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मारकंडा का रौद्र रूप: कठवा, तंगौर और कलसाना में घरों में पानी, ढाई हजार एकड़ फसल तबाह; रातों-रात जलमग्न गलियां
Sun, 12 Jul 2026 03:41 PM IST
Sharukh Khan
अमर उजाला नेटवर्क, कुरुक्षेत्र
अमर उजाला नेटवर्क, कुरुक्षेत्र
Published by: Sharukh Khan
Updated Sun, 12 Jul 2026 03:41 PM IST
सार
कुरुक्षेत्र के शाहाबाद के कई गांवों में मारकंडा नदी ने रौद्र रूप अपनाया। कठवा, तंगौर और कलसाना में पानी घरों तक पहुंच गया है। ढाई हजार एकड़ फसल तबाह हो गई है। रातों-रात गलियां जलमग्न हो गईं। साथ ही पीने के पानी तक का संकट हो गया है।
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उफान पर मारकंडा
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
मारकंडा नदी का बढ़ता जलस्तर एक बार फिर कुरुक्षेत्र के शाहाबाद क्षेत्र के गांव कठवा, तंगौर, कलसाना और मुगलमाजरा गांव के लिए आफत बनकर टूट पड़ा। शुक्रवार की शाम मारकंडा नदी में 14294 क्यूसेक के करीब पानी दर्ज किया गया था।
शनिवार सुबह नदी का पानी गांवों में घुस गया। देखते ही देखते गलियां तालाब में बदल गईं, कई घरों में पानी भर गया और खेत पूरी तरह जलमग्न हो गए। सबसे बड़ा नुकसान किसानों को हुआ, जहां करीब ढाई हजार एकड़ में लगी धान की फसल और ताजा रोपाई बाढ़ की भेंट चढ़ गई।
हर वर्ष बाढ़ की त्रासदी झेलने वाले इन गांवों के ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और सरकार केवल निरीक्षण और घोषणाओं तक सीमित है, जबकि स्थायी समाधान आज तक नहीं किया गया। लोगों का आरोप है कि हर बरसात में वही तस्वीर दोहराई जाती है और किसान अपनी मेहनत डूबते हुए देखने को मजबूर हो जाते हैं।
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सुबह आंख खुली तो गांव बन चुका था नदी
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शनिवार सुबह नदी का पानी गांवों में घुस गया। देखते ही देखते गलियां तालाब में बदल गईं, कई घरों में पानी भर गया और खेत पूरी तरह जलमग्न हो गए। सबसे बड़ा नुकसान किसानों को हुआ, जहां करीब ढाई हजार एकड़ में लगी धान की फसल और ताजा रोपाई बाढ़ की भेंट चढ़ गई।
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हर वर्ष बाढ़ की त्रासदी झेलने वाले इन गांवों के ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और सरकार केवल निरीक्षण और घोषणाओं तक सीमित है, जबकि स्थायी समाधान आज तक नहीं किया गया। लोगों का आरोप है कि हर बरसात में वही तस्वीर दोहराई जाती है और किसान अपनी मेहनत डूबते हुए देखने को मजबूर हो जाते हैं।
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सुबह आंख खुली तो गांव बन चुका था नदी
सबसे पहले कठवा गांव में पानी ने दस्तक दी। सुबह ग्रामीण जब घरों से बाहर निकले तो मुख्य सड़क नदी का रूप ले चुकी थी। खेत-खलिहान पूरी तरह पानी में डूब चुके थे। लोगों को रोजमर्रा के कामों के लिए कमर तक पानी से होकर गुजरना पड़ा।
पूर्व सरपंच व अधिवक्ता अमरिंदर सिंह ने कहा कि पिछले वर्ष मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विपक्षी नेताओं ने गांव का दौरा कर बड़े-बड़े आश्वासन दिए थे लेकिन एक साल बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। उनका कहना है कि जब तक मारकंडा पर स्थायी परियोजना नहीं बनेगी तब तक हर साल इसी तरह की तबाही होती रहेगी।
कठवा में गहरे पानी में बंद हुई बाइक
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
घरों में घुसा पानी, पीने के पानी तक का संकट
कलसाना गांव में हालात और भी खराब रहे। सुबह नौ बजे तक गांव की गलियां और आबादी वाला क्षेत्र पानी में डूब चुका था। लोगों ने घरों के बाहर मिट्टी के कट्टे लगाकर पानी रोकने की कोशिश की लेकिन पानी घरों के अंदर पहुंच गया।
कलसाना गांव में हालात और भी खराब रहे। सुबह नौ बजे तक गांव की गलियां और आबादी वाला क्षेत्र पानी में डूब चुका था। लोगों ने घरों के बाहर मिट्टी के कट्टे लगाकर पानी रोकने की कोशिश की लेकिन पानी घरों के अंदर पहुंच गया।
ग्रामीणों ने बताया कि बाढ़ के साथ अब पीने के पानी का भी संकट पैदा हो गया है। जलापूर्ति दूषित होने के कारण लोगों को दूसरे गांवों से पीने का पानी लाना पड़ रहा है। महिलाओं और बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
किसानों की महीनों की मेहनत हुई बर्बाद
बाढ़ का सबसे बड़ा असर खेती पर पड़ा है। कठवा, तंगौर, कलसाना, मुगल माजरा सहित आसपास के गांवों में करीब ढाई हजार एकड़ से अधिक धान की फसल पानी में डूब गई। किसानों का कहना है कि कुछ दिन पहले ही धान की पौध रोपी गई थी और अब पूरी फसल खराब होने की आशंका है।
बाढ़ का सबसे बड़ा असर खेती पर पड़ा है। कठवा, तंगौर, कलसाना, मुगल माजरा सहित आसपास के गांवों में करीब ढाई हजार एकड़ से अधिक धान की फसल पानी में डूब गई। किसानों का कहना है कि कुछ दिन पहले ही धान की पौध रोपी गई थी और अब पूरी फसल खराब होने की आशंका है।
तंगौर के किसान यादविंदर सिंह राणा ने बताया कि अकेले उनके गांव की करीब 1,700 एकड़ धान की फसल जलमग्न हो गई। यदि दोबारा जलस्तर बढ़ा तो गांव की आबादी भी खतरे में आ सकती है।
उफान पर मारकंडा
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बांध बना विवाद की वजह
कलसाना में पानी भरने के बाद ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन द्वारा बनाए गए अस्थायी बांध के कारण पानी का दबाव उनके गांव की ओर बढ़ गया। गुस्साए ग्रामीणों ने बांध में कट लगाने की कोशिश की लेकिन मदनपुर और मोहनपुर के ग्रामीणों ने इसका विरोध किया। दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और पुलिस को मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालनी पड़ी।
कलसाना में पानी भरने के बाद ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन द्वारा बनाए गए अस्थायी बांध के कारण पानी का दबाव उनके गांव की ओर बढ़ गया। गुस्साए ग्रामीणों ने बांध में कट लगाने की कोशिश की लेकिन मदनपुर और मोहनपुर के ग्रामीणों ने इसका विरोध किया। दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और पुलिस को मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालनी पड़ी।
प्रशासन सतर्क पर ग्रामीण पूछ रहे, हर साल यही हाल क्यों
एसडीएम शंभू राठी ने प्रभावित गांवों का दौरा कर हालात का जायजा लिया और राहत कार्य शुरू कराने के निर्देश दिए। प्रशासन ने गांवों से पानी निकालने का काम शुरू कर दिया है। उधर उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने बताया कि मुलाना में शुक्रवार को मारकंडा में 40 हजार क्यूसेक पानी दर्ज किया गया था और शनिवार को जलस्तर में कमी आई है। कलसाना में पानी तालाब की निकासी वाले पाइप से बैक फ्लो होने के कारण घुसा था, जिसे रोक दिया गया है। प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है और सभी अधिकारी अलर्ट पर हैं।
एसडीएम शंभू राठी ने प्रभावित गांवों का दौरा कर हालात का जायजा लिया और राहत कार्य शुरू कराने के निर्देश दिए। प्रशासन ने गांवों से पानी निकालने का काम शुरू कर दिया है। उधर उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने बताया कि मुलाना में शुक्रवार को मारकंडा में 40 हजार क्यूसेक पानी दर्ज किया गया था और शनिवार को जलस्तर में कमी आई है। कलसाना में पानी तालाब की निकासी वाले पाइप से बैक फ्लो होने के कारण घुसा था, जिसे रोक दिया गया है। प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है और सभी अधिकारी अलर्ट पर हैं।
खतरा अभी टला नहीं, पहाड़ों में बारिश जारी
शनिवार शाम नदी का पानी घटकर लगभग पांच हजार क्यूसेक रह गया लेकिन मौसम विभाग के अनुसार यदि पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश जारी रही तो मारकंडा में दोबारा पानी बढ़ सकता है। ऐसे में प्रभावित गांवों के लोगों की चिंता अभी भी बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि राहत और मुआवजे से ज्यादा जरूरत स्थायी समाधान की है। जब तक मारकंडा की बाढ़ रोकने के लिए दीर्घकालिक योजना पर अमल नहीं होता, तब तक हर मानसून किसानों की फसल, लोगों के घर और उनकी उम्मीदें इसी तरह पानी में डूबती रहेंगी।
शनिवार शाम नदी का पानी घटकर लगभग पांच हजार क्यूसेक रह गया लेकिन मौसम विभाग के अनुसार यदि पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश जारी रही तो मारकंडा में दोबारा पानी बढ़ सकता है। ऐसे में प्रभावित गांवों के लोगों की चिंता अभी भी बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि राहत और मुआवजे से ज्यादा जरूरत स्थायी समाधान की है। जब तक मारकंडा की बाढ़ रोकने के लिए दीर्घकालिक योजना पर अमल नहीं होता, तब तक हर मानसून किसानों की फसल, लोगों के घर और उनकी उम्मीदें इसी तरह पानी में डूबती रहेंगी।