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Mahendragarh-Narnaul News: अपहरण व लूटपाट मामले में आरोपी को मिली जमानत
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नारनौल। अपहरण, शादी के लिए मजबूर करने के लिए अपहरण, गलत तरीके से कैद करने, चोरी व लूटपाट मामले में एडीजे ने आरोपी की जमानत याचिका को मंजूर कर लिया है। साथ ही एडीजे ने एक लाख रुपये का जमानत मुचलका व उतनी ही राशि का एक जमानती पेश करने का आदेश दिया है।
जानकारी के अनुसार आरोपी नांगल सिरोही निवासी सतपाल ने साल 2024 में शियतकर्ता का अपहरण किया था और उसे जबरन कैद में रखकर विवाह करने का दबाव बनाया था।
आरोपी ने शिकायतकर्ता के साथ लूटपाट की वारदात को भी अंजाम दिया था। इसके बाद 16 अप्रैल 2024 को सतनाली थाने में शिकायत दर्ज कराई गई थी। कार्रवाई करते हुए पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया था।
जमानत मिली, फिर खारिज कर दी
16 जनवरी को सतपाल ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 483 के तहत नियमित जमानत के लिए अर्जी लगाई थी। सतपाल को इस मामले में जमानत मिल भी गई थी लेकिन उसकी जमानत रद्द कर दी गई। उसके बॉन्ड जब्त कर लिए गए और उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए थे। वह 16 जनवरी को अदालत में पेश ही नहीं हुआ था।
बचाव पक्ष की दलील
सतपाल के वकील ने तर्क दिया कि उस तारीख पर उसकी गैरहाजिरी जानबूझकर नहीं की गई थी। वह अदालत में इसलिए नहीं आ सका क्योंकि वह एक दूसरे मामले में गिरफ्तार था और जिला जेल में बंद था। वकील ने कहा कि मुकदमे को पूरा होने में अभी लंबा समय लगेगा इसलिए उसे जमानत दी जानी चाहिए। वहीं सरकारी वकील ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोप गंभीर हैं। इस बात की भी आशंका है कि आरोपी दोबारा जमानत पर भाग सकता है। दोनों पक्षों की दलीलों के बाद न्यायाधीश हर्षाली चौधरी ने नियमित जमानत देने का फैसला किया।
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जानकारी के अनुसार आरोपी नांगल सिरोही निवासी सतपाल ने साल 2024 में शियतकर्ता का अपहरण किया था और उसे जबरन कैद में रखकर विवाह करने का दबाव बनाया था।
आरोपी ने शिकायतकर्ता के साथ लूटपाट की वारदात को भी अंजाम दिया था। इसके बाद 16 अप्रैल 2024 को सतनाली थाने में शिकायत दर्ज कराई गई थी। कार्रवाई करते हुए पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया था।
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जमानत मिली, फिर खारिज कर दी
16 जनवरी को सतपाल ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 483 के तहत नियमित जमानत के लिए अर्जी लगाई थी। सतपाल को इस मामले में जमानत मिल भी गई थी लेकिन उसकी जमानत रद्द कर दी गई। उसके बॉन्ड जब्त कर लिए गए और उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए थे। वह 16 जनवरी को अदालत में पेश ही नहीं हुआ था।
बचाव पक्ष की दलील
सतपाल के वकील ने तर्क दिया कि उस तारीख पर उसकी गैरहाजिरी जानबूझकर नहीं की गई थी। वह अदालत में इसलिए नहीं आ सका क्योंकि वह एक दूसरे मामले में गिरफ्तार था और जिला जेल में बंद था। वकील ने कहा कि मुकदमे को पूरा होने में अभी लंबा समय लगेगा इसलिए उसे जमानत दी जानी चाहिए। वहीं सरकारी वकील ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोप गंभीर हैं। इस बात की भी आशंका है कि आरोपी दोबारा जमानत पर भाग सकता है। दोनों पक्षों की दलीलों के बाद न्यायाधीश हर्षाली चौधरी ने नियमित जमानत देने का फैसला किया।
