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Mahendragarh-Narnaul News: हकेंवि में उपनिवेशवाद से मुक्त साहित्य पर अंतरराष्ट्रीय मंथन शुरू
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फोटो संख्या:-82 हकेंवि में सम्मेलन की स्मारिका का विमोचन करते हुए कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार व
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महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय में गुरुवार को दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने स्वदेशी दृष्टिकोण और हाशिए पर रहे वर्गों की आवाज को अकादमिक विमर्श में स्थान देने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक खोज करने से पहले अपनी मातृभाषा में ही सोचता है।
यह सम्मेलन स्पेन की यूनिवर्सिटी ऑफ अल्काला और कम्पेरेटिव लिटरेचर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। इसका विषय है अंग्रेजी साहित्य को उपनिवेशवादी प्रभाव से मुक्त करना स्वदेशी ज्ञान, वैकल्पिक कथाएं और ज्ञान का भविष्य।
सम्मेलन में भारत सहित स्पेन, नाइजीरिया, अल्जीरिया, बांग्लादेश, इंग्लैंड और सऊदी अरब से शिक्षाविद, शोधकर्ता और विद्यार्थी शामिल हुए। कुल 670 सारांश प्राप्त हुए। इनमें से 472 शोध पत्रों का पंजीकरण किया गया और 554 प्रतिभागी इसमें भाग ले रहे हैं।
उद्घाटन सत्र में कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार, गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अतनु भट्टाचार्य, स्पेन से प्रो. फ्रांसिस्को साएज दे अदाना सहित कई विद्वान उपस्थित रहे। प्रो. भट्टाचार्य ने भारतीय ज्ञान परंपरा, वेदों, उपनिषदों और पर्यावरणीय चेतना पर विचार रखते हुए डिकॉलोनाइजेशन की अवधारणा पर प्रकाश डाला।
मुख्य वक्ता प्रो. सुधीर कुमार ने विष्णु पुराण के संदर्भ में कहा कि सच्चा ज्ञान वही है जो मुक्ति प्रदान करे। विभिन्न सत्रों में अन्य विद्वानों ने भी अपने विचार रखे। सम्मेलन के आयोजन में विभागाध्यक्ष प्रो. तनु गुप्ता सहित कई शिक्षकों और शोधकर्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. श्वेता नंदा ने प्रस्तुत किया।
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यह सम्मेलन स्पेन की यूनिवर्सिटी ऑफ अल्काला और कम्पेरेटिव लिटरेचर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। इसका विषय है अंग्रेजी साहित्य को उपनिवेशवादी प्रभाव से मुक्त करना स्वदेशी ज्ञान, वैकल्पिक कथाएं और ज्ञान का भविष्य।
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सम्मेलन में भारत सहित स्पेन, नाइजीरिया, अल्जीरिया, बांग्लादेश, इंग्लैंड और सऊदी अरब से शिक्षाविद, शोधकर्ता और विद्यार्थी शामिल हुए। कुल 670 सारांश प्राप्त हुए। इनमें से 472 शोध पत्रों का पंजीकरण किया गया और 554 प्रतिभागी इसमें भाग ले रहे हैं।
उद्घाटन सत्र में कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार, गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अतनु भट्टाचार्य, स्पेन से प्रो. फ्रांसिस्को साएज दे अदाना सहित कई विद्वान उपस्थित रहे। प्रो. भट्टाचार्य ने भारतीय ज्ञान परंपरा, वेदों, उपनिषदों और पर्यावरणीय चेतना पर विचार रखते हुए डिकॉलोनाइजेशन की अवधारणा पर प्रकाश डाला।
मुख्य वक्ता प्रो. सुधीर कुमार ने विष्णु पुराण के संदर्भ में कहा कि सच्चा ज्ञान वही है जो मुक्ति प्रदान करे। विभिन्न सत्रों में अन्य विद्वानों ने भी अपने विचार रखे। सम्मेलन के आयोजन में विभागाध्यक्ष प्रो. तनु गुप्ता सहित कई शिक्षकों और शोधकर्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. श्वेता नंदा ने प्रस्तुत किया।
