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Kurukshetra News: एनआईटी में प्रबंधन में कई अहम फेरबदल, डीन एकेडमिक इंचार्ज बने प्रो. ज्ञानभूषण

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 22 Apr 2026 02:28 AM IST
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Several significant management changes have been made at NIT, with Prof. Gyan Bhushan appointed as Dean Academic Incharge.
कुरुक्षेत्र। एनआईटी निदेशक कार्यालय। संवाद
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कुरुक्षेत्र। एनआईटी में लगातार हुई चार मौतों के बाद से केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की टीम तीन दिन तक संस्थान में रही। मंगलवार को जांच टीम व बीओजी चेयरपर्सन तेजस्विनी अन्नंत कुमार के लौटने के साथ ही संस्थान में कई अहम फेरबदल किए गए हैं।
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प्रो. मोहम्मद सिराज को प्रोफेसर इंचार्ज अकाउंट्स बनाया गया, जबकि प्रो. संदीप सिंगल को प्रोफेसर इंचार्ज ऑडिट बनाया गया है। वहीं प्रो. ज्ञान भूषण को डीन एकेडमिक इंचार्ज की जिम्मेदारी सौंपी गई है जो पहले संस्थान के प्रवक्ता के तौर पर काम देख रहे थे। इसके अलावा प्रो. मयंक दबे को डीन फैकल्टी और प्रो. महेश पाल को डीन रिसर्च एंड कंसल्टेंसी नियुक्त किया गया है। हालांकि अब संस्थान के प्रवक्ता का पद अब खाली हो गया है।
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उधर टीम ने मंगलवार को भी पूरे दिन बैठकें की। संस्थान के अधिकारियों, शिक्षकों और गैर-शिक्षकों से संस्थान की बेहतरी के लिए सुझाव मांगे। जहां शिक्षकों ने संवाद बढ़ाने पर जोर दिया, साथ ही संस्थान में कैसे माहौल सौहार्दपूर्ण हो, उसके लिए काम करने और जो तीन कमेटियां गठित हुई हैं, उनको सुचारू रूप से चलाने का सुझाव टीम को सौंपा। कर्मचारी संघ के उपाध्यक्ष विष्णु सोनी ने जांच टीम को सुझाव दिया कि संस्थान की लाइब्रेरी 24 घंटे खुली रहती है। छात्र वहां किसी भी समय पढ़ाई कर सकते हैं, लेकिन यह पूरी तरह से एसी नहीं है। लाइब्रेरी का कुछ हिस्सा ही एसी युक्त है, जिससे वहां पूरी बैठने की व्यवस्था नहीं है। छात्रों को बेहतर सुविधा के लिए ताकि वे ज्यादा समय हॉस्टल के कमरे से बाहर बिता सकें, उसके लिए लाइब्रेरी को पूरा एसी किया जाए।

वहीं संजय मेहता महासचिव कर्मचारी संघ ने बड़ा मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि संस्थान में अभी मात्र एक चिकित्सक है, जो बच्चों की काउंसलिंग करता है, जबकि बच्चे पांच हजार से भी ज्यादा हैं। इसके लिए उन्होंने सुझाव दिया कि यहां मनोचिकित्सक और डॉक्टरों की भी संख्या बढ़ाई जाए।







दोस्ताना माहौल नहीं होगा तब तक समस्या नहीं सुलझेगी : आरके मीणा

गैर-शिक्षक कर्मचारी संघ के अध्यक्ष आरके मीणा ने गंभीरता दिखाते हुए छात्रों के प्रति कई महत्वपूर्ण कदम उठाने को कहा। उन्होंने कहा कि लेक्चर के बाद छात्र पूरी तरीके से खाली हो जाते हैं, सभी को चाहिए कि इनको खेल की तरफ लगाया जाए। संस्थान में हर खेल के इंचार्ज हैं, जिनकी संख्या करीब 12 से 15 है तो उनका दायित्व बढ़ाया जाए। साथ ही शिक्षकों और गैर-शिक्षकों की भी भागीदारी तय कर छात्रों को खेल की तरफ बढ़ाया जाए। शाम का समय बड़ा कीमती होता है, इस दौरान छात्र फोन में व्यस्त रहते हैं, उनको दोस्ताना माहौल देकर छात्रावास से बाहर निकालकर मैदान की तरफ या अन्य एक्टिविटी की तरफ ले जाया जाए।
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