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महागौरी पवित्रता और करुणा की अधिष्ठात्री देवी : पीठाध्यक्ष
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कुरुक्षेत्र। मां भद्रकाली के दिव्य दरबार में अष्टम स्वरूप महागौरी की पुष्पों से सजावट। संवाद
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कुरुक्षेत्र। हरियाणा के एकमात्र शक्तिपीठ श्रीदेवीकूप मां भद्रकाली मंदिर में दुर्गाष्टमी के अवसर पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने मां भद्रकाली के दर्शन कर सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की। मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं और जय माता दी के जयघोष से वातावरण गूंज उठा।
पीठाध्यक्ष पंडित सतपाल शर्मा ने बताया कि मां महागौरी को पवित्रता, करुणा और शांति की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। वे भगवान शिव की अर्धांगिनी के रूप में सदा विराजमान रहती हैं और भक्तों को शांति व समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। मुख्य पुजारिन शिमला देवी ने विधिवत पूजा-अर्चना कर मां को नारियल और सफेद पुष्प अर्पित किए।
दुर्गाष्टमी के अवसर पर मंदिर में कन्या पूजन का विशेष आयोजन किया गया। छोटी कन्याओं को त्रिदेवी स्वरूप मानकर उनका पूजन किया गया। श्रद्धालुओं ने उनके चरण धोकर पुष्प अर्पित किए और उन्हें चुनरी, शृंगार सामग्री व उपहार भेंट किए। इसके बाद कन्याओं को हलवा-पूरी, चना और अन्य व्यंजनों का प्रसाद ग्रहण कराया गया।
इस मौके पर स्वामी ज्ञानानंद भी मंदिर पहुंचे और मां के दर्शन कर कन्या पूजन किया। उन्होंने कहा कि नवरात्रों में कंजक पूजन का विशेष महत्व है और इससे आयु, बल, विद्या, धन एवं विजय का आशीर्वाद प्राप्त होता है। पुलिस अधीक्षक चंद्रमोहन ने भी मंदिर पहुंचकर चांदी चरण पूजन किया और धार्मिक चर्चा में भाग लिया। वहीं सुबह मंगला आरती के दौरान मां महागौरी के बीज मंत्रों का जाप किया गया जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
मंदिर में दुर्गाष्टमी पर अन्नपूर्णा भंडारे का आयोजन भी किया गया। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। भंडारा 2 अप्रैल तक निरंतर चलता रहेगा। वहीं गोविंद सिंगला और श्याम सिंगला की ओर से माता रानी को विशेष छप्पन भोग अर्पित किए गए।
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पीठाध्यक्ष पंडित सतपाल शर्मा ने बताया कि मां महागौरी को पवित्रता, करुणा और शांति की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। वे भगवान शिव की अर्धांगिनी के रूप में सदा विराजमान रहती हैं और भक्तों को शांति व समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। मुख्य पुजारिन शिमला देवी ने विधिवत पूजा-अर्चना कर मां को नारियल और सफेद पुष्प अर्पित किए।
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दुर्गाष्टमी के अवसर पर मंदिर में कन्या पूजन का विशेष आयोजन किया गया। छोटी कन्याओं को त्रिदेवी स्वरूप मानकर उनका पूजन किया गया। श्रद्धालुओं ने उनके चरण धोकर पुष्प अर्पित किए और उन्हें चुनरी, शृंगार सामग्री व उपहार भेंट किए। इसके बाद कन्याओं को हलवा-पूरी, चना और अन्य व्यंजनों का प्रसाद ग्रहण कराया गया।
इस मौके पर स्वामी ज्ञानानंद भी मंदिर पहुंचे और मां के दर्शन कर कन्या पूजन किया। उन्होंने कहा कि नवरात्रों में कंजक पूजन का विशेष महत्व है और इससे आयु, बल, विद्या, धन एवं विजय का आशीर्वाद प्राप्त होता है। पुलिस अधीक्षक चंद्रमोहन ने भी मंदिर पहुंचकर चांदी चरण पूजन किया और धार्मिक चर्चा में भाग लिया। वहीं सुबह मंगला आरती के दौरान मां महागौरी के बीज मंत्रों का जाप किया गया जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
मंदिर में दुर्गाष्टमी पर अन्नपूर्णा भंडारे का आयोजन भी किया गया। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। भंडारा 2 अप्रैल तक निरंतर चलता रहेगा। वहीं गोविंद सिंगला और श्याम सिंगला की ओर से माता रानी को विशेष छप्पन भोग अर्पित किए गए।