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Kurukshetra News: एनआईटी में ब्रह्माकुमारी ने तनाव मुक्त और संतुलित जीवन पर दिया जोर
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कुरुक्षेत्र। एनआईटी थॉट लैब में आयोजित लाइफ मैनेजमेंट कार्यक्रम में हिस्सा लेते शिक्षक व गैर
- फोटो : अमर उजाला
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कुरुक्षेत्र। एनआईटी में हुई चार आत्महत्याओं और अलग-अलग टीमों की ओर से की गई मैराथन जांच के बाद क्वालिटी लाइफ मैनेजमेंट कार्यक्रम करवाया गया। एनआईटी की थॉट लैब में ब्रह्माकुमारी की ओर से दिल खोलो, जीवन संवारो, सोच बदली तो जीवन बदला और तनाव को ताकत में बदलो जैसे महावाक्यों के साथ शिक्षकों को प्रोत्साहित किया गया।
इस दौरान माउंट आबू मुख्यालय से काउंसलर और हैप्पीनेस कोच डॉ. सचिन परब एनआईटी की थॉट लैब में पहुंचे। डॉ. सचिन परब ने कहा कि व्यक्ति की अधिकांश समस्याओं का मूल कारण बाहरी परिस्थितियां नहीं बल्कि उसके अपने विचार होते हैं। उन्होंने इमोशनल क्लॉट्स की अवधारणा को समझाते हुए बताया कि भावनात्मक अवरोध समय के साथ शारीरिक बीमारियों का रूप ले सकते हैं।
डॉ. परब ने कहा कि यदि आप अपने दिल को भावनात्मक रूप से नहीं खोलेंगे, तो डॉक्टरों को उसे ऑपरेशन थिएटर में खोलना पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि भावनाओं को व्यक्त करना मानसिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है और आंसू तनाव हार्मोन को कम कर मन को हल्का करते हैं।
एनआईटी में चार आत्महत्याओं के बाद पहुंची थीं कई टीमें
एनआईटी में 16 फरवरी, 31 मार्च, 9 अप्रैल और 16 अप्रैल को हुई छात्रों की आत्महत्या के बाद कई दौर की जांच चली थी। इसमें केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के निजी सचिव और उनके साथ दो सदस्यीय टीम पहुंची थी। वहीं महिला आयोग की टीम भी पहुंची थी और मानवाधिकार आयोग की ओर से नोटिस जारी किया गया था जिसका जवाब 19 मई से पहले देना है।
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इस दौरान माउंट आबू मुख्यालय से काउंसलर और हैप्पीनेस कोच डॉ. सचिन परब एनआईटी की थॉट लैब में पहुंचे। डॉ. सचिन परब ने कहा कि व्यक्ति की अधिकांश समस्याओं का मूल कारण बाहरी परिस्थितियां नहीं बल्कि उसके अपने विचार होते हैं। उन्होंने इमोशनल क्लॉट्स की अवधारणा को समझाते हुए बताया कि भावनात्मक अवरोध समय के साथ शारीरिक बीमारियों का रूप ले सकते हैं।
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डॉ. परब ने कहा कि यदि आप अपने दिल को भावनात्मक रूप से नहीं खोलेंगे, तो डॉक्टरों को उसे ऑपरेशन थिएटर में खोलना पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि भावनाओं को व्यक्त करना मानसिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है और आंसू तनाव हार्मोन को कम कर मन को हल्का करते हैं।
एनआईटी में चार आत्महत्याओं के बाद पहुंची थीं कई टीमें
एनआईटी में 16 फरवरी, 31 मार्च, 9 अप्रैल और 16 अप्रैल को हुई छात्रों की आत्महत्या के बाद कई दौर की जांच चली थी। इसमें केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के निजी सचिव और उनके साथ दो सदस्यीय टीम पहुंची थी। वहीं महिला आयोग की टीम भी पहुंची थी और मानवाधिकार आयोग की ओर से नोटिस जारी किया गया था जिसका जवाब 19 मई से पहले देना है।
