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Mahendragarh-Narnaul News: टीबी जागरूकता एवं जांच शिविर में 75 लोगों की हुई स्क्रीनिंग
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Tue, 09 Jun 2026 11:35 PM IST
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फोटो संख्या:69 गांव मेघनवास में टीबी जागरूकता शिविर संचालित करती टीम। विज्ञप्ति
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कनीना। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम एनटीइपी के तहत गांव मेघनवास में मंगलवार को टीबी जागरूकता एवं जांच शिविर का आयोजन किया गया। इसमें 75 लोगों की स्क्रीनिंग की गई।
शिविर में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी अरुण चौधरी, एमपीएचडब्ल्यू एम ऋषिराज, शर्मिला ने ग्रामीणों को टीबी रोग के लक्षणों और बचाव के उपायों की विस्तृत जानकारी दी।
स्वास्थ्य कर्मियों ने बताया कि लगातार दो सप्ताह से अधिक खांसी रहना, बुखार आना, वजन कम होना, भूख न लगना और रात के समय अधिक पसीना आना टीबी के प्रमुख लक्षण हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र में जांच करवाएं। शिविर के दौरान कुल 75 ग्रामीणों की टीबी स्क्रीनिंग की गई।
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जांच के दौरान संदिग्ध पाए गए 11 लोगों के बलगम के नमूने लेकर प्रयोगशाला जांच के लिए भेजे गए। स्वास्थ्य अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की कि वे टीबी के लक्षणों को नजरअंदाज न करें व नियमित जांच और उपचार करवाएं।
स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि टीबी मुक्त भारत अभियान को सफल बनाने के लिए जनसहभागिता और जागरूकता बेहद जरूरी है। समय पर पहचान और नियमित उपचार से इस बीमारी को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है।
शिविर में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी अरुण चौधरी, एमपीएचडब्ल्यू एम ऋषिराज, शर्मिला ने ग्रामीणों को टीबी रोग के लक्षणों और बचाव के उपायों की विस्तृत जानकारी दी।
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स्वास्थ्य कर्मियों ने बताया कि लगातार दो सप्ताह से अधिक खांसी रहना, बुखार आना, वजन कम होना, भूख न लगना और रात के समय अधिक पसीना आना टीबी के प्रमुख लक्षण हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र में जांच करवाएं। शिविर के दौरान कुल 75 ग्रामीणों की टीबी स्क्रीनिंग की गई।
जांच के दौरान संदिग्ध पाए गए 11 लोगों के बलगम के नमूने लेकर प्रयोगशाला जांच के लिए भेजे गए। स्वास्थ्य अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की कि वे टीबी के लक्षणों को नजरअंदाज न करें व नियमित जांच और उपचार करवाएं।
स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि टीबी मुक्त भारत अभियान को सफल बनाने के लिए जनसहभागिता और जागरूकता बेहद जरूरी है। समय पर पहचान और नियमित उपचार से इस बीमारी को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है।