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Kurukshetra News: जहां रिद्धि और सिद्धि होती है वहां निवास करते हैं भगवान गणेश
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कुरुक्षेत्र। श्री शिव महापुराण कथा में हिस्सा लेती महिला श्रद्धालु। स्वयं
- फोटो : अमर उजाला
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कुरुक्षेत्र। अमीन रोड स्थित पटियाला बैंक कॉलोनी के मनोकामना सिद्ध श्री शिव मंदिर के वार्षिकोत्सव के उपलक्ष्य में करवाई जा रही श्री शिव महापुराण कथा में कथाव्यास आचार्य रमेश उनियाल (हरिद्वार) ने गणेश विवाह प्रसंग भजनों सहित विस्तार से सुनाया।
कथा में पुजारी पंडित उमेश पाठक ने सुबह यजमानों से शिव पूजन करवाकर कथा सहयोगियों का सम्मान किया। व्यासपीठ से आचार्य रमेश उनियाल ने गणेश विवाह प्रसंग में बताया कि भगवान गणेश का विवाह रिद्धि और सिद्धि (बुद्धि और समृद्धि) से हुआ था। गणेश जी के गजानन रूप के कारण विवाह में आ रही बाधाओं, तुलसी के श्राप और मूषकराज की ओर से देवताओं के विवाह में विघ्न डालने के बाद ब्रह्मा जी की मध्यस्थता से यह विवाह संपन्न हुआ। गणेश जी ने पहले विवाह न करने का निश्चय किया था।
जब कार्तिकेय और अन्य देवताओं का विवाह हो रहा था, तो गणेश जी गजानन रूप के कारण शादी करने में असमर्थ थे। इस बात से नाराज होकर उन्होंने मूषकराज के माध्यम से अन्य देवताओं के विवाह में विघ्न डालना शुरू कर दिया। एक बार गणेश जी ने तुलसी जी के विवाह प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था जिसके क्रोध में तुलसी ने उन्हें विवाह करने का श्राप दे दिया। जब गणेश जी के विवाह के कारण देवताओं के कार्य रुक गए तब ब्रह्मा जी ने अपनी दो मानस पुत्रियों रिद्धि और सिद्धि को शिक्षा प्राप्त करने के लिए गणेश जी के पास भेजा।
गणेश जी रिद्धि (बुद्धि) और सिद्धि (समृद्धि) को शिक्षा देने लगे। जब भी कोई देवता विवाह के लिए जाते तो रिद्धि-सिद्धि उनका ध्यान भटका देती थीं। अंततः ब्रह्मा जी ने नारद मुनि की सलाह पर गणेश जी का विवाह रिद्धि और सिद्धि से कराया। गणेश जी की इन दो पत्नियों से उन्हें शुभ और लाभ नामक दो पुत्र प्राप्त हुए। गणेश विवाह का प्रसंग यह दर्शाता है कि जहां रिद्धि (समृद्धि) और सिद्धि (सफलता) होती है, वहां भगवान गणेश (बुद्धि) निवास करते हैं। विवाह में सर्वप्रथम गणेश जी की पूजा की जाती है ताकि कार्य में कोई विघ्न न आए।
इस अवसर पर आचार्य द्वारिका प्रसाद मिश्र, सौरभ शास्त्री, उज्जवल शर्मा और सौर्यांश तिवारी, मुख्य यजमान विनोद सिंगला, बीएन शर्मा, सुनील सिंगला, दर्शन पुरी और महिंदर खन्ना सहित पटियाला बैंक कॉलोनीवासी शामिल रहे।
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कथा में पुजारी पंडित उमेश पाठक ने सुबह यजमानों से शिव पूजन करवाकर कथा सहयोगियों का सम्मान किया। व्यासपीठ से आचार्य रमेश उनियाल ने गणेश विवाह प्रसंग में बताया कि भगवान गणेश का विवाह रिद्धि और सिद्धि (बुद्धि और समृद्धि) से हुआ था। गणेश जी के गजानन रूप के कारण विवाह में आ रही बाधाओं, तुलसी के श्राप और मूषकराज की ओर से देवताओं के विवाह में विघ्न डालने के बाद ब्रह्मा जी की मध्यस्थता से यह विवाह संपन्न हुआ। गणेश जी ने पहले विवाह न करने का निश्चय किया था।
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जब कार्तिकेय और अन्य देवताओं का विवाह हो रहा था, तो गणेश जी गजानन रूप के कारण शादी करने में असमर्थ थे। इस बात से नाराज होकर उन्होंने मूषकराज के माध्यम से अन्य देवताओं के विवाह में विघ्न डालना शुरू कर दिया। एक बार गणेश जी ने तुलसी जी के विवाह प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था जिसके क्रोध में तुलसी ने उन्हें विवाह करने का श्राप दे दिया। जब गणेश जी के विवाह के कारण देवताओं के कार्य रुक गए तब ब्रह्मा जी ने अपनी दो मानस पुत्रियों रिद्धि और सिद्धि को शिक्षा प्राप्त करने के लिए गणेश जी के पास भेजा।
गणेश जी रिद्धि (बुद्धि) और सिद्धि (समृद्धि) को शिक्षा देने लगे। जब भी कोई देवता विवाह के लिए जाते तो रिद्धि-सिद्धि उनका ध्यान भटका देती थीं। अंततः ब्रह्मा जी ने नारद मुनि की सलाह पर गणेश जी का विवाह रिद्धि और सिद्धि से कराया। गणेश जी की इन दो पत्नियों से उन्हें शुभ और लाभ नामक दो पुत्र प्राप्त हुए। गणेश विवाह का प्रसंग यह दर्शाता है कि जहां रिद्धि (समृद्धि) और सिद्धि (सफलता) होती है, वहां भगवान गणेश (बुद्धि) निवास करते हैं। विवाह में सर्वप्रथम गणेश जी की पूजा की जाती है ताकि कार्य में कोई विघ्न न आए।
इस अवसर पर आचार्य द्वारिका प्रसाद मिश्र, सौरभ शास्त्री, उज्जवल शर्मा और सौर्यांश तिवारी, मुख्य यजमान विनोद सिंगला, बीएन शर्मा, सुनील सिंगला, दर्शन पुरी और महिंदर खन्ना सहित पटियाला बैंक कॉलोनीवासी शामिल रहे।

कुरुक्षेत्र। श्री शिव महापुराण कथा में हिस्सा लेती महिला श्रद्धालु। स्वयं- फोटो : अमर उजाला
