{"_id":"69923b940b3c16c10d0a6ee9","slug":"devotees-performed-jalabhishek-of-lord-shiva-in-khadalwa-kurukshetra-news-c-245-1-kht1005-145121-2026-02-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kurukshetra News: खडालवा में श्रद्धालुओं ने किया भगवान शिव का जलाभिषेक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kurukshetra News: खडालवा में श्रद्धालुओं ने किया भगवान शिव का जलाभिषेक
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Mon, 16 Feb 2026 03:03 AM IST
विज्ञापन
15केएलटी1: खडालवा स्थित खटवांगेश्वर मंदिर में जलाभिषेक के लिए लगी लंबी लाइनें
विज्ञापन
कलायत। कस्बे के निकटवर्ती गांव खडालवा में महा शिवरात्रि पर्व धूमधाम से मनाया गया। त्रयोदशी रात्रि 12 बजे महंत रघुनाथ गिरी ने पूरे विधि विधान के साथ बाबा का जलाभिषेक किया। उसके बाद हरिद्वार से आई कांवड़ों के चढ़ाने का सिलसिला शुरू हो गया। सुबह चार बजे से श्रद्धालुओं ने भोले बाबा का जलाभिषेक शुरू कर दिया जो सायं 5 बजे तक जारी रहा। खडालवा शिव मंदिर के महंत रघुनाथ गिरी व प्रबंध समिति अध्यक्ष मास्टर बलबीर ने बताया दिन भर में करीब 60 हजार श्रद्धालुओं ने बाबा का जलाभिषेक किया।
मास्टर बलबीर ने बताया की यह मंदिर अलौकिक होने के साथ साथ बाबा का जीवंत स्थान है। इसी स्थान पर पहली बार महामृत्युंजय महामंत्र की रचना महर्षि मारकंडेय ने की थी। उन्होंने बताया कि महर्षि मारकंडेय का जन्म छह किलोमीटर की दूरी पर बसे गांव मटौर में हुआ था। अल्पायु के प्रभाव से मुक्ति पाने के लिए मारकंडेय इसी स्थान पर महामृत्युंजय महामंत्र का जाप करते हुए खटवांगेश्वर महादेव से लिपटे थे। जिसके कारण से यम के दूत भी विवश होकर वापस चले गए।
-- -- -- --
बेचिराग नगरी के नाम से विख्यात गांव खडालवा में स्थापित इस शिवलिंग का सीधा संबंध पाताल लोक से माना जाता है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन भी किया गया था जहां श्रद्धालु प्रसाद का आनंद ले रहे थे। मंदिर के पास ही जंगम जोगी शिव की महिमा का गुणगान करने में लगे हुए थे। मंदिर में कानून व्यवस्था बनाए रखने तथा मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को पंक्तिबद्ध करने के लिए मुख्य द्वार के अलावा अनेक स्थानों पर पुलिस बल तैनात था। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो इसके लिए प्रबंध समिति द्वारा विशेष प्रबंध किए गए थे। मंदिर में पूजा अर्चना करने के बाद मंदिर के बाहर ही सजी दुकानों से श्रद्धालुओं द्वारा जमकर खरीददारी भी की जा रही थी।
15केएलटी1: खडालवा स्थित खटवांगेश्वर मंदिर में जलाभिषेक के लिए लगी लंबी लाइनें
15केएलटी2: खडालवा में भोले बाबा का जलाभिषेक करते श्रद्धालु
15केएलटी3: मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की जमा भीड़
Trending Videos
मास्टर बलबीर ने बताया की यह मंदिर अलौकिक होने के साथ साथ बाबा का जीवंत स्थान है। इसी स्थान पर पहली बार महामृत्युंजय महामंत्र की रचना महर्षि मारकंडेय ने की थी। उन्होंने बताया कि महर्षि मारकंडेय का जन्म छह किलोमीटर की दूरी पर बसे गांव मटौर में हुआ था। अल्पायु के प्रभाव से मुक्ति पाने के लिए मारकंडेय इसी स्थान पर महामृत्युंजय महामंत्र का जाप करते हुए खटवांगेश्वर महादेव से लिपटे थे। जिसके कारण से यम के दूत भी विवश होकर वापस चले गए।
विज्ञापन
विज्ञापन
बेचिराग नगरी के नाम से विख्यात गांव खडालवा में स्थापित इस शिवलिंग का सीधा संबंध पाताल लोक से माना जाता है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन भी किया गया था जहां श्रद्धालु प्रसाद का आनंद ले रहे थे। मंदिर के पास ही जंगम जोगी शिव की महिमा का गुणगान करने में लगे हुए थे। मंदिर में कानून व्यवस्था बनाए रखने तथा मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को पंक्तिबद्ध करने के लिए मुख्य द्वार के अलावा अनेक स्थानों पर पुलिस बल तैनात था। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो इसके लिए प्रबंध समिति द्वारा विशेष प्रबंध किए गए थे। मंदिर में पूजा अर्चना करने के बाद मंदिर के बाहर ही सजी दुकानों से श्रद्धालुओं द्वारा जमकर खरीददारी भी की जा रही थी।
15केएलटी1: खडालवा स्थित खटवांगेश्वर मंदिर में जलाभिषेक के लिए लगी लंबी लाइनें
15केएलटी2: खडालवा में भोले बाबा का जलाभिषेक करते श्रद्धालु
15केएलटी3: मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की जमा भीड़

15केएलटी1: खडालवा स्थित खटवांगेश्वर मंदिर में जलाभिषेक के लिए लगी लंबी लाइनें