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Mahendragarh-Narnaul News: 1.18 करोड़ की ठगी मामले में आरोपी की जमानत याचिका खारिज
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नारनौल। एक करोड़ 18 लाख की ऑनलाइन ठगी के एक मामले में एडीजे नितिन राज ने आरोपी किशोर तोमर की जमानत याचिका खारिज कर दी है। साल 2024 में शिकायतकर्ता सुनील कुमार ने आरोप लगाया था कि उसे एक टेलीग्राम लिंक के माध्यम से ऑनलाइन पैसे कमाने का झांसा दिया गया।
उसका कार्स 24 नाम की एक फर्जी वेबसाइट पर पंजीकरण कराया गया और छोटे-छोटे टास्क पूरे करने पर शुरुआत में 1,015 और 12,000 रुपये वापस किए गए। इसके बाद उनसे अलग-अलग खातों में कुल 1,18,47,353 रुपये जमा करवा लिए गए जिन्हें वह वापस नहीं निकाल पाए। इसके बाद उन्होंने साइबर थाने में शिकायत दी।
सुनवाई के दौरान आरोपी किशोर तोमर के वकील ने तर्क दिया कि वह 28 दिसंबर 2024 से जेल में हैं। यह भी तर्क दिया गया कि सह आरोपियों प्रमोद कुमार, अभिषेक शर्मा और मुकेश नाथ को हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है, इसलिए समानता के आधार पर किशोर को भी जमानत मिलनी चाहिए।
सरकारी वकील ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी इस अपराध में सक्रिय रूप से शामिल था। जांच में पाया गया कि शिकायतकर्ता के खाते से दो लाख रुपये सीधे आरोपी के कर्नाटक बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए थे। आरोपी के बैंक खाते के खिलाफ 9 साइबर अपराध की शिकायतें दर्ज हैं जो दिखाता है कि वह एक आदतन अपराधी है।
एडीजे ने कहा कि पूरे षडयंत्र का खुलासा करने और पैसों के लेन-देन का पता लगाने के लिए हिरासत आवश्यक है। इसी को आधार मानते हुए आरोपी की याचिका को खारिज कर दिया गया।
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उसका कार्स 24 नाम की एक फर्जी वेबसाइट पर पंजीकरण कराया गया और छोटे-छोटे टास्क पूरे करने पर शुरुआत में 1,015 और 12,000 रुपये वापस किए गए। इसके बाद उनसे अलग-अलग खातों में कुल 1,18,47,353 रुपये जमा करवा लिए गए जिन्हें वह वापस नहीं निकाल पाए। इसके बाद उन्होंने साइबर थाने में शिकायत दी।
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सुनवाई के दौरान आरोपी किशोर तोमर के वकील ने तर्क दिया कि वह 28 दिसंबर 2024 से जेल में हैं। यह भी तर्क दिया गया कि सह आरोपियों प्रमोद कुमार, अभिषेक शर्मा और मुकेश नाथ को हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है, इसलिए समानता के आधार पर किशोर को भी जमानत मिलनी चाहिए।
सरकारी वकील ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी इस अपराध में सक्रिय रूप से शामिल था। जांच में पाया गया कि शिकायतकर्ता के खाते से दो लाख रुपये सीधे आरोपी के कर्नाटक बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए थे। आरोपी के बैंक खाते के खिलाफ 9 साइबर अपराध की शिकायतें दर्ज हैं जो दिखाता है कि वह एक आदतन अपराधी है।
एडीजे ने कहा कि पूरे षडयंत्र का खुलासा करने और पैसों के लेन-देन का पता लगाने के लिए हिरासत आवश्यक है। इसी को आधार मानते हुए आरोपी की याचिका को खारिज कर दिया गया।