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Mahendragarh-Narnaul News: हकेंवि की डॉ. अंशु शर्मा को शोध के लिए मिले 60 लाख
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फोटो संख्या:64- शोध परियोजना प्राप्त होने के बाद विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार से म
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महेंद्रगढ़। विश्वविद्यालय ने अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय की डॉ. अंशु शर्मा को शोध के लिए 60 लाख रुपये की राशि मिली है। इससे बेहतर ऊर्जा भंडारण वाले सुपरकैपेसिटर व स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन आधारित नैनो सामग्री विकसित की जाएंगी।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने डॉ. अंशु शर्मा को इस उपलब्धि पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि एआईसीटीई जैसी प्रतिष्ठित संस्था से दो शोध परियोजनाएं मिलना विश्वविद्यालय के लिए गर्व की बात है। इससे विश्वविद्यालय में शोध और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
पहली परियोजना के लिए डॉ. अंशु शर्मा को प्रधान अन्वेषक बनाया गया है। इसके लिए 33 लाख रुपये का अनुदान स्वीकृत हुआ है। इस शोध में मेटल-ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क और कार्बन क्वांटम डॉट्स से नई तरह की इलेक्ट्रोड सामग्री तैयार की जाएगी जिससे बेहतर ऊर्जा भंडारण वाले सुपरकैपेसिटर विकसित किए जा सकेंगे। यह तकनीक इलेक्ट्रिक वाहनों, पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक्स और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में उपयोगी साबित हो सकती है।
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दूसरी परियोजना में डॉ. शर्मा सह-प्रधान अन्वेषक हैं। इसके लिए 27 लाख रुपये की राशि मंजूर हुई है। इस शोध में ग्रेफाइटिक कार्बन नाइट्राइड आधारित नैनो सामग्री विकसित की जाएगी जिसका उपयोग स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण में किया जाएगा।
एआईसीटीई की लैब टू मार्केट योजना का उद्देश्य प्रयोगशालाओं में होने वाले शोध को ऐसी तकनीकों में बदलना है। जिनका समाज और उद्योग में उपयोग हो सके।
डॉ. अंशु शर्मा नैनो सामग्री, ऊर्जा भंडारण, फोटोकैटलिसिस और पर्यावरण सुधार के क्षेत्र में काम कर रही हैं। उनके कई शोध पत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं।
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विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने डॉ. अंशु शर्मा को इस उपलब्धि पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि एआईसीटीई जैसी प्रतिष्ठित संस्था से दो शोध परियोजनाएं मिलना विश्वविद्यालय के लिए गर्व की बात है। इससे विश्वविद्यालय में शोध और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
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पहली परियोजना के लिए डॉ. अंशु शर्मा को प्रधान अन्वेषक बनाया गया है। इसके लिए 33 लाख रुपये का अनुदान स्वीकृत हुआ है। इस शोध में मेटल-ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क और कार्बन क्वांटम डॉट्स से नई तरह की इलेक्ट्रोड सामग्री तैयार की जाएगी जिससे बेहतर ऊर्जा भंडारण वाले सुपरकैपेसिटर विकसित किए जा सकेंगे। यह तकनीक इलेक्ट्रिक वाहनों, पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक्स और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में उपयोगी साबित हो सकती है।
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दूसरी परियोजना में डॉ. शर्मा सह-प्रधान अन्वेषक हैं। इसके लिए 27 लाख रुपये की राशि मंजूर हुई है। इस शोध में ग्रेफाइटिक कार्बन नाइट्राइड आधारित नैनो सामग्री विकसित की जाएगी जिसका उपयोग स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण में किया जाएगा।
एआईसीटीई की लैब टू मार्केट योजना का उद्देश्य प्रयोगशालाओं में होने वाले शोध को ऐसी तकनीकों में बदलना है। जिनका समाज और उद्योग में उपयोग हो सके।
डॉ. अंशु शर्मा नैनो सामग्री, ऊर्जा भंडारण, फोटोकैटलिसिस और पर्यावरण सुधार के क्षेत्र में काम कर रही हैं। उनके कई शोध पत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं।