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Mahendragarh-Narnaul News: बैठक में देरी से पहुंचे डीडीपीओ को स्वास्थ्य मंत्री ने किया सस्पेंड, कहा- दरवाजा पीछे है, बीच में गए बाहर
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Tue, 09 Jun 2026 11:38 PM IST
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फोटो 16बैठक में मौजूद स्वास्थ्य मंत्री व अन्य अधिकारी। स्रोत:प्रशासन
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नारनौल। पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में मंगलवार को आयोजित समीक्षा बैठक में देरी से आने और विकास कार्यों की फाइल तैयार करने में लापरवाही बरतने पर स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने डीडीपीओ प्रमोद कुमार को बैठक से बाहर भेज दिया और उनको सस्पेंड करने का आदेश उपायुक्त को दिया।
समीक्षा बैठक में उपायुक्त सहित सभी अधिकारी समय से पहुंच गए थे। डीडीपीओ प्रमोद कुमार देरी से पहुंचे। उन्होंने जवाब देना शुरू किया तो स्वास्थ्य मंत्री भड़क उठीं। उन्होंने दरवाजा पीछे हैं कहते हुए डीडीपीओ को बाहर निकलने का इशारा किया। इसके बाद डीडीपीओ चले गए।
स्वास्थ्य मंत्री ने जिले के सभी बीडीपीओ से विकास कार्यों के बारे में बारी-बारी से पूछा। इस दौरान कनीना बीडीपीओ को भी एक विकास कार्य को लेकर टेंडर नहीं करने पर फटकार लगाई। स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट कहा कि सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों में किसी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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उधर, प्रेस वार्ता में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि बैठक में पंचायत एवं विकास विभाग से जुड़े करीब साढ़े सात करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की समीक्षा की जानी थी लेकिन डीडीपीओ देरी से पहुंचे। डीडीपीओ ने बैठक में समय पर पहुंचना जरूरी नहीं समझा।
डीडीपीओ प्रमोद कुमार ने बताया कि अभी नहीं पता कि उन्हें सस्पेंड क्यों किया गया है। वह बैठक में करीब पांच मिनट की देरी से पहुंचे थे।
बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में स्वास्थ्य मंत्री ने सरकारी अस्पतालों में दवाइयों की उपलब्धता और मरीजों को बाहर की दवाइयां लिखे जाने के मामलों पर भी नाराजगी जताई।
उन्होंने कहा कि यदि सरकारी स्टाक में दवा उपलब्ध होने के बाद भी कोई चिकित्सक बाहर की दवा लिखता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि पहले चेतावनी देने की व्यवस्था थी लेकिन अब ऐसे मामलों में सीधे चार्जशीट करने के निर्देश दिए गए हैं। मंत्री ने कहा कि मरीजों को सरकारी सुविधाओं का पूरा लाभ मिलना चाहिए और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं होगी।
नर्सिंग स्टाफ की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवा नहीं होने दी जाएगी प्रभावित
नर्सिंग स्टाफ की हड़ताल और हाल ही में सामने आए विवादित प्रकरण पर उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि मामले में पहले ही कार्रवाई की जा चुकी है और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कदम उठाए गए हैं। साथ ही नर्सिंग स्टाफ से बातचीत कर स्थिति सामान्य बनाने का प्रयास किया जाएगा।
सीटी स्कैन और एमआरआई सुविधाएं होंगी जल्द शुरू
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि नारनौल के प्रस्तावित 200 बेड अस्पताल के निर्माण के लिए जल्द टेंडर प्रक्रिया शुरू होने वाली है। इसके अलावा पीपीपी मोड पर सीटी स्कैन और एमआरआई सुविधाएं नारनौल सहित प्रदेश के सिविल अस्पतालों में जल्द शुरू की जाएंगी।
जलनिकासी के दिए गए हैं निर्देश
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि बरसात के मौसम में निर्माणाधीन 200 बेड अस्पताल में जलभराव और डेंगू की आशंका को देखते हुए उन्होंने पीडब्ल्यूडी, जनस्वास्थ्य विभाग और स्वास्थ्य अधिकारियों को विशेष निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कहीं भी पानी जमा नहीं होना चाहिए और जल निकासी की व्यवस्था समय रहते सुनिश्चित की जाए। आयुष्मान भारत योजना के भुगतान संबंधी सवाल पर उन्होंने कहा कि सामान्य रूप से तीन माह की पेंडेंसी रहती है और फंड प्राप्त होते ही अस्पतालों को भुगतान जारी कर दिया जाता है।
समीक्षा बैठक में उपायुक्त सहित सभी अधिकारी समय से पहुंच गए थे। डीडीपीओ प्रमोद कुमार देरी से पहुंचे। उन्होंने जवाब देना शुरू किया तो स्वास्थ्य मंत्री भड़क उठीं। उन्होंने दरवाजा पीछे हैं कहते हुए डीडीपीओ को बाहर निकलने का इशारा किया। इसके बाद डीडीपीओ चले गए।
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स्वास्थ्य मंत्री ने जिले के सभी बीडीपीओ से विकास कार्यों के बारे में बारी-बारी से पूछा। इस दौरान कनीना बीडीपीओ को भी एक विकास कार्य को लेकर टेंडर नहीं करने पर फटकार लगाई। स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट कहा कि सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों में किसी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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उधर, प्रेस वार्ता में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि बैठक में पंचायत एवं विकास विभाग से जुड़े करीब साढ़े सात करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की समीक्षा की जानी थी लेकिन डीडीपीओ देरी से पहुंचे। डीडीपीओ ने बैठक में समय पर पहुंचना जरूरी नहीं समझा।
डीडीपीओ प्रमोद कुमार ने बताया कि अभी नहीं पता कि उन्हें सस्पेंड क्यों किया गया है। वह बैठक में करीब पांच मिनट की देरी से पहुंचे थे।
बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में स्वास्थ्य मंत्री ने सरकारी अस्पतालों में दवाइयों की उपलब्धता और मरीजों को बाहर की दवाइयां लिखे जाने के मामलों पर भी नाराजगी जताई।
उन्होंने कहा कि यदि सरकारी स्टाक में दवा उपलब्ध होने के बाद भी कोई चिकित्सक बाहर की दवा लिखता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि पहले चेतावनी देने की व्यवस्था थी लेकिन अब ऐसे मामलों में सीधे चार्जशीट करने के निर्देश दिए गए हैं। मंत्री ने कहा कि मरीजों को सरकारी सुविधाओं का पूरा लाभ मिलना चाहिए और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं होगी।
नर्सिंग स्टाफ की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवा नहीं होने दी जाएगी प्रभावित
नर्सिंग स्टाफ की हड़ताल और हाल ही में सामने आए विवादित प्रकरण पर उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि मामले में पहले ही कार्रवाई की जा चुकी है और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कदम उठाए गए हैं। साथ ही नर्सिंग स्टाफ से बातचीत कर स्थिति सामान्य बनाने का प्रयास किया जाएगा।
सीटी स्कैन और एमआरआई सुविधाएं होंगी जल्द शुरू
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि नारनौल के प्रस्तावित 200 बेड अस्पताल के निर्माण के लिए जल्द टेंडर प्रक्रिया शुरू होने वाली है। इसके अलावा पीपीपी मोड पर सीटी स्कैन और एमआरआई सुविधाएं नारनौल सहित प्रदेश के सिविल अस्पतालों में जल्द शुरू की जाएंगी।
जलनिकासी के दिए गए हैं निर्देश
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि बरसात के मौसम में निर्माणाधीन 200 बेड अस्पताल में जलभराव और डेंगू की आशंका को देखते हुए उन्होंने पीडब्ल्यूडी, जनस्वास्थ्य विभाग और स्वास्थ्य अधिकारियों को विशेष निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कहीं भी पानी जमा नहीं होना चाहिए और जल निकासी की व्यवस्था समय रहते सुनिश्चित की जाए। आयुष्मान भारत योजना के भुगतान संबंधी सवाल पर उन्होंने कहा कि सामान्य रूप से तीन माह की पेंडेंसी रहती है और फंड प्राप्त होते ही अस्पतालों को भुगतान जारी कर दिया जाता है।