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Kurukshetra News: ब्लैक स्पॉट घोषित ढांड रोड पर लापरवाही भारी, नई सड़क पर सुरक्षा संकेत गायब
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कुरुक्षेत्र। नवनिर्मित ढांड रोड पर सफेद पट्टी लगाना भूला विभाग। संवाद
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कुरुक्षेत्र। जिले की सबसे व्यस्त माने जाने वाली सड़कों में शामिल ढांड रोड को वर्षों से सड़क सुरक्षा कमेटी की ओर से ब्लैक स्पॉट घोषित किया हुआ है। इसके बावजूद हालात में सुधार के बजाय लापरवाही और बढ़ती जा रही है। हाल ही में सड़क का नवनिर्माण तो कर दिया गया लेकिन उस पर आवश्यक सफेद पट्टी नहीं लगाई गई।
नतीजतन पिछले 15 दिनों में यहां 10 से अधिक छोटे-बड़े हादसे हो चुके हैं जिनमें तीन लोगों की जान जा चुकी है और कई घायल हुए हैं। जिले की कई खस्ताहाल सड़कों पर बने गड्ढों के कारण भी पट्टियां गायब हो जाती हैं। मरम्मत के बाद भी इन स्थानों पर दोबारा मार्किंग नहीं की जाती। इससे वाहन चालकों को गड्ढों का अंदाजा नहीं लग पाता।
स्पीड ब्रेकर भी बने खतरा
ढांड रोड पर स्कूलों और भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में बनाए गए स्पीड ब्रेकरों पर भी सफेद पट्टी नहीं है जिससे वे दूर से दिखाई नहीं देते। अचानक ब्रेकर आने पर वाहन चालक संतुलन खो देते हैं। हाल ही में गुरुकुल के पास ऐसे ही एक हादसे में बिना चिन्हित ब्रेकर के कारण आल्टो कार पलटने से कार सवार महिला की मौत हो गई व उसका भाई गंभीर रूप से घायल हो गया था।
इस सड़क पर हो चुके कई हादसे
7 मार्च 2020 में टेरी संस्थान के निकट पिकअप और क्विड कार की भिड़ंत में एक परिवार की चार महिलाओं की मौत हुई थी। कार चालक सचिन और उसकी नन्हीं बच्ची गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे।
- 14 जुलाई 2023 में गांव कमोदा के पीर वाले डेरे के नजदीक हादसे में बाइक पर सवार दो कांवड़ियो की मौके पर मौत हो गई थी जबकि एक कांवड़िये ने पीजीआई चंडीगढ़ ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया था। चार कांवड़िये गंभीर रूप से जख्मी हुए थे।
- 29 सितंबर 2025 को इसी रोड पर पिंडारसी गांव के पास हादसे में यमुनानगर के रहने वाले छह लोगों की मौत हो गई थी।
- 17 वर्षीय युवक हेमंत की इसी रोड पर 24 अप्रैल को हुए हादसे में मौत हो गई जबकि उनका रिश्तेदार गंभीर रूप से घायल हुआ।
सुरक्षा में अहम भूमिका निभाती है पट्टी : चिराग
राहगीर चिराग ने कहा कि यहां सफेद पट्टी न होने के कारण हाल में ही कई हादसे हो गए हैं। सड़क पर बीच की सफेद पट्टी होने से ओवरटेक करते समय चालक सावधानी बरतते हैं जिससे हादसों में कमी आती है। इस सड़क पर संकेतक चिह्न न होने से राहगीरों को समस्या होती है।
दोपहिया चालकों को अधिक परेशानी : अजय ओला
राहगीर अजय ओला ने बताया कि साइड पट्टी न होने से दोपहिया वाहन चालकों को अपनी लेन का अंदाजा नहीं रहता जिससे अव्यवस्था और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है।
हाईवे पर भी ऐसे ही हालात : बबलू
बबलू ने बताया कि जिले से गुजर रहे नेशनल हाइवे 44 पर कई जगह से सफेद व पीली पट्टी गायब हो चुकी है। यह देश का सबसे व्यस्त नेशलन हाईवे में से एक है। प्रशासन ने इस रोड पर जिले में दो से तीन ब्लैक स्पॉट भी घोषित किए हुए हैं। इसके बावजूद ये हालात है तो आप अन्य सड़कों का हाल का अंदाजा लगा ही सकते हो।
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नतीजतन पिछले 15 दिनों में यहां 10 से अधिक छोटे-बड़े हादसे हो चुके हैं जिनमें तीन लोगों की जान जा चुकी है और कई घायल हुए हैं। जिले की कई खस्ताहाल सड़कों पर बने गड्ढों के कारण भी पट्टियां गायब हो जाती हैं। मरम्मत के बाद भी इन स्थानों पर दोबारा मार्किंग नहीं की जाती। इससे वाहन चालकों को गड्ढों का अंदाजा नहीं लग पाता।
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स्पीड ब्रेकर भी बने खतरा
ढांड रोड पर स्कूलों और भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में बनाए गए स्पीड ब्रेकरों पर भी सफेद पट्टी नहीं है जिससे वे दूर से दिखाई नहीं देते। अचानक ब्रेकर आने पर वाहन चालक संतुलन खो देते हैं। हाल ही में गुरुकुल के पास ऐसे ही एक हादसे में बिना चिन्हित ब्रेकर के कारण आल्टो कार पलटने से कार सवार महिला की मौत हो गई व उसका भाई गंभीर रूप से घायल हो गया था।
इस सड़क पर हो चुके कई हादसे
7 मार्च 2020 में टेरी संस्थान के निकट पिकअप और क्विड कार की भिड़ंत में एक परिवार की चार महिलाओं की मौत हुई थी। कार चालक सचिन और उसकी नन्हीं बच्ची गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे।
- 14 जुलाई 2023 में गांव कमोदा के पीर वाले डेरे के नजदीक हादसे में बाइक पर सवार दो कांवड़ियो की मौके पर मौत हो गई थी जबकि एक कांवड़िये ने पीजीआई चंडीगढ़ ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया था। चार कांवड़िये गंभीर रूप से जख्मी हुए थे।
- 29 सितंबर 2025 को इसी रोड पर पिंडारसी गांव के पास हादसे में यमुनानगर के रहने वाले छह लोगों की मौत हो गई थी।
- 17 वर्षीय युवक हेमंत की इसी रोड पर 24 अप्रैल को हुए हादसे में मौत हो गई जबकि उनका रिश्तेदार गंभीर रूप से घायल हुआ।
सुरक्षा में अहम भूमिका निभाती है पट्टी : चिराग
राहगीर चिराग ने कहा कि यहां सफेद पट्टी न होने के कारण हाल में ही कई हादसे हो गए हैं। सड़क पर बीच की सफेद पट्टी होने से ओवरटेक करते समय चालक सावधानी बरतते हैं जिससे हादसों में कमी आती है। इस सड़क पर संकेतक चिह्न न होने से राहगीरों को समस्या होती है।
दोपहिया चालकों को अधिक परेशानी : अजय ओला
राहगीर अजय ओला ने बताया कि साइड पट्टी न होने से दोपहिया वाहन चालकों को अपनी लेन का अंदाजा नहीं रहता जिससे अव्यवस्था और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है।
हाईवे पर भी ऐसे ही हालात : बबलू
बबलू ने बताया कि जिले से गुजर रहे नेशनल हाइवे 44 पर कई जगह से सफेद व पीली पट्टी गायब हो चुकी है। यह देश का सबसे व्यस्त नेशलन हाईवे में से एक है। प्रशासन ने इस रोड पर जिले में दो से तीन ब्लैक स्पॉट भी घोषित किए हुए हैं। इसके बावजूद ये हालात है तो आप अन्य सड़कों का हाल का अंदाजा लगा ही सकते हो।
