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Kurukshetra News: कानूनी पेंच में फंसा कर्मचारियों का वेतन
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र/शाहाबाद। मीरी-पीरी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर के कर्मचारियों और चिकित्सकों का चार माह से बकाया वेतन वीरवार को भी जारी नहीं हो सका। कानूनी पेंच से कर्मचारियों की चिंता बढ़ रही है। एचएसजीएमसी ने प्रबंधन संभालने के बाद जून का वेतन जारी करने का एलान किया था।
एचएसजीएमसी ने 27 जुलाई को ड्यूटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में संस्थान का कार्यभार संभाला था। उसी शाम पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की डबल बेंच ने वर्ष 2024 में गठित डॉक्टर बोर्ड पर स्थगन आदेश दिया। आदेश ऑनलाइन अपलोड होने में देरी से कानूनी व्याख्याओं पर विवाद गहरा गया। एचएसजीएमसी का दावा है कि स्थगन आदेश केवल डॉक्टर बोर्ड तक सीमित है, प्रबंधन पर इसका असर नहीं पड़ता।
वहीं एसजीपीसी पक्ष के अधिवक्ता लवलेश मेहता का कहना है कि अदालत के आदेश का सीधा असर प्रबंधन पर है। उनके अनुसार, एचएसजीएमसी संस्थान का संचालन नहीं कर सकती। संस्थान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी संदीप इंद्र सिंह चीमा ने कहा कि उन्होंने एचएसजीएमसी को औपचारिक कार्यभार नहीं दिया। वह इसके लिए अधिकृत नहीं हैं और चार्ज हस्तांतरण संबंधी किसी दस्तावेज पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं।
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12 मई को हाईकोर्ट का फैसला एचएसजीएमसी के पक्ष में आया था। जगदीश सिंह झींडा ने प्रबंधन संभालने का प्रस्ताव पारित किया। तब एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी और ट्रस्टी बलदेव सिंह कैमपुर ने आपत्ति न होने की बात कही थी। उन्होंने डबल बेंच या सुप्रीम कोर्ट न जाने का आश्वासन दिया था। हालांकि, मामला पुनः डबल बेंच में पहुंचा और 27 जुलाई को स्थगन आदेश जारी हो गया था।
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कुरुक्षेत्र/शाहाबाद। मीरी-पीरी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर के कर्मचारियों और चिकित्सकों का चार माह से बकाया वेतन वीरवार को भी जारी नहीं हो सका। कानूनी पेंच से कर्मचारियों की चिंता बढ़ रही है। एचएसजीएमसी ने प्रबंधन संभालने के बाद जून का वेतन जारी करने का एलान किया था।
एचएसजीएमसी ने 27 जुलाई को ड्यूटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में संस्थान का कार्यभार संभाला था। उसी शाम पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की डबल बेंच ने वर्ष 2024 में गठित डॉक्टर बोर्ड पर स्थगन आदेश दिया। आदेश ऑनलाइन अपलोड होने में देरी से कानूनी व्याख्याओं पर विवाद गहरा गया। एचएसजीएमसी का दावा है कि स्थगन आदेश केवल डॉक्टर बोर्ड तक सीमित है, प्रबंधन पर इसका असर नहीं पड़ता।
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वहीं एसजीपीसी पक्ष के अधिवक्ता लवलेश मेहता का कहना है कि अदालत के आदेश का सीधा असर प्रबंधन पर है। उनके अनुसार, एचएसजीएमसी संस्थान का संचालन नहीं कर सकती। संस्थान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी संदीप इंद्र सिंह चीमा ने कहा कि उन्होंने एचएसजीएमसी को औपचारिक कार्यभार नहीं दिया। वह इसके लिए अधिकृत नहीं हैं और चार्ज हस्तांतरण संबंधी किसी दस्तावेज पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं।
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12 मई को हाईकोर्ट का फैसला एचएसजीएमसी के पक्ष में आया था। जगदीश सिंह झींडा ने प्रबंधन संभालने का प्रस्ताव पारित किया। तब एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी और ट्रस्टी बलदेव सिंह कैमपुर ने आपत्ति न होने की बात कही थी। उन्होंने डबल बेंच या सुप्रीम कोर्ट न जाने का आश्वासन दिया था। हालांकि, मामला पुनः डबल बेंच में पहुंचा और 27 जुलाई को स्थगन आदेश जारी हो गया था।