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मीरी पीरी मेडिकल संस्थान विवाद : ट्रस्ट ने लिया अस्पताल के कर्मियों का एक माह का वेतन जारी करने का फैसला, आठ को धामी पहुंचेंगे

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 07 Aug 2026 02:13 AM IST
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Miri Piri Medical Institute controversy: Trust decides to release one month's salary to hospital staff; Dhami to arrive on the 8th
कुरुक्षेत्र/शाहाबाद। मीरी पीरी मेडिकल संस्थान के प्रबंधन के लिए कानूनी विवाद चल रहा है। इस बीच संस्थान ट्रस्ट ने कर्मचारियों और चिकित्सकों का एक माह का वेतन तत्काल जारी करने का फैसला किया है। इस निर्णय से कर्मचारियों ने राहत की सांस ली है।
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यह निर्णय अमृतसर में हुई बोर्ड की बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता ट्रस्ट अध्यक्ष अधिवक्ता हरजिंदर सिंह धामी ने की। इसके अनुसार, सात अगस्त तक सभी कर्मचारियों के बैंक खातों में वेतन पहुंच जाएगा। संस्थान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी संदीप इंद्र सिंह चीमा ने बताया कि अस्पताल का संचालन मीरी पीरी ट्रस्ट पहले की तरह सुचारु रूप से करता रहेगा। एसजीपीसी के अध्यक्ष और मीरी पीरी अस्पताल के अध्यक्ष अधिवक्ता हरजिंदर सिंह धामी व बोर्ड के अन्य सदस्यों के साथ आठ अगस्त को शाहाबाद पहुंचेंगे। शाहाबाद पहुंचने पर बोर्ड के सदस्य संस्थान की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करेंगे। इस समीक्षा के आधार पर संस्थान के भविष्य के संचालन के लिए महत्वपूर्ण रणनीति पर फैसला लिया जा सकता है। यह निर्णय संस्थान के प्रबंधन को सुचारु बनाने में सहायक होगा।
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27 जुलाई को अदालती आदेश से बदल गई थीं परिस्थितियां
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 12 मई 2026 को अपने फैसले में वर्ष 2024 में गठित डॉक्टरों के बोर्ड पर लगा स्टे हटाते हुए फैसला एचएसजीएमसी के पक्ष में दिया था। हालांकि इसके बाद भी एचएसजीएमसी ने तत्काल संस्थान का संचालन अपने हाथ में नहीं लिया। लंबे इंतजार के बाद 27 जुलाई को ड्यूटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में एचएसजीएमसी ने संस्थान का औपचारिक टेकओवर किया था। इसी दिन शाम को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की डबल बेंच ने वर्ष 2024 में गठित डॉक्टरों के बोर्ड को राहत देते हुए उस पर पहले से जारी अंतरिम स्टे को अगली सुनवाई तक जारी रखने के आदेश दिए, जिसके बाद प्रबंधन को लेकर स्थिति फिर बदल गई।
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हरियाणा कमेटी अभी कानूनी रूप से संचालन नहीं कर सकती : मेहता
एसजीपीसी और ट्रस्ट के अधिवक्ता लवलेश मेहता का कहना है कि हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद अगली सुनवाई तक एचएसजीएमसी कानूनी रूप से संस्थान का संचालन नहीं कर सकती। एसजीपीसी की ओर से हरियाणा कमेटी को कानूनी नोटिस भी भेजा गया है। संस्थान के सीईओ डॉ. संदीप इंद्र सिंह चीमा का कहना है कि एचएसजीएमसी को संस्थान का औपचारिक कार्यभार कभी सौंपा ही नहीं गया। उनके अनुसार किसी भी चार्ज ट्रांसफर दस्तावेज पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं और न ही एचएसजीएमसी को अधिकृत रूप से संचालन सौंपा गया है।


कड़े संघर्ष के बाद राहत की जगी उम्मीद
12 मई के फैसले के बाद संस्थान आर्थिक संकट से जूझने लगा था। कर्मचारियों और चिकित्सकों का वेतन लंबे समय तक लंबित रहने के कारण उन्होंने लगातार 21 दिनों तक धरना दिया। 27 जुलाई को एचएसजीएमसी द्वारा संस्थान का कार्यभार संभालने के बाद जत्थेदार बलजीत सिंह दादूवाल ने कर्मचारियों को शीघ्र वेतन दिलाने का आश्वासन दिया था, जिसके बाद धरना समाप्त कर दिया गया। हालांकि, हाईकोर्ट की डबल बेंच द्वारा वर्ष 2024 में गठित डॉक्टरों के बोर्ड के पक्ष में अंतरिम राहत जारी रहने के आदेश के बाद एचएसजीएमसी स्टाफ का वेतन देने में कानूनी अटकले बताते हुए वेतन प्रक्रिया से पीछे हटने लगा। अब एसजीपीसी से संबद्ध बोर्ड द्वारा एक माह का वेतन जारी करने के फैसले से कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।



दादूवाल बोले- स्टे से संबंधित बोर्ड ही किया जा चुका खत्म
हरियाणा कमेटी के धर्म प्रचार कमेटी के चेयरमैन बलजीत सिंह दादूवाल का कहना है कि मीरी-पीरी कर्मचारियों को एक माह का वेतन देकर एसजीपीसी कोई बड़ा कार्य नहीं कर रही। हरियाणा कमेटी ने 27 जुलाई को विधिवत संस्थान की सेवा संभाली है। ऐसे में उससे पहले का वेतन एसजीपीसी की ही जिम्मेदारी बनती है। जिस डॉक्टरों के बोर्ड को लेकर ट्रस्ट ने स्टे लिया है, उस बोर्ड को एचएसजीएमसी ने खत्म कर दिया है। संस्थान का संचालन सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार हरियाणा कमेटी ही करेगी।
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