लाडवा। बाबा बंसीवाला वृद्धाश्रम व अन्नक्षेत्र में श्रीराम कथा के तीसरे दिन शिव चरित्र का वर्णन किया। कथाव्यास ने मां पार्वती के जन्म, कामदेव के भस्म होने और शिव-पार्वती विवाह की कथा सुनाई।
पंडित अनिल पराशर ने कहा कि राजा दक्ष प्रजापति ने भगवान शंकर का अपमान करने के लिए महायज्ञ का आयोजन किया था। उसने भगवान शिव को निमंत्रण नहीं दिया। पिता की ओर से भगवान शंकर के अपमान पर सती ने हवन कुंड में कूदकर खुद को अग्नि में समर्पित कर दिया। सती ने हिमाचल के राजा के घर पार्वती के रूप में जन्म लेकर घोर तपस्या की और शिव को पति के रूप में पाने का वरदान पाया। शिव और पार्वती के विवाह से जुड़े सभी प्रसंग सुनाते हुए कहा कि शिवजी के गण शृंगार करने में लग गए। जटाओं का मुकुट बनाकर उस पर सांपों का मौर सजाया गया।
शिवजी ने सांपों के ही कुंडल व कंगन पहने, शरीर पर विभूति रमाई और वस्त्र की जगह बाघ की खाल लपेटकर बारात लेकर पहुंचे। शिवजी को इस रूप में देखने के लिए अनेक देवी देवता पहुंचे थे। शिव बरात में ब्रह्मा जी, विष्णु जी सहित समस्त देवतागण शिवगण श्रृंगी, भृगी और भूत प्रेत शामिल हुए। शिव-गौरा का विवाह धूमधाम से संपन्न हुआ। आरती के बाद भक्तों को प्रसाद वितरित किया गया। मुख्य अतिथि प्रदीप गर्ग, अजय सिंगला, मोनिका बंसल, सत्यप्रकाश कंसल, अंशुल गुप्ता ने व्यासपीठ की आरती की। इस अवसर पर पवन गोयल, विकास सिंघल, अनुज गोयल, सुरेश कंसल, मदनलाल गोयल, संजय सिंगला, राजकुमार सैनी और अशोक मित्तल सहित अन्य मौजूद रहे।

लाडवा। बाबा बंसीवाला वृद्धाश्रम में कथा का आनंद लेते श्रद्धालु। संवाद