर्गत मिसकंडक्ट की श्रेणी में माना। बैठक में यह भी बताया गया कि डॉ. शंभू दयाल शर्मा के विरुद्ध यह तीसरा अनुशासनहीनता का मामला है। बैठक में क्रिया शरीर विभाग के प्रोफेसर डॉ. पीसी मंगल के विरुद्ध जारी आरोप-पत्र पर उनके स्पष्टीकरण एवं जांच रिपोर्ट पर भी विचार किया गया।
(आयुष विवि ने एक साल के लिए बढ़ाया परीक्षा नियंत्रक का कार्यकाल- खबर-पेज 4)
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विश्वविद्यालय की ओर से जारी की गई जानकारी के मुताबिक बैठक में डॉ. शंभू दयाल शर्मा के विरुद्ध गठित अनुशासनात्मक जांच समिति की रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा की गई। कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने परिषद को बताया कि गत वर्ष आठ मार्च को आयोजित क्षमता निर्माण (कैपेसिटी बिल्डिंग) कार्यक्रम के लिए सभी विभागाध्यक्षों एवं संबंधित शिक्षकों को पूर्व में जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं, इसके साथ ही स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि कोई भी अधिकारी या शिक्षक पूर्व अनुमति के बिना मुख्यालय नहीं छोड़ेगा। इसके बावजूद डॉ. शर्मा ने अवहेलना करते हुए कार्यक्रम में भाग नहीं लिया और बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ दिया।
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डॉ. शंभू दयाल शर्मा को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया गया था लेकिन उनके स्पष्टीकरण के बाद भी मामले की विभागीय जांच कराई गई। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त एक प्रोफेसर को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया। जांच रिपोर्ट में पाया गया कि डॉ. शंभू दयाल ने जानबूझकर वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश की अवहेलना की, जो हरियाणा सिविल सेवा नियम, 2016 के प्रावधानों का उल्लंघन है।
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जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि डॉ. शंभू दयाल ने बिना पूर्व अनुमति अवकाश लेकर अनिवार्य सरकारी कार्यक्रम से अनुपस्थित रहकर कर्तव्य का उल्लंघन किया। साथ ही उनके द्वारा कुलपति के विरुद्ध लगाए गए निराधार आरोपों को भी विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को प्रभावित करने वाला आचरण माना गया।
समिति ने इसे भी हरियाणा सिविल सेवा नियम, 2016 के नियम-5 के अंतर्गत मिसकंडक्ट की श्रेणी में माना। बैठक में यह भी बताया गया कि डॉ. शंभू दयाल शर्मा के विरुद्ध यह तीसरा अनुशासनहीनता का मामला है। बैठक में क्रिया शरीर विभाग के प्रोफेसर डॉ. पीसी मंगल के विरुद्ध जारी आरोप-पत्र पर उनके स्पष्टीकरण एवं जांच रिपोर्ट पर भी विचार किया गया।
(आयुष विवि ने एक साल के लिए बढ़ाया परीक्षा नियंत्रक का कार्यकाल- खबर-पेज 4)