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Kurukshetra News: हेपेटाइटिस जागरूकता सप्ताह शुरू, समय पर जांच और बचाव पर रहेगा जोर
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कुरुक्षेत्र। जिले में रविवार से हेपेटाइटिस जागरूकता सप्ताह का आरंभ हो गया है। स्वास्थ्य विभाग सप्ताहभर लोगों को हेपेटाइटिस के लक्षण, बचाव, जांच और उपचार के प्रति जागरूक करेगा। 28 जुलाई को वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे मनाया जाएगा।
यह अभियान जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में चलेगा। पोस्टर, पंपलेट और स्वास्थ्य वार्ताओं के माध्यम से जागरूकता फैलाई जा रही है। विभाग ने जरूरतमंदों की जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। हेपेटाइटिस कार्यक्रम के नोडल अधिकारी गौरव चावला ने बताया कि वायरल हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई प्रकार का होता है। हेपेटाइटिस ए और ई दूषित भोजन व पानी से फैलते हैं। हेपेटाइटिस-बी और सी संक्रमित रक्त, सुई, असुरक्षित यौन संबंध तथा संक्रमणयुक्त उपकरणों से फैल सकते हैं। उन्होंने झोलाछाप चिकित्सकों से इलाज न कराने और बिना संक्रमणमुक्त किए गए उपकरणों के उपयोग से बचने की सलाह दी।
मरीजों की स्थिति और बचाव
जिले में वर्तमान में हेपेटाइटिस-बी के करीब 250 और हेपेटाइटिस-सी के करीब 200 मरीज उपचाराधीन हैं। हेपेटाइटिस-बी से बचाव के लिए प्रभावी टीका उपलब्ध है। हेपेटाइटिस-सी का समय पर उपचार संभव है। किसी भी ऑपरेशन, रक्तदान, रक्त चढ़ाने और गर्भावस्था के दौरान हेपेटाइटिस-बी और सी की जांच कराना जरूरी है। जिला कार्यक्रम प्रभारी प्रदीप ने लोगों से समय पर जांच कराने और हेपेटाइटिस-बी का टीकाकरण अवश्य करवाने की अपील की।
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एड्स के टेस्ट के साथ बी और सी का टेस्ट अनिवार्य किया : डॉ. चावला
डॉ. गौरव चावला ने बताया कि सरकार ने अब बी और सी को गंभीरता से लेना शुरू कर दिया है, इसके लिए सरकार ने अब एड्स, गर्भवती महिला, खून आदि देने से पहले यह टेस्ट अनिवार्य कर दिया है।
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यह अभियान जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में चलेगा। पोस्टर, पंपलेट और स्वास्थ्य वार्ताओं के माध्यम से जागरूकता फैलाई जा रही है। विभाग ने जरूरतमंदों की जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। हेपेटाइटिस कार्यक्रम के नोडल अधिकारी गौरव चावला ने बताया कि वायरल हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई प्रकार का होता है। हेपेटाइटिस ए और ई दूषित भोजन व पानी से फैलते हैं। हेपेटाइटिस-बी और सी संक्रमित रक्त, सुई, असुरक्षित यौन संबंध तथा संक्रमणयुक्त उपकरणों से फैल सकते हैं। उन्होंने झोलाछाप चिकित्सकों से इलाज न कराने और बिना संक्रमणमुक्त किए गए उपकरणों के उपयोग से बचने की सलाह दी।
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मरीजों की स्थिति और बचाव
जिले में वर्तमान में हेपेटाइटिस-बी के करीब 250 और हेपेटाइटिस-सी के करीब 200 मरीज उपचाराधीन हैं। हेपेटाइटिस-बी से बचाव के लिए प्रभावी टीका उपलब्ध है। हेपेटाइटिस-सी का समय पर उपचार संभव है। किसी भी ऑपरेशन, रक्तदान, रक्त चढ़ाने और गर्भावस्था के दौरान हेपेटाइटिस-बी और सी की जांच कराना जरूरी है। जिला कार्यक्रम प्रभारी प्रदीप ने लोगों से समय पर जांच कराने और हेपेटाइटिस-बी का टीकाकरण अवश्य करवाने की अपील की।
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एड्स के टेस्ट के साथ बी और सी का टेस्ट अनिवार्य किया : डॉ. चावला
डॉ. गौरव चावला ने बताया कि सरकार ने अब बी और सी को गंभीरता से लेना शुरू कर दिया है, इसके लिए सरकार ने अब एड्स, गर्भवती महिला, खून आदि देने से पहले यह टेस्ट अनिवार्य कर दिया है।