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Kurukshetra News: भावनात्मक नियंत्रण के चिकित्सीय प्रतीक हैं हनुमान
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कुरुक्षेत्र। विवेकानंद स्कूल के प्राचार्य विक्रम शर्मा।
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कुरुक्षेत्र। मनोचिकित्सक डॉ. नरेंद्र परूथी ने कहा कि मन को एकाग्र करके शक्ति को बढ़ाया जा सकता है। इससे कार्याें पर सकारात्मक असर पड़ेगा।
एकाग्रता से किसी भी बड़े और सार्थक लक्ष्य को आसानी से हासिल किया जा सकता है। इसलिए मन को साधने और बुद्धि को सही मार्ग पर केंद्रित करने की शिक्षा हनुमान जी से लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हनुमान जी ने मन को जीत लिया था। सभी इंद्रियां उनके वश में थी। वे किसी भी स्थिति में भटकते नहीं थे।
आजकल के हालातों में यह और भी जरूरी है कि हनुमान जी के गुणों का अनुसरण किया जाए। ब्रह्मचर्य और नशा आदि व्यसनों से दूर रहकर लक्ष्य तक पहुंचना चाहिए।
नई पीढ़ी भटकती जा रही है। मन पर काबू नहीं रख पाती। दुर्गुण भी शीघ्र हावी होते हैं। हालातों के आगे कमजोर नहीं बल्कि शांत और स्थिर रहकर दोगुनी ताकत से आगे बढ़ने की कोशिश करनी चाहिए।
हनुमान जी की शक्ति मुख्यतः मानसिक दृढ़ता, भावनात्मक नियंत्रण और अहंकार के एकीकरण के लिए एक चिकित्सीय प्रतीक के रूप में कार्य करती है। हनुमान परिपूर्ण मन का प्रतिनिधित्व करते हैं।
एक ऐसा मन, जो अत्यंत शक्तिशाली होते हुए भी उच्च उद्देश्य (धर्म) के प्रति पूर्णतः समर्पित होता है। खास बात यह है कि मनुष्य के मन पर अनियंत्रित इंद्रिय इच्छाओं की अराजकता कम होती है।
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एकाग्रता से किसी भी बड़े और सार्थक लक्ष्य को आसानी से हासिल किया जा सकता है। इसलिए मन को साधने और बुद्धि को सही मार्ग पर केंद्रित करने की शिक्षा हनुमान जी से लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हनुमान जी ने मन को जीत लिया था। सभी इंद्रियां उनके वश में थी। वे किसी भी स्थिति में भटकते नहीं थे।
आजकल के हालातों में यह और भी जरूरी है कि हनुमान जी के गुणों का अनुसरण किया जाए। ब्रह्मचर्य और नशा आदि व्यसनों से दूर रहकर लक्ष्य तक पहुंचना चाहिए।
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नई पीढ़ी भटकती जा रही है। मन पर काबू नहीं रख पाती। दुर्गुण भी शीघ्र हावी होते हैं। हालातों के आगे कमजोर नहीं बल्कि शांत और स्थिर रहकर दोगुनी ताकत से आगे बढ़ने की कोशिश करनी चाहिए।
हनुमान जी की शक्ति मुख्यतः मानसिक दृढ़ता, भावनात्मक नियंत्रण और अहंकार के एकीकरण के लिए एक चिकित्सीय प्रतीक के रूप में कार्य करती है। हनुमान परिपूर्ण मन का प्रतिनिधित्व करते हैं।
एक ऐसा मन, जो अत्यंत शक्तिशाली होते हुए भी उच्च उद्देश्य (धर्म) के प्रति पूर्णतः समर्पित होता है। खास बात यह है कि मनुष्य के मन पर अनियंत्रित इंद्रिय इच्छाओं की अराजकता कम होती है।