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Kurukshetra News: धर्मदेवी नौबहार का मंचन, महिला कलाकारों ने दिखाया हुनर
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कुरुक्षेत्र। कला परिषद की साप्ताहिक संध्या में सांग कलाकार सूरजभान बेदी की टोली ने सांग धर्मदेवी नौबहार का भावपूर्ण मंचन किया। इसका उद्देश्य प्रदेश की लोक संस्कृति और पारंपरिक सांग कला को बढ़ावा देना था। इस मंचन में महिला कलाकारों ने स्वयं महिला पात्रों की भूमिकाएं निभाईं।
यह सांग विधा में एक नया बदलाव था, जो नारी सशक्तीकरण का उदाहरण बना। 48 कोस तीर्थ निगरानी कमेटी के अध्यक्ष रविंद्र सांगवान और जिला परिषद उपाध्यक्ष धर्मपाल चौधरी अतिथि थे। कला परिषद उपाध्यक्ष महेश जोशी ने पौधा भेंट कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने राज्य गीत जय जय हरियाणा को आमजन तक पहुंचाने की अपील की। जोशी ने बताया कि सांग धर्मदेवी नौबहार पारिवारिक मूल्यों, त्याग और बड़प्पन का महत्व सिखाता है। परिषद लुप्त होती पारंपरिक विधाओं को सहेजने का प्रयास कर रही है। मंच संचालन विकास शर्मा ने किया।
राजा वीरसेन और पुत्र नौबहार की मार्मिक कहानी, त्याग और नियति का खेल
कलाकारों ने राजा वीरसेन और उनके पुत्र नौबहार के जीवन चक्र की मार्मिक कहानी प्रस्तुत की। राजा वीरसेन संतान न होने से अपनी रानी के साथ दुखी रहते थे। एक चमत्कारी बाबा ने उन्हें पुत्र प्राप्ति के लिए महायज्ञ करने का परामर्श दिया। यज्ञ के बाद राजा को नौबहार नामक पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। बाबा ने बताया कि बालक की आयु केवल नौ महीने होगी। उन्होंने राजा को पुत्र मोह त्यागकर उसे नदी में बहाने का कड़ा आदेश दिया। राजा ने भारी मन से लोक कल्याण हेतु नौबहार को नदी की तेज धार में त्याग दिया। नियतिवश, दरिया में बहते उस बच्चे को दूसरे प्रदेश के एक राजा ने बचा लिया। उस राजा ने नौबहार का अपने सगे पुत्र की तरह लालन-पालन किया।
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यह सांग विधा में एक नया बदलाव था, जो नारी सशक्तीकरण का उदाहरण बना। 48 कोस तीर्थ निगरानी कमेटी के अध्यक्ष रविंद्र सांगवान और जिला परिषद उपाध्यक्ष धर्मपाल चौधरी अतिथि थे। कला परिषद उपाध्यक्ष महेश जोशी ने पौधा भेंट कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने राज्य गीत जय जय हरियाणा को आमजन तक पहुंचाने की अपील की। जोशी ने बताया कि सांग धर्मदेवी नौबहार पारिवारिक मूल्यों, त्याग और बड़प्पन का महत्व सिखाता है। परिषद लुप्त होती पारंपरिक विधाओं को सहेजने का प्रयास कर रही है। मंच संचालन विकास शर्मा ने किया।
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राजा वीरसेन और पुत्र नौबहार की मार्मिक कहानी, त्याग और नियति का खेल
कलाकारों ने राजा वीरसेन और उनके पुत्र नौबहार के जीवन चक्र की मार्मिक कहानी प्रस्तुत की। राजा वीरसेन संतान न होने से अपनी रानी के साथ दुखी रहते थे। एक चमत्कारी बाबा ने उन्हें पुत्र प्राप्ति के लिए महायज्ञ करने का परामर्श दिया। यज्ञ के बाद राजा को नौबहार नामक पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। बाबा ने बताया कि बालक की आयु केवल नौ महीने होगी। उन्होंने राजा को पुत्र मोह त्यागकर उसे नदी में बहाने का कड़ा आदेश दिया। राजा ने भारी मन से लोक कल्याण हेतु नौबहार को नदी की तेज धार में त्याग दिया। नियतिवश, दरिया में बहते उस बच्चे को दूसरे प्रदेश के एक राजा ने बचा लिया। उस राजा ने नौबहार का अपने सगे पुत्र की तरह लालन-पालन किया।
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