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Kurukshetra News: विश्व शांति व ब्रह्मज्ञान के संदेश के साथ निकली मंगल कलश यात्रा, 1100 सौभाग्यवती महिलाओं ने उठाए कलश
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कुरुक्षेत्र। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की आयोजित सात दिवसीय श्रीकृष्ण कथा का शुभारंभ 16 फरवरी से होने जा रहा है। यह भव्य आध्यात्मिक आयोजन हुड्डा ग्राउंड, नज़दीक सेक्टर 10 मार्किट में 16 से 22 फरवरी तक प्रतिदिन सायं छह बजे से रात नौ बजे तक होगा।
श्रद्धालु इस अनुष्ठान के माध्यम से जगद्गुरु भगवान श्रीकृष्ण जी के दिव्य चरित्र, आदर्श जीवन एवं लीलाओं का आध्यात्मिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से साक्षात्कार कर सकेंगे। कथा का वाचन दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के संस्थापक एवं संचालक आशुतोष महाराज की शिष्या व कथा व्यास साध्वी कालिंदी भारती अपनी संत मंडली सहित करेंगी।
कथा के उपलक्ष्य में रविवार को जिले में मंगल कलश यात्रा का आयोजन हुआ। यात्रा का शुभारंभ भारत सेवाश्रम संघ, रेलवे रोड़ से हुआ, जिसे उमा सुधा पूर्व चेयरपर्सन नगर परिषद् व डॉ.सूची समिता प्रोफेसर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने ध्वज फहराकर एवं नारियल फोड़कर यात्रा का शुभारंभ कराया।
कलश यात्रा के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए स्वामी गुरु ज्ञानानंद ने कहा कि शास्त्रों में कलश को देवताओं का आसन माना गया है। यह मानव मस्तिष्क में स्थित दिव्य अमृत—आध्यात्मिक चेतना—का प्रतीक है। आम के पत्तों का कलश में स्थापित होना उसकी सतत हरियाली और फलप्रदता का द्योतक है, ठीक वैसे ही जैसे प्रभु कथा सदैव कल्याणकारी है और मानवता को मोक्षमार्ग का फल प्रदान करती है।
स्वामी ने कहा कि श्रीकृष्ण कथा आदर्श जीवन का मार्गदर्शन करती है और जीवन में सौंदर्य, शांति और दिव्यता का संचार करती है। यात्रा में 1100 सौभाग्यवती महिलाएं, पीतांबर परिधान धारण कर कलश सिर पर लिए, पूरे नगर में भगवान श्रीकृष्ण का संदेश प्रसारित करती रहीं।
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श्रद्धालु इस अनुष्ठान के माध्यम से जगद्गुरु भगवान श्रीकृष्ण जी के दिव्य चरित्र, आदर्श जीवन एवं लीलाओं का आध्यात्मिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से साक्षात्कार कर सकेंगे। कथा का वाचन दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के संस्थापक एवं संचालक आशुतोष महाराज की शिष्या व कथा व्यास साध्वी कालिंदी भारती अपनी संत मंडली सहित करेंगी।
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कथा के उपलक्ष्य में रविवार को जिले में मंगल कलश यात्रा का आयोजन हुआ। यात्रा का शुभारंभ भारत सेवाश्रम संघ, रेलवे रोड़ से हुआ, जिसे उमा सुधा पूर्व चेयरपर्सन नगर परिषद् व डॉ.सूची समिता प्रोफेसर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने ध्वज फहराकर एवं नारियल फोड़कर यात्रा का शुभारंभ कराया।
कलश यात्रा के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए स्वामी गुरु ज्ञानानंद ने कहा कि शास्त्रों में कलश को देवताओं का आसन माना गया है। यह मानव मस्तिष्क में स्थित दिव्य अमृत—आध्यात्मिक चेतना—का प्रतीक है। आम के पत्तों का कलश में स्थापित होना उसकी सतत हरियाली और फलप्रदता का द्योतक है, ठीक वैसे ही जैसे प्रभु कथा सदैव कल्याणकारी है और मानवता को मोक्षमार्ग का फल प्रदान करती है।
स्वामी ने कहा कि श्रीकृष्ण कथा आदर्श जीवन का मार्गदर्शन करती है और जीवन में सौंदर्य, शांति और दिव्यता का संचार करती है। यात्रा में 1100 सौभाग्यवती महिलाएं, पीतांबर परिधान धारण कर कलश सिर पर लिए, पूरे नगर में भगवान श्रीकृष्ण का संदेश प्रसारित करती रहीं।