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Mahendragarh-Narnaul News: अवैध खनन मामले में पूर्व खनन अधिकारी संजय सिम्बरवाल को जमानत
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नारनौल। अवैध खनन से जुड़े चर्चित मामले में आरोपी पूर्व खनन अधिकारी संजय सिम्बरवाल को अदालत ने नियमित जमानत दे दी है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हर्षाली चौधरी की अदालत ने यह आदेश सुनाया। आरोपी करीब दो माह से न्यायिक हिरासत में था।
मामला गुरुग्राम एंटी करप्शन ब्यूरो थाना में दर्ज 16 अप्रैल 2024 से संबंधित है। इसमें धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था।
जांच में आरोप लगाया गया कि अवैध खनन में पकड़े गए वाहनों को फर्जी इनवॉइस और शपथ पत्रों के आधार पर कम जुर्माना लेकर छोड़ा गया जिससे सरकार को लाखों रुपये का नुकसान हुआ।
बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपी ने विभागीय प्रक्रिया और कर्मचारियों की ओर से सत्यापित दस्तावेजों के आधार पर ही वाहन रिलीज किए थे। उन्होंने कहा कि आरोपी पर रिश्वत लेने का आरोप सीधे तौर पर नहीं है। साथ ही जांच पूरी हो चुकी है और अदालत में चालान पेश किया जा चुका है, इसलिए आरोपी को हिरासत में रखने की आवश्यकता नहीं है।
अदालत ने कहा कि जांच पूरी हो चुकी है और मामला मुख्य रूप से दस्तावेजी साक्ष्यों पर आधारित है। ऐसे में आगे की हिरासत आवश्यक नहीं है। अदालत ने यह भी माना कि मुकदमे के निष्पादन में लंबा समय लग सकता है।
अदालत ने आरोपी को नियमित जमानत देते हुए निर्देश दिए कि वह प्रत्येक सुनवाई पर उपस्थित रहेगा और किसी भी गवाह को प्रभावित करने या साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने का प्रयास नहीं करेगा।
मामला गुरुग्राम एंटी करप्शन ब्यूरो थाना में दर्ज 16 अप्रैल 2024 से संबंधित है। इसमें धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था।
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जांच में आरोप लगाया गया कि अवैध खनन में पकड़े गए वाहनों को फर्जी इनवॉइस और शपथ पत्रों के आधार पर कम जुर्माना लेकर छोड़ा गया जिससे सरकार को लाखों रुपये का नुकसान हुआ।
बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपी ने विभागीय प्रक्रिया और कर्मचारियों की ओर से सत्यापित दस्तावेजों के आधार पर ही वाहन रिलीज किए थे। उन्होंने कहा कि आरोपी पर रिश्वत लेने का आरोप सीधे तौर पर नहीं है। साथ ही जांच पूरी हो चुकी है और अदालत में चालान पेश किया जा चुका है, इसलिए आरोपी को हिरासत में रखने की आवश्यकता नहीं है।
अदालत ने कहा कि जांच पूरी हो चुकी है और मामला मुख्य रूप से दस्तावेजी साक्ष्यों पर आधारित है। ऐसे में आगे की हिरासत आवश्यक नहीं है। अदालत ने यह भी माना कि मुकदमे के निष्पादन में लंबा समय लग सकता है।
अदालत ने आरोपी को नियमित जमानत देते हुए निर्देश दिए कि वह प्रत्येक सुनवाई पर उपस्थित रहेगा और किसी भी गवाह को प्रभावित करने या साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने का प्रयास नहीं करेगा।