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जैसे चुंबक का क्षेत्र, वैसे ही विचारों का भी आभामंडल : राजयोगी संतोष
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कुरुक्षेत्र। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय माउंट आबू की शिपिंग एवियशन एंड टूरिज्म विंग के अभियान के अंतर्गत ज्ञान अमृत मासिक पत्रिका के सह-संपादक राजयोगी बीके संतोष कुरुक्षेत्र स्थित विश्व शांति धाम सेवा केंद्र पहुंचे। यहां पर उन्होंने जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखने की सलाह दी। इस दौरान उन्होंने सकारात्मक सोच की शक्ति को समझाया। उन्होंने कहा कि जैसे विचारों की तरंगें पांचों तत्वों में फैलकर वातावरण को प्रभावित करती हैं। वैसे ही सकारात्मक संकल्प जीवन की दिशा बदल सकता है। जैसे चुंबक का अपना चुंबकीय क्षेत्र होता है, वैसे ही विचार भी शक्तिशाली आभामंडल का निर्माण करते हैं।
केंद्र की प्रभारी बीके सरोज ने कहा कि अनुभवी राजयोगी आत्माओं का सान्निध्य समाज में आध्यात्मिक जागृति और सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बनता है। मुख्य वक्ता राजयोगी बीके संतोष ने वरिष्ठ राजयोगी प्रवक्ता एवं आध्यात्मिक लेखक जगदीश की 25वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। उन्होंने तपस्वी और सेवामय जीवन को स्मरण किया। उन्होंने कहा कि जगदीश केवल एक महान वक्ता या लेखक ही नहीं, त्याग, सादगी और अनुशासन की साकार प्रतिमूर्ति थे। ब्रह्माकुमारीज का अधिकांश आध्यात्मिक साहित्य उनके अथक परिश्रम और लेखनी का परिणाम है।
बीके संतोष ने कहा कि खुशी बाहरी वस्तुओं और परिस्थितियों पर आधारित होती है, इसलिए वह अस्थायी है, जबकि आनंद आत्मा की आंतरिक स्थिति है, जो केवल राजयोग के अभ्यास से प्राप्त होता है। जब मनुष्य स्वयं से जुड़ता है और अंतरात्मा की आवाज सुनता है, तभी वास्तविक शांति और आनंद का अनुभव करता है। हर परिस्थिति में सकारात्मक और श्रेष्ठ चिंतन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। प्रतिदिन सुबह उठते ही और रात को सोने से पूर्व “मैं श्रेष्ठ आत्मा हूं, मैं भाग्यशाली हूं, मैं महान हूं” जैसे श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास करें। इससे आत्मविश्वास बढ़ने के साथ मन शक्तिशाली बनता है और जीवन खुशियों से भर जाता है। सकारात्मक गीतों पर योगयुक्त एक्सरसाइज कराई गई। एक मिनट मौन रख दिवंगत जगदीश को श्रद्धांजलि अर्पित की। बीके राधा, बीके लता, बीके पुष्पा, बीके प्रियंका तथा बीके डॉ. आरडी शर्मा ने अतिथियों को सम्मानित किया। इस मौके पर बीके मेघा, बीके मनसा, मुंबई से बीके प्रशांति तथा अंबाला से बीके शैली इत्यादि भी मौजूद रहे।
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केंद्र की प्रभारी बीके सरोज ने कहा कि अनुभवी राजयोगी आत्माओं का सान्निध्य समाज में आध्यात्मिक जागृति और सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बनता है। मुख्य वक्ता राजयोगी बीके संतोष ने वरिष्ठ राजयोगी प्रवक्ता एवं आध्यात्मिक लेखक जगदीश की 25वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। उन्होंने तपस्वी और सेवामय जीवन को स्मरण किया। उन्होंने कहा कि जगदीश केवल एक महान वक्ता या लेखक ही नहीं, त्याग, सादगी और अनुशासन की साकार प्रतिमूर्ति थे। ब्रह्माकुमारीज का अधिकांश आध्यात्मिक साहित्य उनके अथक परिश्रम और लेखनी का परिणाम है।
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बीके संतोष ने कहा कि खुशी बाहरी वस्तुओं और परिस्थितियों पर आधारित होती है, इसलिए वह अस्थायी है, जबकि आनंद आत्मा की आंतरिक स्थिति है, जो केवल राजयोग के अभ्यास से प्राप्त होता है। जब मनुष्य स्वयं से जुड़ता है और अंतरात्मा की आवाज सुनता है, तभी वास्तविक शांति और आनंद का अनुभव करता है। हर परिस्थिति में सकारात्मक और श्रेष्ठ चिंतन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। प्रतिदिन सुबह उठते ही और रात को सोने से पूर्व “मैं श्रेष्ठ आत्मा हूं, मैं भाग्यशाली हूं, मैं महान हूं” जैसे श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास करें। इससे आत्मविश्वास बढ़ने के साथ मन शक्तिशाली बनता है और जीवन खुशियों से भर जाता है। सकारात्मक गीतों पर योगयुक्त एक्सरसाइज कराई गई। एक मिनट मौन रख दिवंगत जगदीश को श्रद्धांजलि अर्पित की। बीके राधा, बीके लता, बीके पुष्पा, बीके प्रियंका तथा बीके डॉ. आरडी शर्मा ने अतिथियों को सम्मानित किया। इस मौके पर बीके मेघा, बीके मनसा, मुंबई से बीके प्रशांति तथा अंबाला से बीके शैली इत्यादि भी मौजूद रहे।