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Mahendragarh-Narnaul News: इरादों की आग से एवरेस्ट फतह, अब सात महाद्वीपों की चोटियों पर नजर
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महेंद्रगढ़। कहते हैं कि मजबूत हौसलों के आगे पहाड़ भी रास्ता छोड़ देते हैं। महेंद्रगढ़ के गांव पालड़ी पनिहारा निवासी मेजर अनिरुद्ध यादव ने इस कहावत को सच कर दिखाया। अनिरुद्ध ने 27 मई 2025 को दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट फतह पर तिरंगा फहरा था। अब उनका अगला लक्ष्य दुनिया के सभी सात महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों पर तिरंगा फहराना है।
अनिरुद्ध ने बताया कि पर्वतारोही को स्कूली दिनों में बछेंद्री पाल की कहानी से प्रेरणा मिली। साल 2017 में कश्मीर के ऊंचे पहाड़ों को देखकर उन्होंने एवरेस्ट चढ़ने का मन बनाया। साल 2015 में वे सेना में भर्ती हुए थे।
पर्वतारोहण दल ने 15 मई 2025 को माउंट एवरेस्ट बेस कैंप से अपनी अंतिम चढ़ाई शुरू की। 18 मई की रात दल लगभग 8,400 मीटर की ऊंचाई पर पहुंच गया था लेकिन अचानक आए बर्फीले तूफान के कारण उन्हें वापस कैंप- 2 में लौटना पड़ा।
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मौसम सुधरने पर 25 मई को कैंप-2 से दोबारा चढ़ाई शुरू की गई। अंततः 27 मई 2025 की सुबह टीम माउंट एवरेस्ट के शिखर पर पहुंचने में सफल रही। अपने 22 साथियों के साथ सफल चढ़ाई करने पर उनका नाम फरवरी 2026 में गिनीज वर्ल्ड बुक में दर्ज किया गया है।
मेजर अनिरुद्ध ने आर्मी माउंटेनियरिंग इंस्टीट्यूट से प्रशिक्षण प्राप्त किया। उन्होंने बेसिक और एडवांस पर्वतारोहण कोर्स किए। एवरेस्ट अभियान से पहले 6,000 और 7,000 मीटर की ऊंचाई वाली चोटियों पर चढ़ाई का अनुभव भी लिया। संवाद
गहरी खाई और हिमस्खलन सबसे बड़ी चुनौती
पर्वतारोहण के समय अत्यधिक खराब मौसम और -50°C तक का तापमान रहा। साथ ही रास्ते में खतरनाक गहरी दरारें आई और सीढ़ी व तार के माध्यम से जान जोखिम में डालकर सफर पूरा किया। इसके साथ ही बीच में होने वाले हिमस्खलन और बर्फीला तूफान भी जान के लिए खतरा बना रहा।
इन चोटियों की कर चुके चढ़ाई
माउंट एवरेस्ट के अलावा मेजर अनिरुद्ध ने माउंट कामेट, माउंट मुकुट, माउंट मचोई और माउंट जो जोंगो पर भी चढ़ाई की है। ये सभी अभियान चुनौतीपूर्ण थे और उन्होंने इन्हें पूरा किया।
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अनिरुद्ध ने बताया कि पर्वतारोही को स्कूली दिनों में बछेंद्री पाल की कहानी से प्रेरणा मिली। साल 2017 में कश्मीर के ऊंचे पहाड़ों को देखकर उन्होंने एवरेस्ट चढ़ने का मन बनाया। साल 2015 में वे सेना में भर्ती हुए थे।
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पर्वतारोहण दल ने 15 मई 2025 को माउंट एवरेस्ट बेस कैंप से अपनी अंतिम चढ़ाई शुरू की। 18 मई की रात दल लगभग 8,400 मीटर की ऊंचाई पर पहुंच गया था लेकिन अचानक आए बर्फीले तूफान के कारण उन्हें वापस कैंप- 2 में लौटना पड़ा।
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मौसम सुधरने पर 25 मई को कैंप-2 से दोबारा चढ़ाई शुरू की गई। अंततः 27 मई 2025 की सुबह टीम माउंट एवरेस्ट के शिखर पर पहुंचने में सफल रही। अपने 22 साथियों के साथ सफल चढ़ाई करने पर उनका नाम फरवरी 2026 में गिनीज वर्ल्ड बुक में दर्ज किया गया है।
मेजर अनिरुद्ध ने आर्मी माउंटेनियरिंग इंस्टीट्यूट से प्रशिक्षण प्राप्त किया। उन्होंने बेसिक और एडवांस पर्वतारोहण कोर्स किए। एवरेस्ट अभियान से पहले 6,000 और 7,000 मीटर की ऊंचाई वाली चोटियों पर चढ़ाई का अनुभव भी लिया। संवाद
गहरी खाई और हिमस्खलन सबसे बड़ी चुनौती
पर्वतारोहण के समय अत्यधिक खराब मौसम और -50°C तक का तापमान रहा। साथ ही रास्ते में खतरनाक गहरी दरारें आई और सीढ़ी व तार के माध्यम से जान जोखिम में डालकर सफर पूरा किया। इसके साथ ही बीच में होने वाले हिमस्खलन और बर्फीला तूफान भी जान के लिए खतरा बना रहा।
इन चोटियों की कर चुके चढ़ाई
माउंट एवरेस्ट के अलावा मेजर अनिरुद्ध ने माउंट कामेट, माउंट मुकुट, माउंट मचोई और माउंट जो जोंगो पर भी चढ़ाई की है। ये सभी अभियान चुनौतीपूर्ण थे और उन्होंने इन्हें पूरा किया।